सी++

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सी++
C plus plus.svg
रूपावाली बहु - प्रतिमान, प्रक्रियात्मक, कार्यात्मक, वस्तु उन्मुख, सामान्य
प्रस्तुति वर्ष 1983
रूपकार जार्न स्तार्स्तप
विकासक
प्रमुख कार्यान्वयन सी++ बिल्डर, क्लैंग, कॉमु C/C++, जीसीसी, इंटेल C++ कम्पाइलर, माइक्रोसॉफ्ट विज़ुअल C++, सन स्टूडियो
उपभाषाएँ एम्बेडेड सी++, मैनेज्ड सी++, सी++/सीएलआई, सी++/सीएक्स
प्रभावित किया पर्ल, एलपीसी, लुआ, पाइक , एडा 95 , जावा, पीएचपी, डी, सी99, सी#,</ref> फ़ैलकन, सीड7
प्रचालन तन्त्र मल्टी प्लेटफार्म

सी++ (C++ ; उच्चारण: सी प्लस-प्लस) एक स्थैतिक टाइप, स्वतंत्र-प्रपत्र, बहु-प्रतिमान संकलित, सामान्य प्रयोजन प्रोग्रामिंग भाषा है। यह एक मध्यस्तरीय भाषा के रूप में जानी जाती है, क्योंकि यह दोनों उच्च स्तर और निम्न स्तर की भाषा सुविधाओं का एक संयोजन है। यह जार्न स्तार्स्तप द्वारा विकसित सी भाषा की वृद्धि के रूप में बेल लेबोरेटरीज में 1979 में शुरू किया गया था। इस भाषा का मूल नाम सी विथ क्लासेस था, जिसे १९८३ में बदल कर सी++ कर दिया गया। यह एक आब्जेक्ट उन्मुखी (ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड) भाषा है।

सी++ के डिजाइन का दर्शन[संपादित करें]

जार्न स्तार्स्तप ने "द डिजाईन एंड एवोल्युशन ऑफ़ सी++" (1994) में सी++ के बारे में कुछ बातें कहीं, वे इस प्रकार हैं :

  • सी++ स्थैतिक टंकित (स्टैटिकली टाइप्ड), सामान्य-उपयोग वाली (जनरल परपज) एवं सी भाषा के समान ही दक्ष एवं पोर्टेबल प्रोग्रामिंग भाषा है।
  • सी++ कई तरह के प्रोग्रामिंग शैलियों का समर्थन करने के हिसाब से रची गयी है। इसमें प्रोसीजरल प्रोग्रामिंग, वस्तु-केन्द्रित प्रोग्रामिंग (ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग), मॉड्युलर प्रोग्रामिंग, अथवा जेनेरिक प्रोग्रामिंग शैली में से किसी भी शैली को अपनाकर प्रोग्राम किया जा सकता है।
  • इस बात का ध्यान रखा गया है कि सी++ का सी के साथ अधिक से अधिक सामन्जस्य बना रहे। इस प्रकार सी में लिखे प्रोग्राम अधिकाशतः बिना किसी परिवर्तन के सी++ में चल सकते हैं। इससे 'सी' के जानकारों को सी++ में प्रवेश करने में कोई असुविधा नहीं होती है।
  • सी++ उन फीचर के कारण कोई अतिरिक्त भार नहीं डालती जो प्रोग्राम में अप्रयुक्त हैं।

उपरोक्त बातों के अतिरिक्त सी++ की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

  • ऑब्जेक्ट-ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंग
  • Inheritance
  • Classes
  • Polymorphism
  • Data encapsulation and abstraction
  • पोर्टेबिलिटी
  • संक्षिप्तता (Brevity) - सी++ में लिखा कोड अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत छोटा होता है।
  • मॉड्युलर प्रोग्रामिंग- सी++ के किसी अप्लिकेशन के अन्दर अनेकों छोटे-छोटे प्रोग्राम हो सकते हैं जिनके सोर्स कोड को अलग से कम्पाइल करके
    परस्पर लिंक कर दिया जाता है। इससे समय की बचत होती है। इसके अलावा, मूलतः किसी दूसरी भाषा में लिखे प्रोग्राम को
    कम्पाइल करके सी++ में सम्मिलित किया जा सकता है।
  • सी-भाषा के साथ कम्पेटिबिलिटी
  • तेज गति
  • सूचना पासिंग (Message Passing)
  • गतिक बाइण्डिंग (Dynamic Binding)

सी++ प्रोग्राम का एक उदाहरण[संपादित करें]

#include <iostream>

using namespace std;

int main()
{
   cout << "जय हिन्द -- Hallo Bharat" << endl;
   cin.get();
}

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]