आग्नेय चट्टान

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आग्नेय चट्टान(अंग्रेज़ी: Igneous rock) की रचना धरातल के निचे स्थित तप्त एवं तरल मैग्मा के शीतलन के परिणामस्वरूप उसके ठोस हो जाने पर होती है। पृथ्वी की उत्पत्ति के पश्चात सर्वप्रथम इनका निर्माण होने के कारण इन्हें 'प्राथमिक शैल' भी कहा जाता है। रूपांतरित तथा अवसादी चट्टानें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनसे ही सम्बंधित होती है। ज्वालामुखी उदगार के समय भूगर्भ से निकालने वाला लावा भी धरातल पर जमकर ठंडा हो जाने के पश्चात आग्नेय शैलो में परिवर्तित हो जाता है। ये कठोर चट्टाने है जो रवेदार तथा दानेदार भी होती है। इन चट्टानों में परतो का पूर्णतः अभाव पाया जाता है। अप्रवेश्यता अधिक होने के कारण इन पर रासायनिक अपक्षय का बहुत कम प्रभाव पड़ता है, लेकिन यांत्रिक एवं भौतिक अपक्षय के कारण इनका विघटन व वियोजन प्रारम्भ हो जाता है। इन चट्टानों में जीवाश्म नहीं पाए जाते। इनका अधिक विस्तार ज्वालामुखी क्षेत्रो में ही हिता है। ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रो, ऑब्सीडियन, डायोराईट, डोलोराईट, एन्डेसाईट, पेरिड़ोटाईट, फेलसाईट, पिचस्टोन, प्युमिस व परलाईट इत्यादि आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण है।