लगान (२००१ फ़िल्म)

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लगान
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लगान का पोस्टर
सितारे आमिर ख़ान,
ग्रेसी सिंह,
रैचेल शैली,
पॉल ब्लैकथॉर्न,
सुहासिनी मुलय,
कुलभूषण खरबंदा,
रघुवीर यादव,
राजेन्द्र गुप्ता
प्रदर्शन की तिथि(यां) १५ जून २००१
देश Flag of India.svg भारत
भाषा हिन्दी
अवधी
भोजपुरी
अंग्रेज़ी

लगान २००१ में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है । लगान (उर्फ़ लगान: वन्स अपॊन अ टाइम इन इन्डीया) हिन्दी चलचित्र ई.स.२००१ में भारत में प्र्स्तुत की गई थी। यह फ़िल्म आशुतोष गौरीकर की मूल कथा पर आधारित है, जिसका उन्होनेही दिग्दर्शन किया है। आमीर ख़ान इस्के निर्माता होने के अलावा मुख्य किर्दार भी है। साथ मे ग्रेसी सींह, रचेल शॅली और पॉल ब्लॅकथॉर्न ने पात्र निभाये है।

फ़िल्म रानी विक्टोरिया के ब्रिटानी राज की एक सूखा पीडित गांव के किसानो पर कठोर ब्रीटानी लगान की कहानी है। जब किसान लगान कम करने की मांग कर्ते हैं, तब ब्रिटानी अफ़्सर एक प्रस्ताव देतें है। अगर क्रिकॅट के खेल में उन्को गांववासीओं ने परजित किया तो लगान मांफ़। चूनौती स्वीकारने के बाद गांवनिवासीऒं पर क्या बीतती है, यही इस फ़िल्म का चरीत्र है।

इस फ़िल्म की समालोचनात्म्क सरहाना के अलावा इस को कई देसी और विदेशी पुरस्कार भी मिले है। ऑस्कर के "सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म" पुरस्कार के लिये नियुक्त की गई यह तिसरी हिन्दी फ़िल्म है। इससे पह्ले "मधर इन्डीया" और "सलाम बॉम्बे" नियुक्त किये जा चुके हैं। ई.स.२००१ की यह बहुत लोकप्रिय फ़िल्म रही। ई.स.२००७ तक इस की डीवीडी की बिकरी सबसे अव्वल थी।

अनुक्रम

[संपादित करें] संक्षेप

यह फ़िल्म १९वी सदी में बसी ब्रिटिष राज के दौर की एक कहनी है। चम्पानेर गांव का निवासी भूवन एक हौंस्लामन्द और आदर्ष्वादी नौजवान है। मध्य प्रान्तो की ब्रिटिष छावनी के सेनापती, कॅप्टन रस्सॅल के साथ उसकी नही बनती थी। ब्रिटीष अत्याचारीओं ने जब साल का लगान दूगना ठहराया तब राजा पूरन सिंह से लगान माफ़ करवाने की बिनति करने भूवन के साथ गांववाले ब्रिटिष छावनी गये। वहां राजा, ब्रिटिष अफ़्सरों के क्रिकॅट का खेल देख रहे थे। जब एक अफ़्सर ने गांववासी को गाली दी तो भूवन अफ़्सरों से झगड पडा और क्रिकॅट के खेल की बराबरी गिल्ली-डंडा से की।

राजा के समक्ष भूवन ने कठोर लगान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई। कॅप्टन रस्सॅल को यह विवाद पसंद न आया और उन्होने भूवन को क्रिकॅट खेलने की चुनौती दी। जीते तो सालभर का लगान माफ़, हारे तो लगान तिगुना!!! गांववाले तो इस चुनौती मुकरना चाहते थे, मगर कॅप्टन रस्सॅल ने ये फ़ैसला सिर्फ़ भूवन के हाथों में सौंपा। चुनौती को और बढाते, तीन साल का लगान माफ़ करने की भी लालच दी। भूवन ने मैदान पर द्वन्द्व का न्योता स्वीकार कर लिया।

अब सारा चम्पानेर मानो भूवन को सूली पर चढाना चाहता था। सबकी ज़िन्दगी तो अब तबाह होने जा रही थी। मगर भूवन के लीये तो जब तक साँस तब तक आस। कई सालों से सूखा चल रहा था। आखिर एक साल का लगान भी तो कहां से भरते? और फिर कॅप्टन रसॅल भी तो चुनौती से नहीं हटने वाले थे।

अगवानी बन भूवन ने लकड़ी का बल्ला और गेंद बनाए। कुछ गिने-चुने का दल छोडकर, सारा गांव भूवन के खेल पर हंस रहा था। क्रिकॅट सीखने यह टोली छावनी पर जाने लगी। वहां कॅप्टन रसॅल की बहन ऍलिज़ाबॅथ ने उनको झाडीयों में छिपे देख लीया। उसे अपने भाई का गांववासीयों से व्यवाहर पसन्द नहीं आया। वह गांव के खिलाड़ीयों को गांव के नजदीक मैदान पर क्रिकॅट सिखाने लगी। हिन्दी भाषांतर के लिये एक नौकर भी छावनी से साथ लाती।

धीरे-धीरे, सहज-सहज, भूवन की ये खीचडी टोली अपने अपूर्व ढंग से क्रिकॅट का खेल सीखने लगी। हाथ मज़बूत करने वे लकड़ी काटते। फ़ील्डिन्ग सीखने भगाई मुर्गीयों का पीछा कर उन्हे पकडते। गोली अपने हाथ पवन चक्की की तरह घुमा गेंदबाज़ी करने लगा।

अब गांव के लोगों में भी उत्साह दिखने लगा और अखिर दस खिलाडी तो बन गये। एक दिन खेलते वक्त गेंद कचरा के पास गिरी। कचरा गांव का अछूत सफ़ाई सेवक था। लौटाते वक्त उसने गेंद इस तरह घुमाकर फैंकी की भूवन दंग रह गया। गांव की टीम को ग्यारहवाँ चयन मिल गया। मगर गांव वाले एक अछूत को किस तरह अपनाते? वे तो उसे छूते तक नहिं। गांव और सदियों से चली इस परंपरा की भूवन ने आलोचना की। भूवन के भाव भरे शब्दों से गांव के नीवासी मान गए।

आख़िर मुक़ाबले का दिन जागा। सारे प्रांत से लोग खेल देखने आए। कॅप्टन रसॅल के वरिष्ठ अफ़्सर भी मौजूद थे। खेल तीन दिनो का निश्चित किया गया था। गांववासीओं ने पहले गेंद फैंकना शुरू किया। उनका श्रीगणेष अछ्छा हुआ। जल्द ही एक रनाऊट से विकॅट गिरी। गोली की अनोखी गेंद फैकने की अदा से घबड़ा कर एक और गोरा खिलाडी आउट हुआ। मगर ब्रिटिष खिलाड़ी भी कम न थे। धीर-धीरे वे पारी संभालते गये। अचानक कचरा गेंद घुमाने से रहा। लाखा ने तो कई कॅच भी ग़वाए। पहले दिन के अन्त में गोरी टोली हावी थी।

उस रात ऍलिज़ाबॅथ ने छावनी में लाखा को कॅप्टन रसॅल से मिलते देख लिया। अब पता चला की लाखा गांववालों से ग़द्दारी कर रहा था। ऍलिज़ाबॅथ गांववासीयों को क्रिकॅट की तालीम देती थी यह बात कॅप्टन रसॅल को बता दी। यह भी बताया की कॅच भी जानबूझ कर ग़वाए। जब गांववासीयों को पता चला तो लाखा की खाल उधेडना चाह्ते थे। उन्से भाग निकले लाखा ने गांव के मंदिर में पनाह ली। लाखा ने कुबूल किया की भूवन से जलन के कारण उस्ने यह धोखेबाज़ी की। वह भी भुवन की तरह गौरी को चाहता था मगर गौरी भूवन को पसंद करती थी। एक मौका और लाखा को दिया गया।

अगले दिन लाखा ने ज़बर्दस्त कॅच कीये। कचरा भी अपना जादू फिर चलाने लगा। उस ने एक साथ तीन गेंदों में तीन विकॅटें ली। गोरों की पारी करीब तीनसौ रन पर समाप्त हुई।

भूवन की टोली ने बल्लेबाज़ी की जोरदार शुरूआत की। ब्रिटिष सेना के भूतपूर्व सिपाही देवा कमनसीबी से आउट हो गये। फिर ब्रिटिष खिलाड़ीओं ने गांव के बल्लेबज़ों की निंदा कर उनको अकुलाया और वे जल्द आउट होने लगे। दूसरा दिन ख़त्म हुआ और आधे रन बनाने अभी बाकी थे। उधर आधी टीम आउट हो चूकी थी। मगर भुवन अभी खेल मे जीवित था।

तीसरे दिन गांव के बैद ईश्वर काका ने और इस्माइल ने भूवन का साथ दिया। इस्माइल को तो पिछ्ले दिन चोट लगी थी। बहुत जवाब्दारी से दोनो ने बल्लेबाज़ी की। दोनो रन-आउट हो गये। अब कचरा ने बल्लेबाज़ी संभाली। भूवन ने बहुत कोषिश की कि ज़्यादा बल्लेबाज़ी वही संभाले। आख़्ररी गेंद पर कचरा को छ रनो की ज़रूरत थी। मगर वह एक ही रन ले पाया। क्या गांववाले हारे? अम्पायर ने नो-बॉल का इशारा किया। अब एक और गेंद का समना भूवन ने झेला। भुवन ने छक्का मारा और गांव मुक़ाबला जीत गया। और साथ ही बरसात भी शुरू हुइ।

कॅप्टन रस्सॅल को उन्के वरिष्ठों ने मध्य अफ़रीका भेज दिया। ऍलिज़ाबॅथ लन्धन लौटी। रोते रोते भूवन और गांव के लोगों से उस्ने बिदाई ली। फ़िल्म के अन्त मे एक पार्श्ववाणी बताती है कि कॅप्टन रस्सॅल की बदली अफ़्रीका हुई और ऍलिज़ाबॅथ सारी ज़िन्दगी स्वयम को भुवन की राधा मान कर, कँवारी रही। भुवन और गौरी का विवाह हो गया।

[संपादित करें] चरित्र

[संपादित करें] मुख्य कलाकार

[संपादित करें] दल

[संपादित करें] संगीत

अ र रहमान

लगान आस्कर के लिये नामित हुइ थी और अन्तिम ५ मे पहुची

[संपादित करें] परिणाम

[संपादित करें] बौक्स ऑफिस

[संपादित करें] समीक्षाएँ

[संपादित करें] नामांकरण और पुरस्कार

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ

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