प्रोटॉन
प्रोटॉन एक धनात्मक विध्युत आवेशयुक्त मूलभूत कण है, जो परमाणु के नाभिक मेंन्यूट्रॉन के साथ पाया जाता हैं । इसे p प्रतिक चिन्ह द्वारा दर्शाया जाता है। इस पर 1.602E−19 कूलाम्ब का धनावेश होता है। इसका द्रव्यमान 1.6726E−27 किग्रा होता है जो इलेक्ट्रॉन के द्रब्यमान के लगभग १८३७ गुना है। प्रोटॉन तीन प्राथमिक कणो दो अप-क्वार्क और एक डाउन-क्वार्क से मिलकर बना होता है। स्वतंत्र रुप से यह हाइड्रोजनआयन H+ के रुप में पाया जाता है।
[संपादित करें] विवरण
प्रोटॉनफर्मिऑन होते है, जिनकीस्पिन १/२ होती है और यह तीन क्वार्क से मिलकर बने होते है अर्थात यह बेर्यॉन (हेड्रॉन का एक प्रकार ) के रुप में होते है। इनके दो अप-क्वार्क एवं एक डाउन-क्वार्क आपस में सशक्त बल ( strong force ) से जुडे होते है जोग्लुऑन द्वारा लागू होते है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का जोडान्युक्लिऑन कहलाता है जो किपरमाणु नाभिक में नाभकीय बल ( nuclear force ) से आपस में बंधे होते है।हाइड्रोजन ही एक मात्र ऐसा तत्व है जिसके परमाणु नाभिक में प्रोटॉनअकेला पाया जाता है अन्यथा अन्य सभी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन न्यूट्रॉन के साथ पाया जाता है।हाइड्रोजनपरमाणु के नाभिक में केवल एक प्रोटॉन होता हैन्यूट्रॉन नहीं होता है जबकि इसके दो भारी समस्थानिक ड्यूटेरियम में एक प्रोटॉन व एक न्यूट्रॉन एवंट्रिटियम में एक प्रोटॉन व दोन्यूट्रॉन होते है।
[संपादित करें] स्थायित्व
प्रोटॉन ,इलेक्ट्रॉन ( ऋणात्मक बीटा-क्षय ) का अवशोषण कर न्यूट्रॉन में बदल जाता है।
p+ + e- → no + ve
जहॉ p प्रोटॉन , e इलेक्ट्रॉन , n न्यूट्रॉन , और ve इलेक्ट्रॉन न्यूट्रीनो है।
इसके विपरित न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन ( ऋणात्मक बीटा-क्षय ) का उत्सर्जन कर प्रोटॉन में बदल जाता है।
no → p+ + e- + ve-
प्रोटॉन कीअर्ध-आयु बहुत लम्बी होती है ( आज के ब्रह्माण्ड की आयु से भी अधिक )
[संपादित करें] इतिहास
प्रोटॉन का नामकरण ग्रीक शब्द प्रोटोस protos से हुआ है जिसका अर्थ होता है "प्रथम्" । १९२० मेंरदरफोर्ड ने इसकी खोज की थी।