हिन्दू पंचांग

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हिन्दू पंचांग हिन्दू समाज द्वारा माने जाने वाला कैलेंडर है। इसके भिन्न-भिन्न रूप मे यह लगभग पूरे भारत मे माना जाता है। पंचांग नाम पांच प्रमुख भागो से बने होने के कारण है, यह है: पक्ष, तिथी, वार, योग और कर्ण। एक साल मे १२ महीने होते है। हर महिने मे १५ दिन के दो पक्ष होते है, शुक्ल और कृष्ण।

पंचांग (पंच + अंग = पांच अंग) हिन्दू काल-गणना की रीति से निर्मित पारम्परिक कैलेण्डर या कालदर्शक को कहते हैं।

पंचांग का एक पृश्ठ 1871-72.

12 मास का एक वर्ष और 7 दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ | महीने का हिसाब सूर्यचंद्रमा की गति पैर रखा जाता है | यह 12 राशियाँ बारह सौर मास हैं | जिस दिन सूर्य जिस राशि मे प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है | पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र मे होता है उसी आधार पैर महीनो का नामकरण हुआ है | चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से 11 दिन 3 घड़ी 48 पल छोटा है | इसीलिए हर 3 वर्ष मे इसमे 1 महीना जोड़ दिया जाता है जिसे अधिक मास कहते हैं।

प्राचीन भारतीय सभ्यता में समय को यूनिटों में बांटकर जो कैलेंडर तैयार किया गया था उसे ज्योतिष शास्त्र में पंचांग कहते हैं. जैसे अंग्रेज़ी कैलेंडर में तिथि, वार, मास आदि का विभाजन करके समय को दर्शाया जाता है उसी तरह ज्योतिष शास्त्र में भी तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इन पाँच अंगों में समय को बांटकर कैलेंडर तैयार किया जाता है. इसके अनुसार एक साल को बारह महीनों में बांटा गया है और प्रत्येक महीने में तीस दिन होते हैं. महीने को चंद्रमा की कलाओं के घटने और बढ़ने के आधार पर दो पक्षों यानी शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है. एक पक्ष में लगभग पंद्रह दिन या दो सप्ताह होते हैं. एक सप्ताह में सात दिन होते हैं. एक दिन को तिथि कहा गया है जो पंचांग के आधार पर उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक होती है. दिन को चौबीस घंटों के साथ-साथ आठ पहरों में भी बांटा गया है. एक प्रहर कोई तीन घंटे का होता है. एक घंटे में लगभग दो घड़ी होती हैं, एक पल लगभग आधा मिनट के बराबर होता है और एक पल में चौबीस क्षण होते हैं. पहर के अनुसार देखा जाए तो चार पहर का दिन और चार पहर की रात होती है.


[संपादित करें] महीनों के नाम

महीनों के नाम पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा इस नक्षत्र होता है
चैत्र चित्रा , स्वाति
बैशाख विशाखा , अनुराधा
ज्येष्ठ ज्येष्ठा , मूल
आषाढ़ पूर्वाषाढ़ , उत्तराषाढ़
श्रावण श्रवण , धनिष्ठा, शतभिषा
भाद्रपद पूर्वभाद्र , उत्तरभाद्र
आश्विन रेवती , अश्विन , भरणी
कार्तिक कृतिका , रोहणी
मार्गशीर्ष मृगशिरा , आर्द्रा
पौष पुनवर्सु ,पुष्य
माघ अश्लेशा, मघा
फाल्गुन पूर्व फाल्गुन , उत्तर फाल्गुन , हस्त

[संपादित करें] इन्हे भी देखें

[संपादित करें] वाह्य सूत्र