स्थायी बन्दोबस्त

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

वारेन हेस्टिंग्ज द्वारा बंगाल में स्थापित कर संग्रहण की ठेकेदारी व्यवस्था से किसानों की स्थिति सोचनीय हो गयी थी। इस स्थिति में सुधार के लिए कंपनी सरकार ने लार्ड कार्नवालिस को स्थायी सुधार के लिए नियुक्त किया।स्थायी बंदोबस्त अथवा इस्तमरारी बंदोबस्त ईस्ट इण्डिया कंपनी और बंगाल के जमींदारों के बीच कर वसूलने से सम्बंधित एक एक सथाई व्यवस्था हेतु सहमति समझौता था जिसे बंगाल में लार्ड कार्नवालिस[1] द्वारा 22 मार्च, 1793 को लागू किया गया। इसके द्वारा तत्कालीन बंगाल और बिहार में भूमि कर वसूलने की जमींदारी प्रथा को आधीकारिक तरीका चुना गया। बाद में यह कुछ विनियामकों द्वारा पूरे उत्तर भारत में लागू किया गया।[1]

इस बंदोबस्त के अन्य दूरगामी परिणाम भी हुए और इन्ही के द्वारा भारत में पहली बार आधिकारिक सेवाओं को तीन स्पष्ट भागों में विभक्त किया गया और राजस्व, न्याय और वाणिज्यिक सेवाओं को अलग-अलग किया गया।

जमींदारी व्यवस्था अंग्रेजो की देन थी इसमें कई आर्थिक उद्देश्य निहित थे इस पद्दति को जांगीरदारी, मालगुजारी, बिसवेदारी, इत्यादि भिन्न भिन्न नामों से भी जाना जाता था

पृष्ठभूमि

इससे पहले बंगाल, बिहार और ओडिशा के ज़मीनदारों ने बंगाल में मुगल सम्राट और उनके प्रतिनिधि दीवाण की तरफ से राजस्व एकत्र करने का अधिकार ग्रहण किया था। दीवान ने यह सुनिश्चित करने के लिए ज़मीनदारों की देखरेख की कि वे न तो ढीला और न ही कड़े कड़े थे। जब ईस्ट इंडिया कंपनी को 1764 में बक्सर की लड़ाई के बाद साम्राज्य द्वारा दिवाणी या बंगाल की अधिपति से सम्मानित किया गया था, तो यह खुद को प्रशिक्षित प्रशासकों की कमी पाया, विशेष रूप से स्थानीय प्रथा और कानून से परिचित लोगों को। नतीजतन, भूमिधारकों को भ्रष्ट और आलोक अधिकारियों के बारे में बताया गया इसका नतीजा यह था कि भविष्य की आय या स्थानीय कल्याण के लिए बिना कमाई निकाली गई। Isme jsmindaro ko rajasv ki rasi ka 89 Percent company ko Dena pasta tha

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Cornwallis Code". Encyclopedia Britannica. 4 February 2009. अभिगमन तिथि 24 February 2017.