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सागरमल गोपा

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1986 में ज़ारी सागरमल गोपा जी का डाक टिकट

सागरमल गोपा (1900 - 1946) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी एवं देशभक्त थे। वे राजस्थान के निवासी थे। इनके पिता का नाम अखेराज गोपा था,जो जवाहर सिंह के दरबारी थे।[1]

सागरमल गोपा का जन्म जैसलमेर में 3 नवंबर 1900 को हुआ था । इन्होंने अपने क्रांतिकारी भाषणों और लेखों से जैसलमेर महाराजा जवाहर सिंह को नाराज कर दिया। इसलिए इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 4 अप्रैल 1946 के दिन थानेदार गुमानसिंह ने मिट्टी का तेल डालकर इन्हें जिंदा जला दिया। इनकी मृत्यु के बाद मृत्यु की जांच के लिए 'गोपाल स्वरूप पाठक आयोग' का गठन किया गया।

भारत सरकार ने 1986 में सागरमल गोपा पर डाक टिकट जारी किया गया ।

उन्होंने तीन पुस्तकें भी लिखी थीं-

(1) जैसलमेर का गुंडा राज (जैसलमेर के शासन की आलोचना )

(2) रघुनाथ सिंह का मुकदमा ( जनता को न्यायपालिका के प्रति सजग करने के लिए लिखी)

(3) आज़ादी के दीवाने (जेल में रहेते हुए लिखी)

  1. K. S. Saxena (1971). The Political Movements and Awakening in Rajasthan: 1857 to 1947. S. Chand.