अश्वशाव तारामंडल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
अश्वशाव (इक्वूलियस) तारामंडल

अश्वशाव या इक्वूलियस एक छोटा-सा तारामंडल है जो अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा जारी की गई ८८ तारामंडलों की सूची में शामिल है। त्रिशंकु तारामंडल के बाद यह इस सूची का दूसरा सब से छोटा तारामंडल है। दूसरी शताब्दी ईसवी में टॉलमी ने जिन ४८ तारामंडलों की सूची बनाई थी यह उनमें भी शामिल था। इसके सभी तारे काफ़ी धुंधले हैं और उनमें से कोई भी +३.९ मैग्नीट्यूड (चमक या सापेक्ष कान्तिमान) से अधिक रोशन नहीं है। ध्यान रहे कि मैग्नीट्यूड एक विपरीत माप होता है: यह जितना अधिक हो तारे की चमक उतनी ही कम होती है।

अन्य भाषाओँ में[संपादित करें]

अश्वशाव तारामंडल को अंग्रेज़ी में "इक्वूलियस कॉन्स्टॅलेशन" (Equuleus constellation) कहा जाता है। यूनानी भाषा में "इक्वूलियस" एक छोटे घोड़े को या घोड़े के बच्चे को कहते हैं। अश्वशाव का संस्कृत में अर्थ भी "घोड़े का बच्चा" है। वास्तव में यूनानी और संस्कृत दोनों हिंद-यूरोपीय भाषाएँ हैं और "एक्वस" और "अश्व" सजातीय शब्द हैं, जिस से यह थोड़े मिलते-जुलते भी हैं।

तारे और अन्य वस्तुएँ[संपादित करें]

अश्वशाव तारामंडल में ३ मुख्य तारे हैं, हालांकि वैसे इसमें १० तारों को बायर नाम दिए जा चुके हैं। इनमें से एक के इर्द-गिर्द ग़ैर-सौरीय ग्रह परिक्रमा करता हुआ पाया गया है। इस तारामंडल के मुख्य तारे और अन्य वास्तुएँ इस प्रकार हैं -[1]

  • अल्फ़ा इक्वूलिआइ (α Equulei) - यह एक G0 III श्रेणी का +३.९२ मैग्नीट्यूड (चमक) वाला तारा है जो पृथ्वी से लगभग १८६ प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। ग़ौर से देखने पर ज्ञात हुआ है कि इसका एक साथी तारा भी है जिसके साथ यह एक द्वितारा मंडल में बंधा हुआ है। इसे किटैल्फ़ा (Kitalpha) भी कहा जाता है।
  • गामा इक्वूलिआइ (γ Equulei) - यह एक दोहरा तारा है जिसका मुख्य तारा +४.७ मैग्नीट्यूड और साथी तारा +११.६ मैग्नीट्यूड रखता है। इसका मुख्य तारा एक परिवर्ती तारा भी है जिसकी चमक में समय के साथ हल्का बदलाव आता रहता है।
  • डॅल्टा इक्वूलिआइ (δ Equulei) - यह एक द्वितारा है जिसके दो तारे एक-दूसरे की इर्द-गिर्द हर ५.७ सालों में एक परिक्रमा पूरी कर लेते हैं। यह किसी द्वितारा मंडल के लिए बहुत ही कम कक्षीय काल (ऑर्बिटल पीरियड) है।
  • ऍप्सिलन इक्वूलिआइ (ε Equulei) - इस तारे को दूरबीन से देखने पर ४ तारे ज्ञात होते हैं।

इस तारामंडल के क्षेत्र में कुछ आकाशगंगाएँ भी दिखाई देती हैं लेकिन वे सब काफ़ी धुंधली हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Ian Ridpath and Wil Tirion (2007). Stars and Planets Guide, Collins, London. ISBN 978-0007251209. Princeton University Press, Princeton. ISBN 978-0691135564.