स्वप्नदोष

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अपने नाम के विपरीत स्वप्नदोष (Nocturnal emission) कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है। यह 6 महिने में अगर 1 या 2 बार ही हो तो सामान्य बात कही जा सकती है।और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नहीं है किन्तु यदि यह इससे ज्यादा बार होता है तो वीर्य की या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है। क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है। अतः अत्यधिक शुक्र क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता हैं।

स्वप्नदोष, किशोरावस्था और शुरुआती वयस्क वर्षों में के दौरान होने वाली एक सामान्य घटना है, लेकिन यह उत्सर्जन यौवन के बाद किसी भी समय हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक पुरुष स्वप्नदोष को अनुभव करे, जहां अधिकांश पुरुष इसे अनुभव करते हैं वहीं कुछ पूर्ण रूप से स्वस्थ और सामान्य पुरुष भी इसका अनुभव नहीं करते। स्वप्नदोष के दौरान पुरुषों को कामोद्दीपक सपने आ सकते हैं या यह स्तंभन के बिना भी हो सकता है। स्वप्नदोष अधिकतर उन लोगों को होती है जिसने अपने किशोरावस्था के हस्तमैथून क्या हो एक बात और यहां की अधिकतर अगर स्वप्नदोष हो तो इसका उपाय जरूर करे क्योंकि अति किसी भी चीज की बुरी होती है और इससे निश्चित रूप से कमजोरी आती है और आपके सारिरिक मानसिक विकास पर गहरा आघात पहुंचाने के लिए काफी है देखा जाए तो इसकी पूर्ति जब तक शरीर करता है तब तक में में अधिकांश को फिर हो जाता है तो स्वप्नदोष अच्छी चीज नहीं है हा अगर आपको कमजोरी नहीं आती तो फिर घबराने कि जरूरत नहीं है

स्वप्नदोष होने से मन तो हल्का हो जाता है लेकिन खुछ देर बाद कमजोरी का ऐहसास होने लगते लेकिन जरूरी नहीं की इसका स्वप्नदोष से ही हो कोई और भी कारण हो सकते है ये आपको जांच कराना पड़ेगा अगर कमजोरी आती है तो.

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