सदस्य:अनिरुद्ध!

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
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aniruddhajnu@gmail.com

अपनी बात : चले चलो कि वो मंज़िल अभी नहीं आई।

कर्मण्येवाधिकारस्ते

  • कर्मक्षेत्र और अधिकारक्षेत्र को परस्पर सीमित और संयमित करने वाला गीता का यह श्लोकांश, जो प्रकारांतर से इनकी सहजिविता का भी संकेतक है, मुझे बेहद पसंद है। स्वयं को समझकर और समझाकर देख चुका हूँ कि अनासक्त मैं हो नहीं सकता। दुखों का भय मुझे दुखी नहीं कर सकता। पुनर्जन्म में मेरी कोई आस्था नहीं है इसलिए वर्तमान का दायित्व अज्ञेय अतीत पर थोपकर अनंत भविष्य को स्वप्निल बनाने की कोशिशें भी मेरे चिंता के दायरे में शामिल नहीं है। मेरे कर्तव्य और अधिकार क्षेत्र की सीमाएं ज्ञान क्षेत्र की सीमाओं ने निर्धारित की है। भूत, प्रेत, परी, जिन्न सबसे दोस्ती का इरादा है। वरना जबतक स्पष्ट रूप से महसूस न कर लूँ तबतक ईश्वर का अस्तित्व भी स्वीकार नहीं। अज्ञान को ईश्वर बनाकर पूजना मेरे वश में नहीं।
  • मुझे उछलता-कूदता, शरारतें करता बचपन, हँसती-खिलखिलाती, सपने सजाती लड़कियाँ और समझदारी भरी बातें करते लोग बेहद पसंद हैं। रंग-रूप, धन-दौलत, जाति-धर्म, आदि के आधार पर कर्तव्य तय करना मुझे पसंद नहीं।
  • मैं तबतक अपने परिचितों का सम्मान करता हूँ जबतक वह स्वयं को अनादर के सर्वथा उपयुक्त सिद्ध न कर दे और इस योग्यता का निर्धारण सिर्फ मेरे प्रति किये गये व्यवहार से नहीं बल्कि अन्यों के प्रति किये जाने वाले व्यवहार से भी होता है। किसी पर उँगली उठाते वक्त बाकी तीन उँगलियों पर मेरी हमेशा नजर होती है शायद इसीलिए मैं शिकायत नहीं करता, फ़ैसले लेता हूँ। तटस्थ रहने की मेरी आदत नहीं है।
  • मेरी निजी आकांक्षाएँ बहुत छोटी हैं किंतु सामाजिक सपने बहुत बड़े। एक ऐसी भाषा मेरी मातृभाषा है जिसके बोलने वाले बहुत गरीब हैं। एक ऐसी संस्कृति मुझे विरासत में मिली है जिसमें अच्छा चाहे जितना भी हो बुरा इतना है जो अच्छे को उभरने नहीं देता। स्वयं को सही और दूसरों को गलत मानने की इतनी गहरी आदत है कि दूसरों को सही समझकर कुछ सीखने की बात सिर्फ बातों और किताबों तक सिमट जाती है। इतना संतोष ज़रूर है कि मुझे सीमाओं की पहचान है और सामर्थ्य का ज्ञान भी।
संकल्प चरैवेती-चरैवेती का फ़ैज़ के सुबहे आज़ादी [[]]नज़्म की आखिरी पंक्तियों के रूप में-

अभी गरानी-ए-शब में कमी नहीं आई

निज़ाते-दीदा-ओ-दिल की घड़ी नहीं आई

चले चलो कि वो मंज़िल अभी नहीं आई

विकिपीडिया जीवन : इफ्तदा-ए-इश्क है

२00९-२0१0

एक दिन यूँ ही विकिपीडिया के चौपाल पृष्ठ पर गया तो देखा कि कुछ सदस्य विकिया को ४0,000 आलेखों की संख्या तक पहुंचाने और इस तरह हिंदी दिवस मनाने की योजना बना रहे थे। जाहिर है कि ऐसे उत्सव में मेरा शामिल होना लाजिमि था। तबतक मैं विकिया के लेखों का प्रयोग अपने ज्ञान का संवर्धन करने में करने लगा था। मैने अनाम सदस्य रहते हुए बिना किसी को सूचना दिए इस यज्ञ में आहूति देनी शुरु की। तब तो जानता भी नहीं था कि यहाँ कोइ अनाम रह सकता है किंतु अदृस्य नहीं। फिर ५ सितंबर को सदस्य भी बन गया। और यह संपादन के निचे बार-बार आ रहे संदेश के कारण हुआ जो दिखा रहा था कि आपने लॉगइन नहीं किया है। सदस्य बनते ही कुछ लिंक लेखों के निचे आ गए और लेख का संपादन करते हुए नया सन्देश का नोटिस मिला। इसपर क्लिक करते ही मैं वार्ता पृष्ठ पर पहुंचा जिसपर तब की बेहद सक्रीय सदस्य मुनिता जी का संदेश था। प्रिय Aniruddhajnu, विकिपीडिया पर आपका स्वागत है!

--Munita Prasadवार्ता १८:०१, ५ सितंबर २००९ (UTC) यद्यपि मैने जिस भाव से काम शुरु किया था उसे बनाए रखने के लिए किसी के सन्देश की जरूरत नहीं थी तथापि निस्संदेह इस तरह के आने वाले तब के अन्य बेहद सक्रीय सदस्यों- आशीष जी, गुँजन जी, आदि के सन्देशों से मुझे खुशी हुई थी और काम करने का उत्साह भी बढ़ा था। कई अच्छे लेख आपने बनाए हैं अनिरूद्ध जी। धन्यवाद।

-- सौरभ भारती (वार्ता) ०४:३३, ८ सितंबर २००९ (UTC) नमस्कार! आपका कार्य सराहनीय है। आप के इस कार्य से हिंदी विकी और भी ज्ञानपूरक हो रही है।--गुंजन वर्मासंदेश ०८:५०, ८ सितंबर २००९ (UTC) नमस्कार,
आपके योगदान निश्चय ही सराहनीय हैं। हिन्डी विकि को आज ऐसे ही योगदानकर्ताओं की आशा और आवश्यकता है। ...ऐसे कुछ ही और कुछ खास लोग ही होते हैं, जिनकी सराहना करने के लिए लोग सिफारिश करें) --प्रबंधक:आशीष भटनागर  वार्ता  ०९:१०, ८ सितंबर २००९ (UTC) इसलिए बाद में कुछ नए सदस्यों के सकारात्मक कार्यों के लिए प्रसंशात्मक सन्देश लिखना मुझे जरूरी लगा। मुझे लगता रहा कि पुराने विकिया सदस्यों को इस ओर समुचित ध्यान देते रहना चाहिए। सकारात्मक सन्देशों के महत्व के बोध ने ही मुझे नए सदस्यों की गलतियों पर सकारात्मक स्वर बनाए रखने में सहायता की। ...

मुझे यह देखकर बेहद खुशी हुई थी कि तब के सर्वाधिक सक्रिय सदस्यों ने इस ओर पर्याप्त ध्यान दिया था और कभी-कभी इस ध्यान के फोकस में मेरी गतिविधियाँ आ जाती थी। अनिरुद्ध जी तिथि के लेखों पर काफी काम कर रहे हैं। ये सराहनीय कार्य है, जिसकी प्रशंसा आवश्यक है। ऐसे लेख शायद बहुत कम ही बन पाते, क्योंकि प्रायः किसी भी लेख पर किसी की नज़र पड़ जाती है, और किसी भी विषय पर कोई सदस्य लेख बना या बढ़ा सकते हैं, किन्तु तिथि के लेख जो पहले ही बने हुए हैं, और खाली पड़े हैं, उनको बढ़ाने का काम नहीं हो पात है। इस कार्य को साधुवाद मिलना चाहिये।--आशीष भटनागर  वार्ता  ००:५७, ५ नवंबर २००९ (UTC)

अनिरूदध जी को बहुत बहुत साधुवाद। वाकई वे बहुत ही बेहतरीन एवं उपयोगी काम कर रहे हैं।--Munita Prasadवार्ता ०२:०५, ५ नवंबर २००९ (UTC)


कुछ ही लोग तो हैं जो ढंग का लिखते हैं। (मेधावी विद्यार्थी की उद्दंडता गुरूजन हमेशा क्षमा कर देते हैं।) वैसे आपने कोई उद्दंडता नहीं की। सदा की तरह उत्तरदायित्वपूर्वक सारा काम जारी रखें, मुझे खुशी होगी।--सुरुचि १५:१६, १३ जनवरी २०१० (UTC)

आलोचना 2 : राह रौशन रही जिनसे वे हमसफर

. मेरे कुछ सुझाव है जिनसे आपके लेख और भी बेहतर हो सकते है।

1. जब भी आप कोई नया लेख बनाएं तो एकबार उस नाम को विकी में खोज कर के देख ले की उस नाम का लेख अस्तित्व में है की नहीं।

2. नए लेख में कम से कम अंग्रेजी विकी का लिंक आवश्यक रूप से जोड़ दे। इससे लेख का प्रचार होता है एवं पुनार्वृति की संभावना कम हो जाती है।

३. लेखो में उचीत श्रेणियां लगाये. जैसे बिहार संबन्धी लेख में [[श्रेणी:बिहार]] जोड़ दे। आप अपने विवेक के अनुसार अन्य श्रेणियां भी बना सकते है।

आशा करता हूँ आप निरंतर ऐसे ही योगदान देते रहेंगे जिससे विकी का स्थान और भी उंचा होता जायेगा। और एक बात आप अपना सदस्य पृष्ठ पर कुछ आपने बारे में लिख दे जैसे की आपकी रुचियाँ आदि जिससे अन्य सदस्यों को भी आपके बारे में जानकारी होगी। धन्यवाद --गुंजन वर्मासंदेश ०८:५०, ८ सितंबर २००९ (UTC)

वैसे तो आपके कई लेखों में श्रेणियां दिखीं हैं, किंतु कुछ में नहीं भी दिखीं, किंतु इस बारे में गुंजन जी पहले ही लिख चुके हैं। बस उन्हीं बिन्दुओं का ध्यान रखें, तथा सांचे, चित्र और ज्ञानसन्दूक आदि के विषय में कुछ अध्ययन कर प्रयोग करें। इन विषयों पर मुझे निस्संकोच लिखें व कुछ भी पूछें। --प्रबंधक:आशीष भटनागर  वार्ता  ०९:१०, ८ सितंबर २००९ (UTC)

चौपाल पर आपकी दुविधा

देखे - विकिपीडिया:योगदान#मैं समान शीर्षक वाले लेख कैसे बना सकता हूँ? --मितुल ०२:३१, १७ सितंबर २००९ (UTC)


Aniruddhajnu जी, साँचा वार्ता:मुखपृष्ठ समाचार पर आप भी नएँ एवं मह्त्त्वपूर्ण समाचार सुझा सकते हैं एवं विकिपीडिया की मदद कर सकते हैं सिर्फ शिकायत करके क्या फायदा है? --Munita Prasadवार्ता ०३:३३, २३ सितंबर २००९ (UTC)

किसी भी संदेश के बाद हस्ताक्षर करना आवश्यक है, यदि करना नहीं जानते हैं तो अपना स्वागत संदेश पढ़िए जो कि मैंने ही आपको ५ सितंबर २००९ को लिखा था।--Munita Prasadवार्ता १०:४८, २३ सितंबर २००९ (UTC)

आपके हस्ताक्षर में वार्ता लिंक नहीं आता है, इसे आप चाहें तो सुधार सकते हैं। इस प्रकार आपकी वार्ता पर जाना सरलतर होगा। इस बारे में अनुनाद जी को मेरा यह संदेश पढ़ लें, तो सहायता मिलेगी। हां द्वितीय अनुच्छेद से आगे ही पढें। सधन्यवाद:--आशीष भटनागर  वार्ता  ०२:३३, ३ नवंबर २००९ (UTC)

पुरस्कार =

"What a Brilliant Idea!" Barnstar.png क्या सुझाव है बार्न सितारा [See]
style="vertical-align: middle; border-top: 1px solid gray;" अनिरुद्ध जी, जहाँ हम सभी अपने रोज के कार्यो में फंसे रहते है वही आपने दृष्टिहीन व्यक्तियों के बारे में चौपाल पर सुझाव देकर बहुत ही सराहनीय कार्य किया है. मेरी तरफ से छोटा सा पुरस्कार. --सिद्धार्थ गौड़ वार्ता २३:२७, ९ नवंबर २००९ (UTC)
Working Man's Barnstar.png कार्यशील पुरुष सदस्य बार्नस्टार
आपके मूल्यवान और अन्वरत योगदान हेतु यह बार्नस्टार आपको मेरी ओर से दिया जा रहा है।
--प्र:आशीष भटनागर  वार्ता  ०५:४६, २५ दिसंबर २००९ (UTC)
  • अनिरूद्ध जी को तिथि से सम्बंधित ऐतिहासिक कार्य के लिए Barnstar-stone2-noback.png (एपिक बार्न स्टार)
  1. समर्थन --राजीवमास ०४:१३, ५ जनवरी २०१० (UTC)

--Munita Prasadवार्ता १७:१४, ३१ दिसंबर २००९ (UTC)