कविराज श्यामलदास

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कविराज श्यामलदास भारत के इतिहासकार थे। वे राजस्थान की संस्कृति और इतिहास पर लिखने वाले आरम्भिक लेखकों में गिने जाते हैं[1]

ग्रन्थकारिता[संपादित करें]

कविराज श्यामलदास ने अपने पिता कमजी दधिवाड़िया सहित मेवाड़ के डौडिया राजपूतों के विषय में दीपंग कुल प्रकाश नामक विस्तारित कविता की रचना की थी[2]। उदयपुर राज्य के शाषक महाराणा सज्जन सिंह ने मेवाड़ के प्रामाणिक इतिहास लेखन का उत्तरदायित्व कविराज श्यामलदास को सौंपा था[3]वीर विनोद नामक यह पुस्तक मेवाड़ में लिखित प्रथम विस्तृत इतिहास है[4]। महाराणा सज्जन सिंह के उत्तराधिकारी महाराणा फ़तेह सिंह इस इतिहास के प्रकाशन के प्रति उदासीन थे। इस कारण यह पुस्तक १९३० ई. तक प्रकाशित नही हुई[5]

वार्ताकार तथा शिक्षक[संपादित करें]

कविराज श्यामलदास महाराणा सज्जन सिंह के विश्वासपात्र थे। १८८१ के भील विद्रोह की समस्या के समाधान का कार्य कविराज श्यामलदास ने ही संपन्न किया[6]। आपके शिष्य, गौरीशंकर हीराचंद ओझा भी सुप्रसिद्ध इतिहासकार तथा लेखक थे।

सम्मान और पुरस्कार[संपादित करें]

ब्रिटिश सरकार ने कविराज को महामहोपाध्याय की उपादि प्रदान की तथा `केसरे हिन्द के सम्मान से सम्मानित किया[7]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • मेवाड़ के गौरव - कविराज श्यामल दास
  • लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस संग्रह सूची में वीर विनोद [1]
  • यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो पुस्तकालय संग्रह में कविराज श्यामलदास द्वारा लिखित पुस्तकों की सूची [2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. दशरथ शर्मा (१९७०) लेक्चर्स ऑन राजपूत हिस्टरी एंड कल्चर मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली पृष्ट १ ISBN 0-8426-0262-3
  2. लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस संग्रह सूची
  3. श्रीवास्तव, विजय शंकर (१९८१) कल्चरल कोंटूर्स ऑफ़ इंडिया पृष्ट ३७ अभिनव प्रकाशन दिल्ली ISBN 978-0-391-02358-1
  4. गुप्ता आर. के. , बख्शी एस. आर. (२००८) स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री: हेरिटेज ऑफ़ राजपूत पृष्ट २४७ सरूप एंड संस, नई दिल्ली ISBN 978-81-7625-841-8
  5. गुप्ता आर. के. , बख्शी एस. आर. पृष्ट २५५
  6. पति, बिस्वमोई संपादक (२००८) इश्यूज इन मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री पृष्ट ८८ पॉपुलर प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई ISBN 978-81-7154-658-9
  7. श्रीवास्तव, विजय शंकर (१९८१) कल्चरल कोंटूर्स ऑफ़ इंडिया पृष्ट ३७