आग्नेय शैल

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ग्रेनाइट (एक आग्नेय चट्टान) चेन्नई मे, भारत.

आग्नेय शब्द लैटिन शाषा के शब्द 'इग्नीस' से बना हैं, जिसका अर्थ आग होता हैं । आग्नेय शैल की रचना धरातल के नीचे स्थित तप्त एवं तरल मैग्मा के शीतलन के परिणामस्वरुप उनके ठोस हो जाने पर होती हैं । पृथ्वी की उत्पत्ति के पश्चात सर्वप्रथम इनका निर्माण होने के कारण इन्हें ' प्राथमिक शैल ' भी कहा जाता है | रूपांतरित तथा अवसादी चट्टानें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनसे ही सम्बंधित होती है |ज्वालामुखी उदगार के समय भूगर्भ से निकालने वाला लावा भी धरातल पर जमकर ठंडा हो जाने के पश्चात आग्नेय शैलो में परिवर्तित हो जाता है | ये कठोर चट्टाने है जो रवेदार तथा दानेदार भी होती है | इन चट्टानों में परतो का पूर्णत: अभाव पाया जाता है | अप्रवेश्यता अधिक होने के कारण इन पर रासायनिक अपक्षय का बहुत कम प्रभाव पड़ता है , लेकिन यांत्रिक एवं भौतिक अपक्षय के कारण इनका विघटन व वियोजन प्रारम्भ हो जाता है |इन चट्टानों में जीवाश्म नहीं पाए जाते | इनका अधिक विस्तार ज्वालामुखी क्षेत्रो में ही हिता है | ग्रेनाइट , बेसाल्ट , गैब्रो , ऑब्सीडियन , डायोराईट , डोलोराईट , एन्डेसाईट , पेरिड़ोटाईट, फेलसाईट, पिचस्टोन ,प्युमिस व परलाईट इत्यादि आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण है |

अनुक्रम

भूवैज्ञानिक महत्व [संपादित करें]

पृथ्वी की पपड़ी के ऊपरी 16 किलोमीटर (10 मील) मे लगभग 95% आग्नेय चट्टानों है|

वर्गीकरण [संपादित करें]

आग्नेय चट्टानों घटना, बनावट, खनिज, रासायनिक संरचना, और आग्नेय शरीर की ज्यामिति की विधा के अनुसार वर्गीकृत की जाती है|

आग्नेय शैल के रुप [संपादित करें]

  • बैथोलिथ
  • लैकोलिथ
  • फैकोलिथ
  • लोपोलिथ
  • सिल
  • डाइक

आग्नेय शैल के प्रकार [संपादित करें]

  • १। आन्तरिक आग्नेय शैल:- ग्रेनाइत। दुनाइत
  • २।वाह्य आग्नेय शैल :- बैसाल्त