सन्त सिंगाजी

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संत सिंगाजी
Singaji.jpg
संत कवि सिंगाजी की समाधि

सन्त सिंगाजी भारत में मध्य प्रदेश के नीमार के एक मशहूर संत थे।[1][2] उन्हे पशु रक्षक देव के रूप में पूजा जाता है।[3]

जीवन परिचय[संपादित करें]

सिंगाजी का जन्म ग्राम खजूरी जिला बड़वानी मध्यप्रदेश मे हुआ। [4] का नामकरण उन्ही के नाम पर किया गया है। सिंगाजी मध्य प्रदेश में खांडवा से 28 मील उत्तर पूर्व में हरसूद तहसील का एक छोटा गाँव है।[5] हरसूद का निर्माण हर्षवर्धन द्वारा किया गया था।[6] इसी गाँव में सिंगाजी एक सामान्य गोपाल या अहीर परिवार में जन्मे थे।[2] 16वीं शताब्दी में सिंगाजी की प्रतिभा से प्रेरित होकर गाँव के जमींदार ने उन्हें अपना सरदार नियुक्त कर दिया था। सिंगाजी ने बारह साल जमींदार की सेवा की तथा अपनी आध्यात्मिक करामाती शक्तियों से जमींदार के लिए कई लड़ाइयों में विजय भी प्राप्त की। कुछ स्रोतों के अनुसार उन्होने भामागढ़ के राजा के पत्रवाहक का कार्य भी किया था।[7] परंतु कालांतर में उन्होने सन्यास ले लिया व तपस्वी बन गए। 40 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गयी।[8]

व्यापक मान्यता[संपादित करें]

संत सिंगाजी को 16वीं[2] या 17वीं शताब्दी[9] के काल का माना जाता है। कहा जाता है कि सिंगाजी एक कवि व करामाती संत थे।[9] समूचे मध्य प्रदेश में अनेकों स्थानों पर सिंगाजी के डेरे[10] व समाधियाँ बनी हुयी हैं जहां पर मेलों का आयोजन भी किया जाता है।[2][11][12] कवि संत सिंगाजी के आध्यात्मिक गीत आज तक गए जाते हैं।[10]

संत सिंगाजी जलाशय परियोजना[संपादित करें]

संत सिंगाजी थर्मल पावर प्लांट, मुंडी

नर्मदा जलविद्युत विकास निगम द्वारा नर्मदा नदी परi विकसित की गयी नर्मदा सागर परियोजना में संत सिंगाजी जलाशय भी परियोजना का भाग है जी 913 वर्ग मीटर में फैला है। यह भारत का सबसे बड़ा व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है।[6] यहाँ पर सिंगाजी की पावन समाधि का भी निर्माण किया गया है।सिंगाजी परियोजना की अनुमानित लागत 5 करोड़ है।[13]

संदर्भ सूत्र[संपादित करें]

  1. Indian saints and sages, लेखक-Prof. Shrikant Prasoon, प्रकाशक-Pustak Mahal, 2009,ISBN 9788122310627
  2. Mohd. Ilyas Quddusi, Islamic Wonders Bureau (New Delhi, India) (2002). Khandesh under the Mughals, 1601-1724 A.D.: mainly based on Persian sources. Islamic Wonders Bureau. पृ॰ 119. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788187763215. अभिगमन तिथि 1 फरवरी 2016.
  3. Universität Wien. Institut für Völkerkunde (1951). Wiener Beiträge zur Kulturgeschichte und Linguistik, Volume 8. Verlag F. Berger & Söhne. पृ॰ 296.
  4. मध्य प्रदेश सम्पूर्ण अध्ययन [मध्य प्रदेश सम्पूर्ण अध्ययन]. उपकार प्रकाशन. पृ॰ 208. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788174827388. अभिगमन तिथि 2 अगस्त 2016.
  5. Central Provinces (India) (1908). Nimar. Printed at the Pioneer Press. पृ॰ 257.
  6. Cecilia Tortajada, Dogan Altinbilek, Asit K. Biswas. Impacts of Large Dams: A Global Assessment (अंग्रेज़ी में). Springer Science & Business Media. पृ॰ 371. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9783642235719. अभिगमन तिथि 1 फरवरी 2016.
  7. Candrakāntā (2007). Kathā satīsara [कथा सतिसर] (1. saṃskaraṇa. संस्करण). Naī Dillī: Rājakamala Peparabaiksa. पृ॰ 341. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788126713615. अभिगमन तिथि 2 अगस्त 2016.
  8. Fuchs, Stephen (1988). The Korkus of the Vindhya Hills (अंग्रेज़ी में). Inter-India Publications. पृ॰ 327. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788121002035.
  9. Sharma, Aruna (2011). The Heartland of Divinity: Fairs and Festivals of Madhya Pradesh. SCB Distributors. पृ॰ 67. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788183282222.
  10. Madhya Pradesh (India) (1996). Madhya Pradesh District Gazetteers: Rajgarh. Govt. Central Press. पृ॰ 341. अभिगमन तिथि 1 फरवरी 2016.
  11. Dr. Krishna Gopal, Phal S. Girota, Madan Prasad Bezbaruah (2003). Fairs and Festivals of India: Chhattisgarh, Dadra and Nagar Haveli, Daman and Diu, Goa, Gujarat, Madhya Pradesh, Maharashtra. Indiana University. पपृ॰ 471–475. अभिगमन तिथि 1 फरवरी 2016.
  12. Madhya Pradesh (India) (1993). Madhya Pradesh: Dewas. Government Central Press. पृ॰ 74.
  13. Cecilia Tortajada, Dogan Altinbilek, Asit K. Biswas. Impacts of Large Dams: A Global Assessment (अंग्रेज़ी में). Springer Science & Business Media. पृ॰ 373. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9783642235719. अभिगमन तिथि 1 फरवरी 2016.