पूर्वाभाद्रपद

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पूर्वाभाद्रपद

गुरु का नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद का अंतिम चरण मीन राशि में आता है। इसे ही नाम से पहचाना जाता है।

गुरु का नक्षत्र व गुरु की राशि मीन में होने से ऐसा जातक आकर्षक व्यक्तित्व का धनी, गुणवान, धर्म, कर्म को मानने वाला, ईमानदार, परोपकारी, न्यायप्रिय होता है। गुरु यदि अपनी राशि धनु या मीन में हो तो ऐसे जातक सदाचारी होते हैं।

ऐसे जातकों को शिक्षण से संबंधित कार्यों में भी उत्तम सफलता मिलती है। गुरु यदि मेष लग्न में नवम भाव, लग्न या पंचम भाव या उच्च का होकर चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे जातक माता, भूमि, भवन, संतान, विद्या भाग्य के क्षेत्र में उत्तम स्थिति पाते है।

मीन राशि में हो तो जन्म स्थान से दूर भाग्योदय होता है।

वृषभ लग्न में गुरु की स्थिति एकादश, तृतीय पंचम सप्तम में हो तो लाभ के मामलों में जातक ईमानदारी अधिक रखता है। पत्नी गुणी मिलती है।

देखिये[संपादित करें]

स्रोत[संपादित करें]