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जय हनुमान मनका मंदिर[संपादित करें]

रोहतक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बलवान दहिया जी हिंदू अध्यात्म के रिसर्चर हैं। हनुमानजी पर गहरा अध्ययन किया है। उनकी रिसर्च है कि जब हनुमानजी संजीवनी लेकर लौट रहे थे तो उनकी गदा पर लगा एक मनका नीचे गिर गया था। हजारों साल बीत गये। नौवीं सदी में वो मनका एक गरीब कृपाराम को मिला। देखते-देखते कृपाराम की किस्मत बदल गयी।उसने चावल का काम शुरू किया और वो लखपति हो गया। तब उस रहस्यमयी मनके की महिमा समझ आयी। उसकी पत्नी भामादेवी ने मनके को मंदिर में स्थापना करने की सलाह दी। कृपाराम ने भव्य बजरंगी मंदिर बनवाकर मनका स्थापित कर दिया। मंदिर के आस-पास शहर बस गया। शहर इतना खुशहाल था कि सोने की ईंटों के फर्श लगे थे। शहर का नाम था नवोदय। फिर 11वीं शताब्दी में नवोदय नगरी के राजा अजेयनाथ और टीपू खान के बीच भयंकर जंग हुई। इससे पहले की टीपू नवोदय नगर को लूट पाता कुलदेवी महामाया ने शहर को पाताल में छुपा दिया। प्रोफेसर दहिया की रिसर्च और मशहूर पुरातत्व विशेषज्ञ कगिशो आर्चर की रिपोर्ट कहती है कि जहाँ सोने की नवोदय नगरी थी, वहाँ आज नोयडा शहर आबाद है। मनका जड़ित भव्य बजरंगी मंदिर की अग्जेक्ट लोकेशन सेक्टर 16 A फ़िल्म सिटी बतायी गयी है। शायद मंदिर भूतल से लगभग 3000 मीटर नीचे है। प्रोफेसर दहिया के दादाजी भलेराम दहिया भी एक बार नेहरू जी से मिले थे और बजरंगी मंदिर की खोज के लिये खुदाई की माँग की थी। लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया। आज फ़िल्म सिटी में बहुत सारे न्यूज़ स्टूडियो आबाद हैं और धरातल में कैद है एक चमत्कारी रहस्य जो भारत की किस्मत बदल सकता है। प्रोफेसर दहिया अब प्रधानमंत्री जी से उम्मीद कर रहे हैं जैसे वो नेहरू जी की अन्य गलतियों को सुधार रहे हैं, वैसे ही नवोदय नगरी के बजरंगी मंदिर की खोज करके एक और इतिहास ठीक कर देंगे। न्यूज़ स्टूडियो तो कहीं भी बस सकते हैं, लेकिन बजरंगी का निवास एक विशेष स्थल ही होता है। आज नहीं तो कल देश की जनता इसका जवाब जरूर मांगेगी। आस्था के ऊपर कुछ नहीं।