भीलवाड़ा
| भीलवाड़ा | |
| — शहर — | |
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |
| देश | |
| राज्य | राजस्थान |
| जिला | भीलवाड़ा |
| जनसंख्या | 280,185 (2001 के अनुसार [update]) |
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 421 मीटर (1,381 फी॰) |
निर्देशांक: भीलवाड़ा राजस्थान प्रान्त का एक शहर है। अजमेर -खंडवा रेलमार्ग पर स्थित भीलवाडा इस जिले का एक प्रमुख औद्योगिक शहर हैं। यह शहर 11 वीं शताब्दी से भी पुराना माना जाता हैं। कर्नल जेम्सटॉड ने अपनी पुस्तक एनाल्स एण्ड एंटीक्वीटीज ऑफ राजस्थान में इसका उल्लेख किया हैं।1825 ईस्वी में आने वाले यात्री बिशप हेबर के यात्रवृतांत में भी इस स्थान का वर्णन मिलता हैं। भीलवाडा सूती वस्त्र उद्योग का एक प्रमुख केन्द्र हैं। 1948 में राजस्थान का भाग बनने से पूर्व भीलवाडा भूतपूर्व उदयपुर रियासत का एक हिस्सा था। साहस और बलिदान की भूमि भीलवाड़ा की सीमाएं पूर्व में बूँदी, पश्चिम में राजसमंद, उत्तर में अजमेर और दक्षिण में चित्तौड़गढ़ से मिलती हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] पर्यटन स्थल
भीलवाड़ा से 6 किलोमीटर दूर मंगरोप रोड़ पर शिवालय है। जो कि हरणी महोदव के नाम से प्रसिद्ध है। जहां पर प्रत्येक शिवरात्रि पर 3 दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है। मेले का आयोजना जिला प्रशासन द्वारा नगर परिषद के सहयोग से किया जाता है। जिसमें 3 दिन तक प्रत्येक रात्रि में अलग-अलग कार्यक्रम यथा धार्मिक भजन संध्या (रात्रि जागरण), कवि सम्मेलन व सांस्क़तिक संध्या का आयोजन किया जाता है। यह मन्दिर पहाड़ी की तलहटी पर स्थित है। प्राचीन समय में यहां घना आरण्य होने से आरण्य वन कहा जाता था, जिसका अपभ्रंश हो कर हरणी नाम से प्रचलित हो गया।
[संपादित करें] मेनाल
माण्डलगढ से 20 किलोमीटर दूर चितौडगढ की सीमा पर स्थित पुरातात्विक एवं प्राकृतिक सौन्दर्य स्थल मेनाल में 12 वीं शताब्दी के चौहानकला के लाल पत्थरों से निर्मित महानालेश्वर मंदिर, रूठी रानी का महल, हजारेश्वर मंदिर देखने योग्य हैं। सैकडों फीट ऊंचाई से गिरता मेनाली नदी का जल प्रपात भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केन्द्र हैं।
[संपादित करें] जहाजपुर
भीलवाडा का प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल, जिसका इतिहास बडा रंगबिरंगा रहा हैं। कर्नल जेम्स टॉड 1820 में उदयपुर जाते समय यहाँ आये थे। यहाँ का बडा देवरा (पुराने मंदिरों का समूह), पुराना किला और गैबीपीर के नाम से प्रसिद्ध मस्जिद दर्शनीय हैं।
[संपादित करें] बिजोलिया
माण्डलगढ से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित बिजौलिया में प्रसिद्ध मंदाकिनी मंदिर एवं बावडियाँ स्थित हैं। ये मंदिर 12 वीं शताब्दी के बने हुए हैं। लाल पत्थरों से बने ये मंदिर पुरातात्विक व ऐतिहासिक महत्व के स्थल इतिहास प्रसिद्ध किसान आन्दोलन के लिए भी बिजौलियाँ प्रसिद्ध रहा हैं।
[संपादित करें] शाहपुरा
भीलवाडा तहसील मुख्यालय से 50 किलोमीटर पूर्व में शाहपुरा राज्य की राजधानी था। यहाँ रेल्वे स्टेशन नहीं ह परन्तु यह सडक मार्ग द्वारा जिला मुख्यालय से जुडा हुआ हैं। यह स्थान रामस्नेही सम्प्रदाय के श्रद्धालुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। मुख्य मंदिर रामद्वारा के नाम से जाना जाता हैं। यहॉ पूरे भारत से और बर्मा तक तक से तीर्थ यात्री आते हैं। यहॉ लोक देवताओं की फड पेंटिंग्स भी बनाई जाती हैं। यहॉ प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी केसरसिंह बारहठ की हवेली एक स्मारक के रूप में विद्यमान हैं। यहॉ होली के दूसरे दिन प्रसिद्ध फूलडोल मेला लगता हैं, जो लोगों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र होता हैं। यहॉं के ढाई इंची गुलाब जामुन मिठाई बहुत प्रसिद्ध है।
[संपादित करें] माण्डलैक्ष्द्फ्ग्ल्क्ज्द्स्घ्म्म्ल्;क्ज्स्द्घ्ज्च्व्ब्क्;क्
भीलवाडा से 14 किलोमीटर दूर स्थित माण्डल कस्बे में प्राचीन स्तम्भ मिंदारा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यहाँ से कुछ ही दूर मेजा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ कछवाह की बतीस खम्भों की विशाल छतरी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का स्थल हैं। छह मिलोकमीटर दूर भीलवाडा का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मेजा बांध हैं। होली के तेरह दिन पश्चात रंग तेरस पर आयोजित नाहर नृत्य लोगों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र होता हैं। कहते हैं कि शाहजहाँ के शासनकाल से ही यहाँ यह नृत्य होता चला आ रहा हैं। यहां के तालाब के पाल पर प्राचीन शिव मंदिर स्थित है। जिसे भूतेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।
[संपादित करें] माण्डलगढ
भीलवाडा से 51 किलोमीटर दूर माण्डलगढ नामक अति प्राचीन विशाल दुर्ग ह। त्रिभुजाकार पठार पर स्थित यह दुर्ग राजस्थान के प्राचीनतम दुर्गों में से एक हैं। यह दुर्ग बारी-बारी से मुगलों व राजपूतों के आधिपत्य में रहा हैं।
[संपादित करें] अन्य स्थल
भीलवाडा-उदयपुर मार्ग पर 45 मिलोमीटर दूर गगापुर में गंगाबाई की प्रसिद्ध छतरी पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस छतरी का निर्माण सिंधिया महारानी गंगाबाई की याद में महादजी सिंधिया ने करवाया थ
भीलवाड से 55 किलोमीटर दूर खारी नदी के बायें किनारे पर स्थित भीलवाडा का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल। राजस्थान के लोक देवता देवनारायण जी का यह तीर्थ स्थल ह और इनका यहॉ एक भव्य मंदिर स्थित हैं। इसे इसके निर्माता भोजराव के नाम पर सवाईभोज कहते हैं। RAJAJI KA KARERA One of other important place in Bhilwara district. This is Karera (Rajaji Ka Karera). Karera located with bhilwara about 60 KM in west side of bhilwara. Karera conected with major town with road rout. It's place also famous for the tample of KALAJI near kalaji (karera) & also the Sarkar selani Baba. In the baget of rajasthan in year 2012-2013 Mr. Ashoke ji Gahalot announced that Karera are now the 13th Tehsil in Bhilwara District.
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- सीएस हब भी कहलाएगा भीलवाड़ा (दैनिक भास्कर)