स्वतंत्रता दिवस (बांग्लादेश)

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स्वतंत्र बांग्लादेश का ध्वज
जातीय स्मृति शौद्ध : बांग्लादेश के स्वतन्त्रता-सेनानियों का स्मारक

बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस (बांग्ला: স্বাধীনতা দিবস शाधिनता दिबोश), 26 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन बांग्लादेश में राष्ट्रीय अवकाश होता है। इस अवसर पर बांग्लादेश में स्वतंत्रता दिवस परेड, राजनीतिक भाषणों, मेलों, संगीत समारोह के साथ बांग्लादेश की परंपराओं पर आधारित उत्सव मनाया जाता है। टीवी और रेडियो स्टेशनों में विशेष कार्यक्रमों और देशभक्ति के गीतों का प्रसारण किया जाता है। आम तौर पर इस दिन सुबह में आयोजित समारोह के दौरान एकतीस तोपों की सलामी दी जाती है। मुख्य सड़कों को राष्ट्रीय ध्वज से सजाया जाता है। विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों के द्वारा एक उचित तरीके से स्वतन्त्रता दिवस समारोह ढाका के आसपास तथा राष्ट्रीय स्मारकों पर आयोजित किया जाता है।[1]

बंगबंधु के नाम से विख्यात शेख मुजीबुर्रहमान[2] के द्वारा 25 मार्च 1971 की आधी रात के बाद पाकिस्तान से अपने देश की आजादी की घोषणा की गई, उसके बाद उन्हें पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। 26 मार्च 1971 को बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा के साथ ही मुक्ति युद्ध की शुरुआत हो गई थी। अंत में जीत 16 दिसम्बर को एक ही वर्ष में हासिल किया गया था, जो विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।[3] शेख मुजीबुर्रहमान[4] ने पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संग्राम की अगुवाई करते हुए बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई। वे बांग्लादेश के प्रथम राष्ट्रपति बने और बाद में प्रधानमंत्री भी बने।[5]

इतिहास[संपादित करें]

26 मार्च 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की है और मुक्ति युद्ध शुरू कर दिया गया था। ईस्ट बंगाल के लोगों के सभी वर्गों के मुक्ति के लिए पाकिस्तानी सेना के शासकों के निरंतर उत्पीड़न से बचाने के बांग्लादेश युद्ध में भारत ने साथ दिया। स्वतंत्रता हेतु युद्ध के नौ महीने में मानव जीवन के मामले में पाकिस्तानी सेना को 3 मिलियन की हानि इस गृहयुद्ध के दौरान हुई थी।[6] अंत में जीत 16 दिसम्बर को एक ही वर्ष में हासिल किया गया था, जो विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।[7][8]

बांग्लादेश के जनक[संपादित करें]

बांग्लादेश के संस्थापक होने के नाते शेख मुजीबुर्रहमान को बंगलादेश का जनक कहा जाता है। वे अवामी लीग के अध्यक्ष थे। पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संग्राम की अगुवाई करते हुए बांग्लादेश को मुक्ति दिलाई। वे बांग्लादेश के प्रथम राष्ट्रपति बने और बाद में प्रधानमंत्री भी बने। वे 'शेख मुजीब' के नाम से भी प्रसिद्ध थे। उन्हें 'बंगबन्धु' की पदवी से सम्मानित किया गया था, किन्तु १५ अगस्त १९७५ को सैनिक तख्तापलट के द्वारा उनकी हत्या कर दी गयी।[9][10][11]

स्वतंत्रता पुरस्कार[संपादित करें]

स्वतंत्रता पुरस्कार बांग्लादेश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। यह बांग्लादेश के स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या में आयोजित एक समारोह में बांग्लादेश की सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। यह वार्षिक पुरस्कार, 1977 में शुरू किया गया था, जो प्रतिवर्ष मुक्ति युद्ध, भाषा आंदोलन, शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, सार्वजनिक सेवा, विज्ञान प्रौद्योगिकी, चिकित्सा विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संगीत, खेल और खेल, ललित कला, ग्रामीण, विकास और कुछ अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान हेतु दिया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Bangladesh profile in बीबीसी न्यूज़
  2. Sheikh Mujibur Rahman — the father and the founder of Bangladesh
  3. "तेरह दिन का युद्ध और एक नए राष्ट्र का जन्म". http://www.bbc.com/hindi/india-42376811. 
  4. Mujib on Reference/Encyclopedia
  5. "Independence Day of Bangladesh-26 मार्च 1971 | Best Travel Site". Xplore4life.com. http://xplore4life.com/independence-day-of-bangladesh-26th-march-1971/1. अभिगमन तिथि: 20114-3-27. 
  6. "Independence Day of Bangladesh-26 मार्च 1971 | Best Travel Site". Xplore4life.com. http://xplore4life.com/independence-day-of-bangladesh-26th-march-1971/1. अभिगमन तिथि: 2014-3-27. 
  7. "Independence Day of Bangladesh-26 मार्च 1971 | Best Travel Site". Xplore4life.com. http://xplore4life.com/independence-day-of-bangladesh-26th-march-1971/1. अभिगमन तिथि: 2014-3-27. 
  8. Bangladesh Liberation War. Mujibnagar. Government Documents 1971
  9. ऐसे हुई बंगबंधु की हत्या (प्रभात खबर)
  10. बांग्लादेश के संस्थापक मुजीब हत्याकांड में 12 को मृत्युदण्ड
  11. मुजीबुर रहमान हत्याकांड मामलाः सुनवाई प्रक्रिया के महत्वपूर्ण घटनाक्रम

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]