सदस्य वार्ता:Rupali.talan

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-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 11:17, 1 जुलाई 2015 (UTC)

झूठा सच[संपादित करें]

चित्र:झूठा सच.jpg
'झूठा सच' किताब का पहला पन्ना।

लेकख का जीवन[संपादित करें]

यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर, 1903 ई. में फ़िरोजपुर छावनी में हुआ था। इनके पूर्वज कांगड़ा ज़िले के निवासी थे और इनके पिता हीरालाल को विरासत के रूप में दो-चार सौ गज़ तथा एक कच्चे मकान के अतिरिक्त और कुछ नहीं प्राप्त हुआ था। आरंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में पाई। यशपाल की प्रमुख कृतियाँ: देशद्रोही, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, झूठा सच तथा मेरी, तेरी, उसकी बात (सभी उपन्यास), ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजड़े की उड़ान, फूलो का कुर्ता, उत्तराधिकारी (सभी कहानी संग्रह) और सिंहावलोकन (आत्मकथा)। मेरी, तेरी, उसकी बात' पर यशपाल को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यशपाल की कहानियों में सर्वदा कथा रस मिलता है। वर्ग-संघर्ष, मनोविश्लेषण और तीखा व्यंग्य इनकी कहानियों की विशेषताएँ हैं।

सारांश[संपादित करें]

झूठा सचयशपाल जी के उपन्यासों में सर्वश्रेष्ठ है। उसकी गिनती हिन्दी के नये पुराने श्रेष्ठ उपन्यासों में होगी-यह निश्चित है। यह उपन्यास हमारे सामाजिक जीवन का एक विशद् चित्र उपस्थित करता है। इस उपन्यास में यथेष्ट करुणा है, भयानक और वीभत्स दृश्यों की कोई कमी नहीं। श्रंगार रस को यथासम्भव मूल कथा-वस्तु की सीमाओं में बाँध कर रखा गया है। हास्य और व्यंग्य ने कथा को रोचक बनाया है और उपन्यासकार के उद्देश्य को निखारा है। ‘झूठा सच’ के दोनों भागों—‘वतन और देश’ और ‘देश का भविष्य’ में देश के सामयिक और राजनैतिक वातावरण को यथा-सम्भव ऐतिहासिक यथार्थ के रूप में चित्रित करने का यत्न किया गया है। उपन्यास के वातावरण को ऐतिहासिक यथार्थ का रूप देने और विश्वसनीय बना सकने के लिये कुछ ऐतिहासिक व्यक्तियों के नाम ही आ गये हैं परन्तु उपन्यास में वे ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं, उपन्यास के पात्र हैं। झूठा सच की पृष्टभूमि भारत विभाजन तथा तज्जन्य लोमहर्षक घटनाएं एवं मानव की तत्कालीन स्थिति है. इसके प्रथम भाग वतन और देश में भारत विभाजन पूर्व से होने वाले सांप्रदायिक दंगों का मार्मिक चित्रण है. इसमें तीन पात्र प्रमुख हैं जयदेव पुरी, उसकी बहन तारा और प्रेमिका कनक. निर्धन मास्टर रामलुभाया आपने बड़े भाई रामज्वाला की पुत्री शीला का विवाह तय हो जाने पर आपनी पुत्री तारा के विवाह के लिए चिंतित हैं. तारा का विवाह उसके इच्छा के खिलाफ आवारा युवक सोमराज से तय हो जाता है. जेल की सजा भोग रहे जयदेव को जब इस बारे में पता चलता है तो वह इसका विरोध करता है. वह जेल से छूट कर आता है और तारा को बीए में दाखिला दिलवाने के लिए डा. प्राणनाथ से 100रुपये उधार लाता है. इसमें 1944-45 के आसपास की राजनीतिक स्थिति का आकलन है. तारा का सोमराज से विवाह हो जाता है. उसी समय मुसलमान धाबा बोल देते हैं . तारा पर अत्याचार किया जाता है. सोमराज को पकड़ लिया जाता है. इधर कनक को जयदेव पुरी से दूरी रखने के लिए उसे नैनीताल भेज दिया जाता है. जयदेव परिवार की खोज में लाहौर भागता है. दूसरे भाग देश का भविष्य में पुरी प्रेस का मालिक बन जाता है. कनक और पुरी का विवाह हो जाता है. इधर तारा की डा.प्राणनाथ से भेंट होती है. और अंत में दोनों का विवाह हो जाता है.

विभाजन बीसवीं सदी की सवाधिक महत्वपूर्ण घटना थी. इसपर विपुल मात्रा में लिखा गया. इस लेखनी की मुख्य विशेषता यह है कि यह ज्यादातर कथा साहित्य के रूप में सामने आया और स्वाभाविकत: इसके लेखक भी वही लोग थे जिन्होंने इस त्रासदी को देखा था. इन सभी में झूठा सच एक महत्वपूर्ण उपन्यास है. लाहौर की भोला पांधे गली में आर्य समाजी मास्टर रामलुभाया के परिवार से शुरू होकर यह उपन्यास जल्द ही समूचे लाहौर और पूरे पंजाब की नियति की कहानी बन जाती है. बंटवारे का ऐसा मार्मिक चित्रण शायद ही कहीं देखने को मिले. कथानक में कुछ ऐतिहासिक घटनायें अथवा प्रसंग अवश्य हैं परन्तु सम्पूर्ण कथानक कल्पना के आधार पर उपन्यास है, इतिहास नहीं है। उपन्यास के पात्र तारा, जयदेव, कनक, गिल, डाक्टर नाथ, नैयर, सूद जी, सोमराज, रावत, ईसाक, असद और प्रधान मंत्री भी काल्पनिक पात्र हैं। ‘झूठा सच’ के दोनों भागों—‘वतन और देश’ और ‘देश का भविष्य’ में देश के सामयिक और राजनैतिक वातावरण को यथा-सम्भव ऐतिहासिक यथार्थ के रूप में चित्रित करने का यत्न किया गया है। उपन्यास के वातावरण को ऐतिहासिक यथार्थ का रूप देने और विश्वसनीय बना सकने के लिये कुछ ऐतिहासिक व्यक्तियों के नाम ही आ गये हैं परन्तु उपन्यास में वे ऐतिहासिक व्यक्ति नहीं, उपन्यास के पात्र हैं। कथानक में कुछ ऐतिहासिक घटनायें अथवा प्रसंग अवश्य हैं परन्तु सम्पूर्ण कथानक कल्पना के आधार पर उपन्यास है, इतिहास नहीं है। उपन्यास के पात्र तारा, जयदेव, कनक, गिल, डाक्टर नाथ, नैयर, सूद जी, सोमराज, रावत, ईसाक, असद और प्रधान मंत्री भी काल्पनिक पात्र हैं।