राहु
| राहु | |
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राहु: सर्पासुर का सिर, ब्रिटिश संग्रहालय |
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| उत्तर | |
| सहबद्धता | ग्रह, असुर |
| मंत्र | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥ |
| पत्नी | कराली |
| वाहन |
नील/ श्याम सिंह या |
राहु (
) हिन्दू ज्योतिष के अनुसार उस असुर का कटा हुआ सिर है, जो ग्रहण के समय सूर्य या चंद्रमा का ग्रहण करता है। इसे कलात्मक रूप में बिना धड़ वाले सर्प के रूप में दिखाया जाता है, जो रथ पर आरूढ़ है और रथ आठ श्याम वर्णी घोड़ों द्वारा खींचा जा रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु को नवग्रह में एक स्थान दिया गया है। दिन में राहुकाल नामक मुहूर्त (२४ मिनट) की अवधि होती है जो अशुभ मानी जाती है।
समुद्र मंथन के समय राहु नामक एक असुर ने धोखे से दिव्य अमृत की कुछ बूंदें पी ली थीं। सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया और मोहिनी अवतार में भगवान विष्णु को बता दिया। इससे पहले कि अमृत उसके गले से नीचे उतरता, विष्णु जी ने उसका गला सुदर्शन चक्र से काट कर अलग कर दिया। इससे उसका सिर अमर हो गया। यही राहु ग्रह बना और सूर्य चंद्रमा से इसी कारण द्वेष रखता है। इसी द्वेष के चलते वह सूर्य और चंद्र को ग्रहण करने का प्रयास करता है। ग्रहण करने के पश्चात सूर्य या चंद्र उसके कटे गले से निकल आते हैं और मुक्त हो जाते हैं।
अनुक्रम |
राहु की स्थिति [संपादित करें]
भारतीय ज्योतिष के अनुसार राहु और केतु सूर्य एवं चंद्र के परिक्रमा पथों के आपस में काटने के दो बिन्दुओं के द्योतक हैं। सूर्य और चंद्र के ब्रह्मांड में चलने के अनुसार ही राहु और केतु की स्थिति भी बदलती रहती है। अंग्रेज़ी या यूरोपीय विज्ञान में राहू एवं केतु को को क्रमशः उत्तरी एवं दक्षिणी लूनर नोड कहते हैं। तभी ये तथ्य कि सूर्य या चंद्र जब इनमें से किसी एक बिन्दु/स्थिति पर उपस्थित होते हैं ग्रहण होता है, ये तथ्य इस कथा का जन्मदाता बना कि राहु या केतु ग्रहण के समय सूर्य या चंद्र को ग्रसित कर लेते हैं।
गुण [संपादित करें]
राहु पौराणिक संदर्भों से धोखेबाजों, सुखार्थियों, विदेशी भूमि में संपदा विक्रेताओं, ड्रग विक्रेताओं, विष व्यापारियों, निष्ठाहीन और अनैतिक कृत्यों, आदि का प्रतीक रहा है। यह अधार्मिक व्यक्ति, निर्वासित, कठोर भाषणकर्त्ताओं, झूठी बातें करने वाले, मलिन लोगों का द्योतक भी रहा है। इसके द्वारा पेट में अल्सर, हड्डियों, और स्थानांतरगमन की समस्याएं आती हैं। राहु व्यक्ति के शक्तिवर्धन, शत्रुओं को मित्र बनाने में महत्वपूर्ण रूप से सहायक रहता है। बौद्ध धर्म के अनुसार राहु क्रोधदेवताएं में से एक है।
राहु मंत्र [संपादित करें]
"ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥", १८००० बार ४० दिन तक[1]
सन्दर्भ [संपादित करें]
- ↑ नव-ग्रह यन्त्र|दिनांक: १७ फ़रवरी, २०१०। अभिगमन तिथि: ३० सितंबर, २०१२
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
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| विकिमीडिया कॉमन्स पर राहु से सम्बन्धित मीडिया है। |