तातारस्तान

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तातारस्तान गणतंत्र
Респу́блика Татарста́н (रूसी)
Татарстан Республикасы (तातार)
मानचित्र जिसमें तातारस्तान गणतंत्रРеспу́блика Татарста́н (रूसी)Татарстан Республикасы (तातार) हाइलाइटेड है
सूचना
राजधानी : काज़ान
क्षेत्रफल : ६८,००० किमी²
जनसंख्या(२०१०):
 • घनत्व :
३७,८६,४८८
 ५५.६८/किमी²
उपविभागों के नाम: रायोन
उपविभागों की संख्या: ४३
मुख्य भाषा(एँ): रूसी भाषा, तातार भाषा


तातारस्तान का नक़्शा

तातारस्तान गणतंत्र (रूसी: Респу́блика Татарста́н, रेस्पुब्लिका तातारस्तान; तातार: Татарстан Республикасы, तातारस्तान रेस्पुब्लिकासी; अंग्रेज़ी: Tatarstan Republic) या तातारिया (Тата́рия, Tatariya) रूस का एक संघीय खंड है जो उस देश की प्रशन प्रणाली में गणतंत्र का दर्जा रखता है। यह रूस के वोल्गा संघीय विभाग का हिस्सा है। तातारस्तान की राजधानी काज़ान है जो रूस के सबसे बड़े और सबसे समृद्ध शहरों में से एक है और इसे कभी-कभी 'रूस की तीसरी राजधानी' भी कहा जाता है। इस गणतंत्र का नाम तातार लोगों पर पड़ा है जो यहाँ के मूल निवासी हैं, हालांकि यहाँ रूसी और अन्य जातियों के भी बहुत लोग रहते हैं।

भूगोल[संपादित करें]

तातारस्तान रूस की राजधानी मास्को से ८०० किमी दूर है। इसका क्षेत्र वोल्गा नदी से लेकर कामा नदी (वोल्गा की एक उपनदी) तक विस्तृत है और पूर्व में यूराल पर्वतों तक जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

तुर्की और मंगोल दौर[संपादित करें]

७०० से १३०० ईसवी के काल में तातारस्तान के क्षेत्र में तुर्की लोगों का वोल्गा बुल्गारिया (Volga Bulgaria) राज्य हुआ करता था जिसका सन् ९२२ में इस्लामीकरण ही गया। इस राज्य पर कीवी रूस, ख़ज़र लोगों और किपचक लोगों का दबाव होने के बावजूद यह आज़ाद रहा और इसके यूरोप और मध्य पूर्व के साथ गहरे व्यापारिक सम्बन्ध थे। १२३० के दशक में बातु ख़ान की मंगोल फ़ौजों ने इसे परास्त कर दिया और जो नया मिश्रित समुदाय पैदा हुआ उन्हें 'वोल्गा तातार' (Volga Tatar) के नाम से जाना जाता था। यह लोग तातार भाषा बोलने लगे। १४३० के दशक में यहाँ काज़ान ख़ानत शुरू हुई और इसकी राजधानी काज़ान शहर में थी।

रूसी साम्राज्य का दौर[संपादित करें]

१५२० के दशक में रूस के त्सार इवान भयानक (Ivan the Terrible) ने काज़ान ख़ानत पर हमला किया और १५२२ में काज़ान पर क़ब्ज़ा कर लिया। उसने बहुत से मुस्लिम तातारों को ज़बरदस्ती ईसाई बनाया और १५९३ में इस इलाक़े की सभी मस्जिदें तोड़ दी गई। बहुत से गिरजे बनाए गए लेकिन मस्जिद बनाए पर सख़्त मनाही रही। बहुत अरसे बाद कैथरीन महान के ज़माने में १७६६-१७७० काल में यहाँ पहली मस्जिद बनाने की अनुमति मिली। १९वीं सदी में यहाँ के मुस्लिम समुदाय में जदीद (Джадид, Jadid) नामक विचारधारा फैली। जदीदियों का कहना था कि कट्टरवाद बुरा है, ग़ैर-मुस्लिम समुदायों के साथ भाईचारे से रहना चाहिए और पश्चिमी ज्ञान और शिक्षा को अपनाना चाहिए।

सोवियत संघ और उसके बाद का दौर[संपादित करें]

१९१७ में रूस में साम्यवादी (कोम्युनिस्ट) क्रान्ति हुई। रूस के कुछ इलाक़ों में गृह युद्ध छिड़ा, जिस दौरान कुछ तातार राष्ट्रवादियों ने यहाँ एक आज़ाद गणतंत्र चलने की कोशिश करी लेकिन उसका विलय ज़बरदस्ती सोवियत संघ में कर दिया गया। यहाँ भूखा आया जिसमें ४ लाख से ६ लाख के बीच लोग मरे। सोवियत संघ जब टूट रहा था, तब ३० अगस्त १९९० को तातारस्तान ने अपने इलाक़े पर अपना अधिपत्य घोषित कर दिया।[1] एक नया संविधान बनाया गया जिसमें १९९२ में तो तातारस्तान को एक स्वतन्त्र राज्य घोषित किया गया लेकिन २०२२ में जोड़े गए अनुच्छेद १ और ३ के अनुसार तातारस्तान को रूसी संघ का भाग भी घोषित किया गया।[2]

तातारस्तान के कुछ नज़ारे[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]