ख़ज़र लोग

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सन् ६५० और ८५० के बीच ख़ज़र ख़ागानत

ख़ज़र (रूसी:Хазары, ख़ाज़ारी; अंग्रेज़ी: Khazar) मध्यकालीन यूरेशिया की एक तुर्की जाति थी जिनका विशाल साम्राज्य आधुनिक रूस के यूरोपीय हिस्से, पश्चिमी कज़ाख़स्तान, पूर्वी युक्रेन, अज़रबेजान, उत्तरी कॉकस (चरकस्सिया, दाग़िस्तान), जोर्जिया, क्राइमिया और उत्तरपूर्वी तुर्की पर विस्तृत था। इनकी राजधानी वोल्गा नदी के किनारे बसा आतील शहर था। ख़ज़र लोगों की ख़ागानत सन् ४४८ से १०४८ तक चली। इसमें कई धर्मों के लोग और, तुर्की जातियों के अलावा, यूराली, स्लावी और अन्य जातियाँ भी रहती थीं। ख़ज़र ख़ागानत रेशम मार्ग पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव था और दक्षिण-पश्चिमी एशिया को उत्तरी यूरोप से जोड़ने वाली एक मुख्य कड़ी थी।[1]

मध्यकाल में ख़ज़र शासन ने यहूदी धर्म को अपना लिया था, यद्यपि स्तेपी के अन्य तुर्की जातियों ने सुन्नी इस्लाम अपनाया था ।

नाम[संपादित करें]

बहुत से विद्वानों का मानना है कि 'ख़ज़र' शब्द तुर्की भाषाओँ के 'गेज़ेर' या 'ख़ेज़ेर' शब्द से आया है और इसका मतलब 'ख़ानाबदोश' या 'घुम्मकड़' होता है। 'ख़ज़र' शब्द में 'ख़' अक्षर के उच्चारण पर ध्यान दें क्योंकि यह बिना बिन्दु वाले 'ख' से ज़रा भिन्न है। इसका उच्चारण 'ख़राब' और 'ख़रीद' के 'ख़' से मिलता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. A history of Russia, Central Asia, and Mongolia, David Christian, Wiley-Blackwell, 1998, ISBN 978-0-631-20814-3, ... Recent evidence suggests that the dominant language was an Oghur dialect. Anthropologically and linguistically the Khazars were similar to the other Turkic peoples of the Pontic steppes ...