साँचा वार्ता:मुखपृष्ठ समाचार

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नियमावली[संपादित करें]

मैं स्पष्ट रूप से ये जानना चाहूँगा कि क्या समाचारों के सम्बन्ध में इस समय कहीं कोई लिखित नियमावली है? क्या पहले कभी कोई थी? मुझे ना इस पृष्ठ पर, ना ही साँचे में किसी नियमावली की कोई कड़ी दिखी है। मैंने अभी इतिहास/पुरालेखों में खोज नहीं की है। अतः संभवतः मुझसे छूट गयी हो। यदि नियमावली है और उपयुक्त है तो फिर रघुराम राजन सम्बन्धी चर्चा का निर्णय उसी के अनुसार होना चाहिए था, यदि है और उपयुक्त नहीं है, तो कोई सदस्य कृपया उसकी कड़ी दे ताकि उस नियमावली में सुधार पर चर्चा हो सके, और यदि नहीं है तो फिर इस सम्बन्ध में नियमावली बनाने पर औपचारिक रूप से चर्चा की शुरुआत करने की आवश्यकता है। बिल शायद इस सम्बन्ध में कुछ मूल दिशानिर्देश प्रदान कर सकें जिन्हें ड्राफ़्ट बनाकर पूर्ण नियमावली का निर्माण मतैक्य से किया जा सके।

इनमें से किसी भी सूरत में, विशिष्ट रूप से एक समाचार के लिए ये चर्चा करना व्यर्थ है चूँकि उठाए गए मुद्दे सभी समाचारों पर लागू होते हैं, और इसलिए सम्बंधित नियमावली भी सभी के लिए एक जैसी होनी चाहिए।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 21:49, 8 सितंबर 2013 (UTC)

ऐसी कोई लिखित नियमावली तो नहीं है, जिसके आभाव में (कम से कम मेरी तरफ़ से तो) अन्य विकि परियोजनाओं के नियमों का पालन हुआ है। परन्तु अब समय आ गया है कि हम भी अपने नियम-दिशानिर्देश बनाएँ और नामांकन प्रक्रिया में सुधार करें। मैने एक शरुआती ड्राफ़्ट बनाया है। इसमें मैं अन्य सदस्यों के विचार जानना चाहूँगा।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 06:33, 9 सितंबर 2013 (UTC)
मैंने ड्राफ़्ट देखा है और मेरे विचार से इसका पहला मापदंड कुछ अस्पष्ट है।
पहला मापदंड: ख़बर व्यापक रूचि वाली होनी चाहिए। यहाँ व्यापक रूचि से अभिप्राय है कि ख़बर का विषय अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों का हिस्सा होना चाहिए।
इसमें अस्पष्ट है अंतर्राष्ट्रीय अख़बार की परिभाषा। क्या टाइम्स ऑफ़ इंडिया एक अंतर्राष्ट्रीय अखबार है, या द हिन्दू, या अमर उजाला, या द न्यू यॉर्क टाइम्स? ये सभी अख़बार एक ही देश में वितरित होते हैं। हाँ, कुछ ऐसे अखबार भी हैं जो शायद एक से अधिक देशों में वितरित होते हों। क्या यहाँ तात्पर्य उनसे है? या फिर ये कहने की कोशिश की जा रही है कि समाचार को एक से अधिक देशों के अखबारों/पत्रिकाओं इत्यादि में कवरेज मिला होना चाहिए। संभवतः यही कह रहा है, पर इसमें भी स्पष्टता की आवश्यकता है। क्या कोई ख़बर जो विश्व के किसी एक क्षेत्र के देशों के अखबारों तक ही सीमित हो वह मान्य है? या फिर हम ये देख रहे हैं कि ख़बर अपने मूल देश से कितने दूर के देश अथवा कितने unrelated देश तक फैली?
इसके अतिरिक्त मेरे विचार से मापदंड ऊपर उठाए गए सभी मुद्दों को कवर नहीं करता है।
मेरे विचार से इसमें एक नियम इस प्रकार का जोड़ा जाना चाहिए कि कुल समाचारों में से कितने प्रतिशत से अधिक समाचार एक देश पर नहीं हो सकते हैं। यह नियम गिनती के रूप में भी हो सकता है, जैसा कि क्या आप जानते हैं भाग में किया गया है।
साथ ही मेरे विचार से एक नियम ये भी जोड़ना चाहिए कि:
  • यद्यपि केवल अन्य भाषा स्रोतों से लिए गए समाचार मना नहीं हैं, परन्तु यदि संभव हो तो मुखपृष्ठ में अद्यतन से पहले सम्बंधित लेख में समाचार के लिए मूल भाषी स्रोत के साथ-साथ हिन्दी-भाषी स्रोत जोड़ देना चाहिए।
इस नियम से हम अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्रों के समाचारों को बैन नहीं करेंगे, बल्कि हिन्दी-भाषी स्रोतों को बढ़ावा देंगे।
लेख लिखने की शैली का जहाँ भी वर्णन किया गया है, वहाँ मेरे विचार से किसी उपयुक्त नीति/दिशानिर्देश पृष्ठ की कड़ी जोड़ी जानी चाहिए।
अन्य विचारणीय बातें:
  • कितने समय तक अद्यतन ना होने पर किस नियम का अपवाद किया जा सकता है?
  • ज़्यादा-से-ज़्यादा एक सीमित समय (जैसे कि एक दिन) में कितने अद्यतन किये जाएँगे?
  • लम्बे समय तक चलने वाली घटनाओं (जैसे सीरियाई गृह युद्ध) से सम्बंधित एक समय पर कितने समाचार हो सकते हैं?
  • फ़िलहाल समाचारों के नीचे अलग से कुछ भी नहीं लिखा जाता (जैसे कि निधन सूचनाएँ, या लम्बे समय से चल रही घटनाओं के लेखों की कड़ियाँ)। इन्हें किस आधार पर जोड़ा जा सकता है? साथ ही, एक दिन में अत्यधिक अद्यतन होने पर किन समाचारों को एकदम से हटाने के बजाए नीचे कड़ी के रूप में दर्शाया जा सकता है? (उदाहरण: अद्यतन ना होने पर निधन समाचार भी मुख्य भाग में दिखाया जा सकता है, परन्तु यदि ऐसे किसी अद्यतन के कुछ ही समय में कई सारे अद्यतन होते हैं तो क्या निधन सूचना को समाचारों के नीचे कड़ियों के रूप में दिखाना चाहिए? यदि दिखाना चाहिए तो कितने दिनों तक? यही प्रश्न जन्म से सम्बंधित समाचारों पर भी लागू होता है।)
  • यद्यपि लिखा है कि लेखन से सम्बंधित कोई गंभीर मुद्दा नहीं होना चाहिए, मेरे विचार से ये स्पष्ट कर देना चाहिए कि समाचार सम्बन्धी लेख में समाचार किसी विश्वसनीय स्रोत से संदर्भित होना चाहिए।
  • नामांकन प्रक्रिया भी हमें स्पष्ट कर देनी चाहिए, जिसमें नामांकन फॉर्मेट, समाचार फॉर्मेट, नामांकन के समय प्रदान करने वाली जानकारी शामिल हो। उदाहरणतः, क्या नामांकन के समय एक सन्दर्भ प्रदान करना काफ़ी है, या फिर नामांकन में स्पष्ट रूप से अनेक अखबारों में कवरेज दिखाना चाहिए, या ये कवरेज लेख में दिखाया हो तो नामांकन में स्पष्ट करने की आवश्यकता नहीं?
इसके अतिरिक्त साँचा:मुखपृष्ठ समाचार पर दी ले-आउट मार्गनिर्देशिका में लिखा है:
वेब पर जिस पते पर यह समाचार उपलब्ध है वहाँ का पता गुप्त टिप्पणी(Hidden Comment) के रूप मे लगायें।
मेरे विचार से यदि लेख में उपयुक्त स्रोत दिया हो तो हमें ऐसा करने की कोई ज़रुरत नहीं है।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 23:41, 9 सितंबर 2013 (UTC)
कुछ टिप्पणियां
सिद्धार्थ जी की बातों से लगभग सहमति के साथ-साथ निम्न बातें और जोड़ना चाहुँगा।
  • {{समाचार शीर्ष}} को भी इसमें शामील किया जाना चाहिए। इनमें कुछ भी परिवर्तन करने की आवश्यक्ता नहीं लगती।
  • समाचार से सम्बंधित पृष्ठ की अक्षर संख्या पर भी कोई अधिकतम सीमा (जिसमें निम्नतम अक्षरों की संख्या एक अधिकतम मान से अधिक हो) होनी चाहिए। सन्दर्भ के रूप में भी विशेष रूप से कुछ कहा जाना चाहिए।
  • बार्नस्टार वाली बात कुछ समझ में नहीं आयी। यह कितने अद्यतनों के बाद दिया जायेगा। एक ही व्यक्ति को अधिकतम कितने बार्नस्टार दिये जायेंगे, क्योंकि कुछ समय बाद ये बार्नस्टार भी पकाउ हो जाते हैं।
  • मेरे विचार से नयी नियमावली के बाद भी वेब पर जिस पते पर यह समाचार उपलब्ध है वहाँ का पता गुप्त टिप्पणी(Hidden Comment) के रूप मे लगायें। लागु रहना चाहिए।
आगे की टिप्पणी आवश्यक्ता होने पर बाद में।☆★संजीव कुमार (✉✉) 23:50, 9 सितंबर 2013 (UTC)
आप दोनों का ही टिप्पणी करने के लिए धन्यवाद। जैसा कि मैने लिखा था कि यह "एक शरुआती ड्राफ़्ट बनाया है", इसमें अभी काफ़ी बदलाव करने हैं। सिद्धार्थ द्वारा उठाए गए ज्यादातर प्रश्न को मैं विकिपीडिया:समाचार/उम्मीदवार मैं कवर करने वाला था। मैं एक-एक करके उत्तर देता हूँ:
@संजीव जी: {{समाचार शीर्ष}} वाले सुझाव विकिपीडिया:समाचार/उम्मीदवार पर आएँगे, चूँकि नामांकित ख़बर वहाँ पर ही होंगी। बार्नस्टार देने को किसी नियम के अंतर्गत नहीं आना चाहिए, क्योंकि बार्नस्टार का उद्देश्य सदस्यों को प्रोत्साहित करना होता है। इसे सदस्यों के विवेक पर ही छोड़ देना चाहिए कि वे किस के योगदान को "महत्त्वपूर्ण दीर्घकालिक" समझते हैं। हिड्न कॉमेंट वाली बात को मेरा भी समर्थन है।
@सिद्धार्थ: "अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों" से अभिप्राय है कि ख़बर ने विश्व के विभिन्न राष्ट्रों के समाचार पत्रों और जालपृष्ठों में जगह बनाई हो, इसमें हम बड़े-बड़े अख़बारों को शामिल कर सकते हैं: द सन, बीबीसी न्यूज़ (या बीबीसी हिन्दी), द न्यूयॉर्क टाइम्स, हैरल्ड सन, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स, द हिन्दू, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया, आदि। नामांकन करता को कड़ियाँ दे कर यह प्रदर्शित करना होगा कि ख़बर ने अन्तराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है। बाकि बातों से सम्बंधित मैने कुछ बदलाव किए हैं उन्हें देख कर प्रतिक्रिया दें।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 05:39, 10 सितंबर 2013 (UTC)

मैं पहले उदाहरण देकर बाद में अपनी बात कहना चाहूंगा-

  1. स्पेन की रेल दुर्घटना (७८ मृत) काफी दिन कवर पर थी, बिहार की रेल दुर्घटना (४७ मृत) का कोई ज़िक्र नहीं। (क्या यह घटना इसी कारण से कम महत्व की हो जाती है कि उसे अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों में जगह नहीं मिली?- या इसलिए कि यह विकि पर अपडेट नहीं थी?)
  2. रघुराम राजन की खबर हर प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय अखबार-वैबसाईट पर थी (वाल स्ट्रीट जर्नल, बी बी सी, रोयटर आदि)। मैं संदर्भ इकट्ठे कर ही रहा था कि जनमत से फैसला हो गया। (क्या प्रबंधक की विषय-रुचि या ज्ञान ना होने से खबर अप्रकाश्य हो जाएगी?, क्या संदर्भ मांगना गलत था?, क्या जनमत के आगे संदर्भ का कोई महत्व नहीं ?, जनमत क्या इमोशनल नहीं हो सकता खासकर कि जब खबर भारत से संबंधित हो? )
  3. Erna Solberg से संबंधित कुछ hu विकि मुखपृष्ठ पर है। किसी और भाषा के विकि पर कहीं नहीं है। २०२० ओलम्पिक की खबर लगभग हर विकि पर है। (जब यह विदित ही है कि किसी भाषा या इस विकि के अधिकतम पाठक किसी एक देश के हैं, तो स्थानीय महत्व की खबरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कवरेज का मुंह क्यो तका जाए?)

मेरा मत-

  1. अति से बचें, लचीलापन रहने दें, नियमावली के स्थान पर निर्देशिका हो। (it should be "guidance", not "rules" - because it may defeat basic purpose at times).
  2. विकि पर अपडेट होना लाज़मी है। कितनी ही महत्वपूर्ण घटना हो, कितनी ही अंतर्राष्ट्रीय कवरेज हो, लोकल कवरेज हो, एक हो, दोनों हों, या ना भी हों।
  3. विकि पर जो लेख हो, उसमें एक से अधिक प्रकाशन संदर्भ अवश्य होने चाहिएं।
  4. obviously important यथा २०२० ओलम्पिक - खबर हो तो तुरंत अपडेट हो, अन्य कोई दुविधा हो तो दो-तीन सदस्यों की राय ले ली जाए, सीधा मना ना किया जाए।
  5. स्थानीय महत्व की खबरों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कवरेज की शर्त न हो, दो-तीन सदस्यों की राय ले ली जाए।
  6. कम से कम , केवल अत्यावश्यक निर्देश हों, बाकी जण साधारण या पंचों की राय। No need to rewrite Indian Penal Code.

धन्यवाद --मनोज खुराना (वार्ता) 09:24, 10 सितंबर 2013 (UTC)

मनोज जी को उत्तर:
  • आपकी बात ठीक है कि बिहार की रेल दुर्घटना (४७ मृत) का कोई ज़िक्र नहीं। कारण: हिन्दी विकिपीडिया पर इसे किसी ने अद्यतन नहीं किया और नामांकन किया। प्रबंधक भी तो सभी अन्तरराष्ट्रीय खबरों को जेब में लेकर नहीं घूम सकते।
  • मैं भी ये ही सोच रहा हूँ कि रघुराम राजन की खबर बिल जी की अप्रयोजित नियमावली के अनुसार ठीक है फिर भी उन्हें और सिद्धार्थ जी को आपति क्यों हुई!
  • एर्ना सोलबर्ग का हिन्दी में कोई पृष्ठ नहीं है अतः इसे समाचार पर नहीं लाया जा सकता।
  • समाचारों के लिए विकिसमाचार] मौजूद है, अतः प्रत्येक समाचार को विस्तार से यहाँ नहीं लादा जा सकता। यदि आपको काम करना है तो वहाँ करें।
  • लोकल कवरेज को यहाँ मुखपृष्ठ पर अद्यतन करना सम्भव नहीं है।
  • प्रकाशन सन्दर्भ मेरे हिसाब से कम से कम 5 कर देने चाहिए। (मुखपृष्ठ समाचार के लिए)
  • पृष्ठ निर्माण से पूर्व तुरंत अद्यतन करने का कोई तात्पर्य नहीं है।
  • स्थानीय खबरों को अद्यतन नहीं किया जा सकता।
आशा है आप मेरी बात को समझ पाओगे।☆★संजीव कुमार (✉✉) 10:46, 10 सितंबर 2013 (UTC)
मनोज जी को उत्तर:
  • जैसा कि संजीव जी ने कहा कि बिहार की रेल दुर्घटना से सम्बन्धित कोई लेख यहाँ नहीं था और ना ही इस ख़बर को किसी ने नामांकित किया तो कैसे इसे शामिल करते?
  • मनोज जी विकिपीडिया भारत का ज्ञानकोष नहीं है यह हिन्दी भाषा का है। विश्व के हर हिन्दी के ज्ञाता के लिए इसका निर्माण किया गया है। इसे विश्व भर में पढ़ा जाता है। इसे संचालित एक अमेरिकी संस्था करती है ना कि भारतीय। केवल भारत से सम्बन्धित सामग्री को बढ़ावा देना प्रणालीगत पक्षपात है। हमें हर राष्ट्र को एक ही नज़र से देखना है, नहीं तो विकि अपना मूल उद्देश्य कभी प्राप्त नहीं कर पायेगा। विकि संपादक को निष्पक्ष भाव से योगदान देना चाहिए और यहाँ भारत के आलावा भी सदस्य हैं जो अपना अमूल्य योगदान देते हैं।
  • निति समुदाय के निर्णय को कभी नहीं बदल सकती। मैं रघुराम राजन की ख़बर दिखाने के पक्ष में नहीं था परन्तु फ़िर भी मतैक्य के साथ ही गया। बिना निति के विकि कार्यप्रणाली ठप पड़ जाती है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 17:25, 10 सितंबर 2013 (UTC)

कुछ और टिप्पणियाँ[संपादित करें]

  • शायद मनोज जी का विचार यह है कि भारत सम्बंधी समाचार देखकर भारतीय पाठक उत्साहित होंगे और योगदान करना आरम्भ कर देंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। आप उसी वस्तु अथवा स्थान के बारे में सम्पादन अधिक करोगे जो आपके लिए आसान होगा। इस तरह से प्रभावित लोग भी कोई विशेष योगदान नहीं दे पाते। अतः जैसा कि पुरानी "क्या आप जानते हैं?" की अवधारणा है उसके अनुसार विकि को किसी देश अथवा समुदाय से जोड़ना लाभदायक नहीं होगा।
  • हिन्दी भी एक बहुत बड़ी भाषा है और वर्तमान में हिन्दी भाषियों कि संख्या स्पेनी भाषियों से अधिक है और यह विश्व की तीसरी सबसे बड़ी भाषा है अतः किसी एक क्षेत्र अथवा समुदाय से जोड़ना हिन्दी विकी के लिए नुकसान दायक हो सकता है।☆★संजीव कुमार (✉✉) 20:29, 10 सितंबर 2013 (UTC)
संजीव जी, मैं केवल एक बात स्पष्ट करना चाहूँगा। मुझे रघुराम राजन वाली ख़बर से कोई आपत्ति नहीं थी। जब तक मैं यहाँ टिप्पणी करने आया, तब तक उसे मुखपृष्ठ पर डाल दिया गया था, अतः मैंने स्पष्ट रूप से उसके लिए समर्थन व्यक्त करने की आवश्यकता नहीं समझी।
मैंने नियमों में एक छोटा बदलाव किया है, 72 घंटों वाले नियम के सम्बन्ध में। सदस्य देख लें और कोई आपत्ति हो तो अवश्य बताएँ।
मनोज जी ने जो बात उठाई है उसमें कुछ प्रश्न सही हैं जिनपर विचार करने की आवश्यकता है। इनमें से मुख्य है अंतर्राष्ट्रीय कवरेज पर विचार। आज की वास्तविकता ये है कि समाचारपत्र/पत्रिकाएँ इत्यादि अब भी मुख्यतः पश्चिमी सभ्यता में छपती हैं, अर्थात यदि केवल गिनती देखी जाए तो यूरोप और उत्तर अमरीका से छपने वाले समाचार स्रोतों की संख्या एशिया और अफ़्रीका से कई अधिक है। यदि हम केवल गिनती के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय कवरेज देखेंगे तो संभव है कि समाचार वास्तविकता के इसी unbalanced scenario को झलकाएँगे। इसका अर्थ है कि यूरोप में कम लोगों की मौत की ख़बर को अफ़्रीका में अधिक लोगों की मौत की ख़बर से अधिक अंतर्राष्ट्रीय कवरेज मिलता है। ख़ुदा-ना-खास्ता कहीं ऐसे दो समाचार एक-साथ नामांकित हों (और दोनों सभी मापदंड पूरे करते हों) और उनमें से एक ही मुखपृष्ठ पर लगाना संभव हो तो क्या हम गिनती पर जाएँगे या महत्त्व पर?
मैं जानता हूँ कि विकिपीडिया एक tertiary source है जिसे वास्तविकता के साए की तरह होना चाहिए (i.e a mirror of society) ताकि तटस्थ दृष्टिकोण रखा जा सके, परन्तु प्रश्न उठता है कि ऐसे में तटस्थता अधिक आवश्यक है या मतैक्य? तटस्थता कहती है कि अधिक स्रोतों और कवरेज वाली ख़बर मुखपृष्ठ पर जाएगी, पर संभव है कि मतैक्य कहे कि दूसरी ख़बर मुखपृष्ठ पर जाएगी। ऐसे में क्या सदैव एक ही विकल्प चुना जाएगा या फिर समाचारों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा? और ऐसा होने पर निर्णय क्या एक प्रबंधक ले सकता है या फिर प्रबंधकों की विषम संख्या (odd number of admins) की आवश्यकता है निर्णय लेने के लिए?
मेरे विचार से ये निर्णय समाचारों के और मतैक्य के आधार पर होना चाहिए, परन्तु प्रबंधकों के दृष्टिकोण को और समाचार इतिहास को ध्यान में रखते हुए। अतः यदि अफ़्रीका और यूरोप से दो समाचारों में से एक ही जुड़ना हो, तो निर्णय को इस बात पर भी निर्भर करना चाहिए कि उस समय मुखपृष्ठ पर लगे समाचार अफ़्रीका से अधिक सम्बंधित हैं या यूरोप से। जिससे कम सम्बंधित हों उस समाचार को चुन लिया जाना चाहिए। इससे समाचारों में अंतर्राष्ट्रीयता बनी रहेगी।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 23:34, 12 सितंबर 2013 (UTC)
सिद्धार्थ, अंतर्राष्ट्रीय कवरेज का अर्थ कदापि यह नहीं है कि हम यहाँ समाचार पत्रों की संख्या गिनेंगे। अगर ऐसा कुछ होता तो मैं 'अंतर्राष्ट्रीय' के स्थान पर 'अत्याधिक' लिखता। मेरे विचार में ऐसा कोई राष्ट्र/क्षेत्र नहीं है जहाँ पर हुई बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु को अंतर्राष्ट्रीय कवरेज ना मिले। मैने जो समाचारपत्र सुझाए हैं कम से कम वे ऐसी ख़बरों को नजरअंदाज नहीं करते। बड़ी संख्या में हुई मृत्यु का अर्थ यह नहीं होता कि वो हमेशा ही व्यापक रूचि वाली ख़बर हो। इराक में लगभग रोजाना बम विस्फोट होते हैं जहाँ कई लोगों की मृत्यु हो जाती है, परन्तु अगर "अधिक लोगों की मौत की ख़बर" का मापदण्ड पकड़ा जाए तो मुखपृष्ठ अधिकतर इराक, अफगानिस्तान, सोमालिया, सीरिया, कोंगो, दक्षिण सूडान, पाकिस्तान, आदि, की ख़बरों को ही दिखाता रहेगा। यहाँ 'उस देश से सम्बन्धित कितनी ख़बर हैं' वाला मापदण्ड भी असफ़ल हो जाएगा क्योंकि ऐसे अस्थिर राष्ट्रों की संख्या बहुत है। ऐसे में अमेरिका में हुए बम विस्फोट को छोटी ख़बर माना जाएगा, जहाँ ऐसी घटना होने का अर्थ है विश्व की यकीनन सबसे सक्षम खुफिया और कानून एजेंसियों की विफलता। 2013 बॉस्टन मैराथन बम विस्फोट में केवल 3 ही लोग मरे थे परन्तु फ़िर भी इसे अत्याधिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय कवरेज मिली और यह 51 भाषाओं की विकि परियोजनाओं का हिस्सा है और इसके विपरीत इसी वर्ष हैदराबाद में हुए बम विस्फोट को अंग्रेज़ी विकि के आलावा किसी भी दूसरी भाषा के विकि पर जगह नहीं मिली जबकि इस घटना में 17 लोगों की मृत्यु हुई थी। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हैदराबाद वाली घटना को मुखपृष्ठ समाचार में शामिल नहीं करना चाहिए था, बल्कि इसे अंग्रेज़ी विकि पर 22 फ़रवरी के दिन दिखाया गया था। यहाँ में यह दिखाना चाहता हूँ कि कैसे अमेरिका में हुई घटना में लोगों की रूचि होती है। मनोज जी ने बिहार के रेल हादसे का उदहारण दिया और उसकी स्पेन की दुर्घटना से तुलना की परन्तु शायद वे यह नहीं जानते कि जीतने भारत में रेल हादसे होते हैं (औसतन हर महीने कम से कम एक) उतने स्पेन में पिछले 20 वर्षों में भी नहीं हुए। मैं भारतीय दुर्घटनाओं को कम महत्वपूर्ण नहीं कह रहा परन्तु जिन देशों में ऐसी दुर्घटनाएँ अक्सर होती है उनमें से केवल हमें उन्हें ही मुखपृष्ठ समाचार में शामिल करना चाहिए जिसमें कोई बहुत बड़ी जानमाल की हानि हो। वैसे अगर बिहार वाली घटना का लेख यहाँ होता तो हम उसे शामिल अवश्य करते। हिन्दी विकि पर प्रणालीगत पक्षपात अंग्रेज़ी विकि की तुलना में उल्टा है इसलिए मैने व्यापक रूचि वाला मापदण्ड रखा है, जिसमें चर्चा द्वारा यह तय कर सकें कि क्या सच्च में यह घटना अन्तराष्ट्रीय रूप से रोचक है या नहीं।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 05:24, 13 सितंबर 2013 (UTC)
यहाँ मुझे सिद्धार्थ जी और बिल जी की कुछ सर्वनिष्ठ बातों पर सहमति है। वैसे मुझे नहीं लगता आप कुछ अलग बातें कर रहे हो लेकिन थोड़ी सी भिन्नता है।☆★संजीव कुमार (✉✉) 07:11, 13 सितंबर 2013 (UTC)
बिल, मैं तुम्हारे विचारों से (पूर्णतया तो नहीं, परन्तु) मुख्यतः सहमत हूँ। बस ड्राफ़्ट नियम में अंतर्राष्ट्रीय कवरेज के अर्थ की ये भावना नहीं दिखाई दे रही। शायद वहाँ कुछ दो-तीन वाक्यों का विवरण दे देना चाहिए स्पष्टता हेतु?
मेरे विचार से अब एक ही मुख्य मुद्दा रह गया है नियमावली में, कि एक दिन में अत्यधिक कितने नये समाचार जोड़े जा सकते हैं। इस सम्बन्ध में नियम होने से ये सुनिश्चित होगा कि बहुत ज़्यादा गति से सारे समाचार ही एक दिन में ना बदल जाएँ।
मेरे विचार से प्रक्रियात्मक नियम कुछ ऐसा होना चाहिए:
दो दिन से कम समय में सारे समाचार नहीं बदले जाने चाहियें। कुछ समाचार बदले जा सकते हैं, परन्तु स्थिरता हेतु सभी समाचारों को दो दिन से कम अवधि में परिवर्तित नहीं होना चाहिए। यदि 72 घंटों से अधिक समय से कोई भी समाचार नहीं बदले हों तो इस नियम का अपवाद किया जा सकता है।
यहाँ कहने का आशय है कि अगर छः समाचार प्रदर्शित हैं तो ऐसा नहीं होना चाहिए कि छेयों के छेयों ही दो दिन के अन्दर बदल गये। एक-एक कर के यदि पाँच बदल जायें तो भी ठीक है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक साथ सारे ही बदल जायें।
यदि किसी सदस्य को आपत्ति ना हो तो इसे भी ड्राफ़्ट में जोड़ दें।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 17:17, 16 सितंबर 2013 (UTC)
सिद्धार्थ मैं शायद यह ठीक से स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि कैसे हम मुखपृष्ठ समाचार को प्रणालीगत पक्षपात से बचाएँगे। इसमें तुम्हारी मदद की जरूरत है।
समाचार जब तक सुर्खियों में है तब तक उसे यहाँ लगे रहने दिया जाएगा। मैं तुम्हारे सुझाव को ड्राफ्ट में जोड़ देता हूँ।
मेरे विचार में समाचारों की संख्या घटा कर के पाँच कर देनी चाहिए क्योंकि हिन्दी विकि पर जल्दी-जल्दी अद्यतन नहीं होता और ऐसे में बहुत पुरानी बासी ख़बरें भी मुखपृष्ठ पर दिखती हैं जिससे विकि की साख को ठेस पहुँचती है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 16:30, 17 सितंबर 2013 (UTC)
यहाँ मैं एक नन्ही सी बात जोड़ देता हूँ: जब तक समाचार सुर्खियों में है उसे अद्यतन करते रहना होगा। मुझे याद है उत्तर भारत में बाढ़ २०१३ से सम्बंधित समाचार में मृतकों की संख्या पहले दिन जो लगा दी थी अन्त तक वह ही रही जबकि वास्तविकता उससे कहीं भिन्न थी।
एक और बात, आजकल समाचार का पुरालेख उपलब्द्ध नहीं है, पुरानी नियमलावली के अनुसार जिस समाचार को साँचे से हटा रहे हो उसे पूर्व प्रदर्शित में डाल देना चाहिए लेकिन सामान्यतः ऐसा हो नहीं रहा।☆★संजीव कुमार (✉✉) 18:09, 17 सितंबर 2013 (UTC)
इस समय पहला मापदंड लिखा है ख़बर व्यापक रूचि वाली होनी चाहिए। यहाँ व्यापक रूचि से अभिप्राय है कि ख़बर का विषय अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों का हिस्सा होना चाहिए।
इसे बेहतर समझाने के लिए क्या हम इसे निम्न कर दें?
ख़बर व्यापक रुची वाली होनी चाहिए। यहाँ व्यापक रुचि जाँचने हेतु यह देखा जाएगा कि ख़बर के विषय को अंतर्राष्ट्रीय रूप से समाचारों में कितना महत्त्व दिया गया है। अतः घटना के मीडिया कवरेज के साथ-साथ घटना की दुर्लभता भी देखी जाएगी, कि जिस क्षेत्र/राज्य/राष्ट्र में घटना हुई वहाँ उस प्रकार की घटनाएँ कितने समय में होती हैं।
इसमें यदि कोई सुधार संभव हों तो अवश्य बताएँ।
मुझे समाचारों की संख्या पाँच करने से कोई आपत्ति नहीं है।
ऊपर मैंने जो दो दिन से कम समय...का अपवाद किया जा सकता है। नियम सुझाया है कृपया सदस्य उसपर टिप्पणी करें।
अंत में केवल एक बात और जोड़ना चाहूँगा। हम इस समय क्या आप जानते हैं प्रक्रिया में हुक की और लेख की लम्बाई कैरेक्टरों में गिन रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अक्षरों की गणना करने के लिए कोई टूल नहीं मिला था। हुक में अक्षरों की गणना करने के लिए मैंने लुआ आधारित {{अक्षर गणना}} का निर्माण किया है। यह पूरे लेख के लिए तो शायद ठीक से काम नहीं करेगा, परन्तु हुक के लिए करना चाहिए। मेरे विचार से हमें पुराने समाचारों की लम्बाई को जाँच कर हुक लम्बाई की सीमा कैरेक्टरों के बजाए अक्षरों में कर देनी चाहिए।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 01:32, 4 अक्टूबर 2013 (UTC)
सिद्धार्थ तुम्हारे बताए सभी सुझावों को ड्राफ्ट में जोड़ दिया गया है। इस समय के सबसे बड़े समाचार को देखा जाए तो (कैरैक्टर: 136, अक्षर: 70.5, स्पेस: 23) 70 अक्षर बैठते हैं, इससे बड़ा समाचार मुश्किल ही कभी लगाया जाता है इसलिए हुक में अधिकतम सीमा 80 रखली जाए तो कोई समस्या नहीं आएगी। अब ड्राफ्ट लगभग पूरा हो चुका है, किसी सदस्य को अगर कुछ बदलाव करवाना है तो कृपया शीघ्र बताएँ।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 18:34, 14 अक्टूबर 2013 (UTC)
वैसे और सब कुछ तो ठीक लग रहा है लेकिन अधिकतम सीमा 80 वाली बात में थोड़ा सा ऐतराज है। शायद आपकी टिप्पणी के बाद ये भी ठीक लगे। चूँकि केवल "(चित्रित)" जोड़ते ही यह संख्या 76 हो जाती है। कई बार कुछ घटनाएँ इस तरह से होती हैं कि उन्हें 80 अक्षरों में समेटना मुश्किल हो जाता है। अतः मेरा विचार है कि यह सीमा बढ़ाकर 90 अथवा 100 कर देनी चाहिए।☆★संजीव कुमार (✉✉) 18:59, 14 अक्टूबर 2013 (UTC)
मुझे कोई आपत्ति नहीं संजीव जी और वैसे भी अगर कोई ख़बर ज्यादा बड़ा लगेगी तो उसे चर्चा द्वारा छोटा कर लेंगे। मैने आपके सुझाव को ड्राफ्ट में जोड़ दिया है।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 20:17, 14 अक्टूबर 2013 (UTC)

┌─────────────────────────────┘
कुछ व्याकरण सम्बंधी त्रुटियों को छोड़कर सब ठीक है। व्याकरण सम्बंधी त्रुटियाँ शायद सिद्धार्थ जी ठीक कर सकेंगे।☆★संजीव कुमार (✉✉) 02:12, 15 अक्टूबर 2013 (UTC)

संजीव जी, अगर ऐसी कुछ त्रुटियाँ हैं तो उन्हें आप या सिद्धार्थ में से कोई भी ठीक कर दे। सिद्धार्थ, अक्षर गणना के आउटपुट में अभी पूरी इनपुट स्ट्रिंग भी आती है। मैने जैसी विकिपीडिया:समाचार/उम्मीदवार पर प्रक्रिया बनाई है उसमें केवल कुल अक्षर (या साथ में कैरेक्टर) ही आएँ तो ज्यादा अच्छा रहेगा और वैसा ही कुछ मैं 'क्या आप जानते हैं?' के लिए सोच रहा हूँ तो वहाँ भी आउटपुट में पूरी स्ट्रिंग आने की जरूरत नहीं होगी।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 05:05, 15 अक्टूबर 2013 (UTC)
अक्षर गणना साँचे में परिवर्तन कर दिया है। अब साँचा डिफ़ॉल्ट रूप से आउटपुट में इनपुट स्ट्रिंग नहीं दिखाता। हाँ यह कार्य प्राचल के प्रयोग से अब भी संभव है।--सिद्धार्थ घई (वार्ता) 19:55, 16 अक्टूबर 2013 (UTC)

अंतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों के समाचार[संपादित करें]

यहाँ मैं आप सभी का अंतर्राष्ट्रीय अख़बारों वाला बिन्दू समझने में असमर्थ रहा हूँ। चूँकि नीचे नामांकित समाचार लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय समाचार पत्रों में छपा था। यथा: न्यूयॉर्क टाइम्स में ब्लोग, बीबीसी हिन्दी, एमएसएन और इसके अलावा सभी भारतीय समाचार पत्र। लेकिन मुझे नहीं लगता यह समाचार मुखपृष्ठ पर आना चाहिए।☆★संजीव कुमार (✉✉) 09:23, 5 अक्टूबर 2013 (UTC)

संजीव जी, इसी बिंदु को सुलझाने का सिद्धार्थ और मैं प्रयास कर रहे हैं।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 21:39, 9 अक्टूबर 2013 (UTC)

मुख्यपृष्ट समाचार नामांकन[संपादित करें]

नामांकन वि:ख़बर सुझाव पर करें व उस से पहले कृपया वि:ख़बर पढ़ें।<>< बिल विलियम कॉम्पटनवार्ता 13:17, 6 नवम्बर 2013 (UTC)
धन्यवाद बिल जी। मैंने उचित जगह नामांकन कर दिया है।░▒▓शुभम कनोडिया वार्ता 13:50, 6 नवम्बर 2013 (UTC)

नाम का सुधार[संपादित करें]

[[भारत]] ने अपने प्रथम अंतर्ग्राहिक उपग्रह [[मंगलयान]] (मार्स ऑर्बिटर मिशन) (मंगल ग्रह की सतह चित्रित) का सफल प्रक्षेपण किया। को [[भारत]] ने अपने प्रथम अंतर्ग्राहिक उपग्रह [[मंगल कक्षित्र मिशन]] (मंगल ग्रह की सतह चित्रित) का सफल प्रक्षेपण किया। कर दीजिए क्योंकि वह उसका औपचारिक नाम है। स्त्रोत--14:04, 7 नवम्बर 2013 (UTC)