हिन्दी प्रदीप

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हिंदी प्रदीप पत्रिका हिंदी की एक मासिक पत्रिका थी। जिसका प्रथम अंक 1877 ई. में प्रकाशित हुआ। यह पत्रिका प्रयाग से निकलती थी। जिसका संपादन बालकृष्ण भट्ट के द्वारा किया जाता था। हिन्दी प्रदीप, हिन्दी का प्रसिद्ध समाचार पत्र था। इसके सम्पादक बालकृष्ण भट्ट थे। हिंदी प्रदीप में नाटक, उपन्यास, समाचार और निबंध सभी छपते थे।

हिंदी प्रदीप के मुखपृष्ठ पर लिखा था-

शुभ सरस देश सनेह पूरित, प्रगट होए आनंद भरै
बलि दुसह दुर्जन वायु सो मनिदीप समथिर नहिं टरै।
सूझै विवेक विचार उन्नति कुमति सब या मे जरै,
हिंदी प्रदीप प्रकाश मूरख तादि भारत तम हरै॥

प्रदीप से कई लेखकों का अभ्युदय हुआ। इनमें राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, आगम शरण, पंडित माधव शुक्ल, मदन मोहन शुक्ल, परसन और श्रीधर पाठक आदि थे। इनके अतिरिक्त बाबू रतन चंद्र, सावित्री देवी, महावीर प्रसाद द्विवेदी, जगदंबा प्रसाद उनके प्रभाव में थे। पुरुषोत्तम दास टंडन की प्रदीप में 12 रचनाएं प्रकाशित हुई। जो उन्होंने 1899 से लेकर 1905 के बीच लिखी थी।

हिंदी प्रदीप में बहुत ही खरी बातें प्रकाशित होती थी। 1909 अप्रैल के चौथे अंक में माधव शुक्ल ने 'बम क्या है' नामक कविता लिखी जो अंग्रेज सरकार को नागवार लगी और उन्होंने पत्रिका पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। उस समय भट्ट जी के पास भोजन तक के पैसे नहीं थे, जमानत कहां से भरते। विवश होकर उन्हें पत्रिका बंद करनी पड़ी। [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]