सदस्य वार्ता:Jyotish Math Sansthan

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-- नया सदस्य सन्देश (वार्ता) 19:02, 4 जुलाई 2017 (UTC) दुनिया जानती है कि पन्ना की पावन भूमि में हीरे मिलते हैं। बस फर्क इतना है कि कोई हीरा कंकड़ है तो कोई कला कौशल और ज्ञान से परिपूर्ण व्यक्ति। इन्हीं में से एक हैं प्रदेश के गौरव और देश के प्रख्यात ज्योतिषी पं. अयोध्या प्रसाद गौतम। सचमुच में आप पन्ना के ही असली हीरे हैं। जो प्राचीन ज्योतिष के ज्ञाता पंडित रामरूपजी गौतम के घर आँगन में माता श्रीमतीरामसखी गौतम जी की पवित्रकोख से जन्मे और ज्योतिष की ज्योति जलाकर समूचे मानव समाज को जागृत कर दिया। लगभग 80 वर्षीय वय के बावजूद भी सदेव स्वस्थ और तंडरुस्त दिखने वाले पंडित गौतम का ज्योतिषीय ज्ञान अद्भुत है। आपने अपने बचपन में स्कूली शिक्षा तो ग्रहण की बाद में बनारस जाकर ज्योतिष तंत्र का गहन ज्ञान भी प्राप्त किया। इनके अलावा कर्म - कांड में भी आपने गहरी रुचि से अध्ययन कर सनातन धर्मावलियो का भला किया। आप अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद, ज्योतिष तंत्र महासंघ से लेकन अनेक ज्योतिष , धार्मिक व सामाजिकों संघटन के शीर्ष पदों पन शोभा बढ़ाते रहे हैं और आज भी आपकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वाना ज्योतिष मार्तण्ड की उपाधि से विभूषित हो चुके हैं। ज्योतिष ज्ञान में आपकी चर्चा एक चमत्कारी संत के रूप में होती है। इस तरह की बातें आम और साधारण से लेकर विशेष लोग भी करते देखे जाते हैं। ज्योतिष संदर्भ में आपकी राय जानने देश के कई राजनीतिक व न्याय क्षेत्र से जुड़ी विभूतियां आपके पास आती रही हैं और आज भी यह क्रम जारी है। यही नहीं देश के अलावा विदेशी मूल के लोग भी आपकी ज्योतिष से प्रभावित हैं और आपको ज्योतिषीय राय लेने भारत आते हैं। इसी तरठ की ज्योतिषीय उपलब्धियों के चलते आपके जीवनकाल से जुड़े हुए हज़ारों जातकों की विशेष इच्छा पर आपने ज्योतिष मठ संस्थान की स्थापना की है।[उत्तर दें]

  • ज्योतिष* : *क्या* *और* *क्यों* *?*


आकाश की तरफ नजर डालते ही दिमाग में सवाल पैदा होता है कि ग्रह-नक्षत्र क्या होते हैं? इनमें से कुछ दिन में और कुछ रात में क्यों छुप जाते हैं? सारे ग्रह एक साथ डूब क्यों नहीं जाते? सूरज, प्रतिदिन पूर्व दिशा से ही क्यों उगता है?

इन्हीं सवालों की वजह से आदमी ने आकाश के ग्रह-तारों को देखना-परखना-समझना शुरू किया। धीरे-धीरे ग्रहों-नक्षत्रों की चाल आदमी की समझ में आने लगी। वह अपने आस-पास की घटनाओं को ग्रहों-नक्षत्रों की गतिविधियों से जोड़ने लगा और इस तरह एक शास्त्र ही बन गया, जिसे आज हम ज्योतिष कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र की प्रामाणिक परिभाषा वेदो में है।

'ज्योतिषां सूर्यादि ग्रहाणां बोधकं शास्त्र्‌म' इसका मतलब यह हुआ कि ग्रह (ग्रह, नक्षत्र, धूमकेतु आदि) और समय का ज्ञान कराने वाले विज्ञान को ज्योतिष अर्थात ज्योति प्रदान करने वाला विज्ञान कहते हैं। एक तरह से यह रास्ता बतलाने वाला शास्त्र है। जिस शास्त्र से संसार का ज्ञान, जीवन-मरण का रहस्य और जीवन के सुख-दुःख के संबंध में ज्योति दिखाई दे वही ज्योतिष शास्त्र है। इस अर्थ में वह खगोल से ज्यादा अध्यात्म और दर्शनशास्त्र के करीब बैठता है।

ऐसा माना जाता है कि ज्योतिष का उदय भारत में हुआ, क्योंकि भारतीय ज्योतिष शास्त्र की पृष्ठभूमि 8000 वर्षों से अधिक पुरानी है। भारतीय ज्योतिष के प्रमुख ज्योतिर्विद और उनके द्वारा लिखे गए खास-खास ग्रंथ- 1. पाराशर मुनि वृहद पाराशर, होरा शास्त्र 2. वराह मिहिर वृहद संहिता, वृहत्जातक, लघुजातक 3.भास्कराचार्य सिद्धांत शिरोमणि 4. श्रीधर जातक तिलक

ज्योतिष शास्त्र के कुछ और जाने-माने ग्रंथ इस प्रकार हैं- 1. सूर्य सिद्धांत 2. लघु पाराशरी 3. फल दीपिका 4. जातक पारिजात 5. मान सागरी 6. भावप्रकाश 7. भावकुतूहल 8. भावार्थ रत्नकारा 9. मुहूर्त चिन्तामणि

भारतीय ज्योतिष की अवधारणा मूल रूप से नौ ग्रहों पर टिकी हुई है। इसमें सात ग्रह मुख्य माने जाते हैं और दो को छाया ग्रह कहते हैं। सूर्य राजा है, चंद्रमा मंत्री, बुध मुंशी, बृहस्पति गुरु, शुक्र पुरोहित, शनि राजपुत्र और छाया ग्रह राहु, चांडाल केतु अछूत है।

जीवन का मुख्य आधार प्रकाश जिस दिन इस धरती पर नहीं होगा, शायद जीवन भी संभव नहीं होगा, इसलिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहों का राजा कहलाता है और उसको आधार मानकर समय की गणना की जाती है।

'एते ग्रहा बलिष्ठाः प्रसूति काले नृणां स्वमूर्तिसमम्‌। कुर्युनेंह नियतं वहवश्च समागता मिश्रम्‌॥' ऊपर दिए गए श्लोक से जाहिर है कि सभी ग्रहों का प्रकाश और नक्षत्रों का प्रभाव धरती पर रहने वाले सभी जीव-जन्तुओं और चीजों पर पड़ता है। अलग-अलग जगहों पर ग्रहों की रोशनी का कोण अलग-अलग होने की वजह से प्रकाश की तीव्रता में फर्क आ जाता है। समय के साथ इसका असर भी बदलता जाता है। जिस माहौल में जीव रहता है, उसी के अनुरूप उसमें संबंधित तत्व भारी या हल्के होते जाते हैं। हरेक की अपनी विशेषता होती है। जैसे, किसी स्थान विशेष में पैदा होने वाला मनुष्य उस स्थान पर पड़ने वाली ग्रह रश्मियों की विशेषताओं के कारण अन्य स्थान पर उसी समय जन्मे व्यक्ति की अपेक्षा अलग स्वभाव और आकार-प्रकार का होता है। इस तरह ज्योतिष कोई जादू-टोना या चमत्कार नहीं, बल्कि विज्ञान की ही एक शाखा जैसा है। मोटे तौर पर विज्ञान के अध्ययन को दो भागों में बाँटा जाता है :- 1. भौतिक विज्ञान 2. व्यावहारिक विज्ञान

भौतिक विज्ञान के तहत वैज्ञानिक किसी भी घटना के कारण और उसके परिणामों का अध्ययन कर एक अभिकल्पना बनाते हैं। इसके बाद वे समीकरण पेश करते हैं, जिसकी पुष्टि भौतिक प्रयोग के परिणामों और तथ्यों के जरिए की जाती है। व्यावहारिक विज्ञान में हम कारण और उनके प्रभावों का अध्ययन कर अभिकल्पना बनाते हैं कि कौन से कारण क्या प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं? जैसे, नोबल पुरस्कार विजेता डॉ. अमर्त्य सेन ने अर्थशास्त्र को नया सिद्धांत दिया। इसमें आर्थिक विकास को साक्षरता की दर से जोड़ा गया है। उनका यह सिद्धांत जनगणना से प्राप्त आँकड़ों पर आधारित है। इसी तरह ज्योतिषी भी मनुष्य पर सौरमण्डल के प्रभावों का व्यवस्थित अध्ययन करके एवं इकठ्ठा किए गए आँकड़ों का विश्लेषण करके फलादेश करते हैं।

इस प्रकार ज्योतिष, विज्ञान जैसा ही है, जिसमें मानव जीवन पर ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव का तर्कसम्मत एवं गणितीय आधार पर अध्ययन किया जाता है और उपलब्ध आँकड़ों एवं सूचनाओं के आधार पर मानव विशेष के वर्तमान, भूत एवं भविष्य की जानकारी दी जाती है। यदि ज्योतिष को चमत्कार या अंधविश्वास न मानकर उसे अपने जीवन में सही ढंग से प्रयोग में लाया जाए तो वह बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है।