सिविल सेवा परीक्षा

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सिविल सेवा परीक्षा भारत की एक प्रतियोगी परीक्षा है जिसके परिणाम के आधार पर भारत सरकार एवं राज्य सरकार की सिविल सेवाओं के अधिकारी (जैसे जिलाधिकारी) चुने जाते हैं।

इस परीक्षा में तीन स्तर होते हैं। प्रारंभिक परीक्षा , मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होते हैं उनमें से पेपर १ में मिले हुए गुणों के आधार पर मुख्य परीक्षा में चुना जाता हैं और जो दूसरा पेपर होता हैं उनमेपास होने के लिए ३३% गुण अनिवार्य हैं। वर्ना मुख्य परीक्षा में जा नहीं सकते। चाहे पेपर १ में आपको २०० गुण क्यों न हो ये बदलाव २०१५ से किया गया हैं। मुख्य परीक्षा में ९ प्रश्न पत्र होते हैं पहिला होता हैं एक भाषा का जिसमें आपको २२ भाषाओ में से एक को चुनकर उसका पेपर देना पड़ता हैं और दूसरा होता हैं इंग्लिश का इन दोनों पेपर्स के गुण आगे गिने नहीं जायेंगे किन्तु इसमें पर्याप्त गुण लाने जरुरी हैं वरना आपके आगे के सभी पेपर्स चेक किये नहीं जायेंगे. इस मुख्य परीक्षा में ३ रा पेपर निबंध का होता हैं , ४ था , ५ वा , ६ वा , ७ वा ऐसें ५ पेपर्स सभी के लिए अनिवार्य होते हैं और ८ वा और ९ वा पेपर ये वैकल्पिक विषयोंके पेपर होते हैं। मतलब वैकल्पिक विषय एक ही होता हैं लेकिन उसके २ पेपर्स होते हैं। बाद में मुख्य परीक्षा में से कुछ बच्चे पास होते हैं तकरीबन जीतने बच्चो को चुनना हैं उसके ३ गुना बच्चों का मुलाकात होती हैं और उनमे से पर्याप्त बच्चो को चुनकर विविध पदों के लिए उनके गुणों के और उनके दिए गए सन्दर्भों के आधार पर उनका चयन होता हैं।

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