सिद्धान्तदर्पण

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सिद्धान्तदर्पण की मूल पाण्डुलिपि

सिद्धान्तदर्पण भारत के महान ज्योतिषी चंद्रशेखरसिंह सामंत द्वारा रचित ज्योतिष ग्रंथ है। यह संस्कृत में है और काव्य रूप में रचित है। श्री सामन्त का सम्पूर्ण शोध इस महान ग्रंथ में अंकित है। यह अपने पूर्ववर्ती ग्रंथों सूर्यसिद्धान्त तथा सिद्धान्तशिरोमणि का विकसित रूप है।

यह ग्रंथ सन् १८९९ में कोलकाता प्रेस से देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुआ। इस कार्य के लिये योगेश चंद्र राय तथा अठमलिक एवं मयूरभंज के राजाओं से आर्थिक सहायता मिली। प्रोफेसर योगेश चंद्र राय ने इस पुस्तक के लगभग 56 पृष्ठों का अंग्रेजी अनुवाद ने किया था जिसके कारण विश्व को इस ग्रन्थ में छिपी ज्ञान-सम्पदा का पता चला।

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