सित्तानवासन के गुफा चित्र

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भित्ति पर तीर्थंकरों की मूर्तियाँ

सित्तानवासल गुफाएँ (या, अरिवर कोइल) द्वितीय शताब्दी में निर्मित जैन गुफाएँ हैं। यह तमिलनाडु के पुद्दुकोट्टै जिले के सित्तानवासल गाँव में स्थित हैं। यहां के चित्र पल्लव वंश के शाशक राजा महेंद्र वर्मा(600-625 ई०) के द्वारा बनवाये गए। यहाँ की शैली अजंता के समान ही है, यह अजंता का विकसित रूप है। सित्तानवासल का अर्थ होता है "जैन सिद्धो का निवास"।इस गुफा की खोज फ्रांसीसी प्रोफेसर दुर्बील द्वारा 1934 में की गई थी। यहां एक बड़े बरामदे की छत पर कमल सरोवर का चित्र है जिसमें मछली, हाथी, भैंसे, तथा तीन दिव्य आकृतियां हैं।

चित्रकला-पल्लव कालीन चित्रकला के प्रमुख नमूने सित्तानवासन के जैन गुफा मंदिर की आंतरिक छतों एवं बाहरी दीवारों पर देखने को मिलती है।

सतन वासल गुफा कृष्णा नदी के तट पर सित्तनवासल में स्थित है