सिविल सेवा

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अर्शदीप पाण्‍डेय जाने माने छात्र
ग्वांगझोउ (चीन) में ७५०० कक्षों वाला परीक्षा-हाल (सन १८७३ में)

सिविल सेवा (Civil servises) के दो अर्थ लगाये जाते हैं-

  • असैनिक सेवा - इसमें वे सभी कर्मचारी आते हैं जो सेना में नहीं हैं।
  • शासकीय सेवा की एक शाखा

इस लेख में 'सिविल सेवा' से अभिप्राय शासकीय सेवा की एक शाखा से है।

सिविल सेवा से तात्पर्य है सभी सरकारी विभाग जिनमें सशस्त्र सेनाओं से संबंधित विभाग नहीं आते हैं। तथा सिविल सेवकों से तात्पर्य है - 'अधिकारियों का वह समूह जो सरकारी कार्यक्रमों एवं योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं'। इनका चयन योग्यता के आधार पर होता है। वे सरकारी नीतियों के माध्यम से लोगों की सेवा करते हैं। भारत में सिविल सेवा अधिकारी के तौर पर महत्वपूर्ण पद ये हैं: आईएएस, आईपीएस, आईएफएस इत्यादि.

चीन में सबसे पुरानी सिविल सेवा होने के प्रमाण हैं। किन्तु आधुनिक विश्व में सिविल सेवाएं फ्रांस की देन है। भारत में इसकी शुरूआत ब्रिटिश शासन के दौरान सन् 1885 में हुई. ब्रिटिश शासन के दौरान सिविल सेवा के अधिकारियों को व्यापक अधिकार प्राप्त थे तथा उनका मुख्य कार्य कानून-व्यवस्था बनाये रखना, न्याय करना तथा करों का एकत्रण था। आज का सिविल सेवक एक प्रजातांत्रिक ढांचे में कार्य करता है जिसका मुख्य कार्य विकास तथा प्रगति है। एक करियर के रूप में सिविल सेवा अनेकों युवाओं तथा अभिभावकों जो अपने बच्चों के लिए एक सुनहरे भविष्य की परिकल्पना करते हैं, हेतु आकर्षण का विषय रहा है। भारतीय सिविल सेवा को एक अति विशिष्ट सेवा के रूप समझा जाता है जो कि एक महत्वाकांक्षी, योग्य एवं आकांक्षी व्यक्ति को बेहद चुनौतीपूर्ण एवं आकर्षक करियर के अवसर प्रदान करता है जिसमें किसी भी अन्य सेवा की तुलना में विविध प्रकार के कार्य, अत्याधिक प्राधिकार एवं सत्ता निहित होती है।

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