संसार के देश और निवासी

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उतरी अमरीका[संपादित करें]

Map of North America

यह संसार के सात महाद्वीपों में तीसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है। सिर्फ एशिया और अफ्रिका ही क्षेत्र में इससे बड़े हैं। जनसंख्या की दृष्टि से भी इसका नम्बर एशिया और यूरोप के बाद तीसरा है। लगभग सारा उत्तरी अमरीका भूम्ध्य रेखा के उत्तर में है। लेकिन इसका दक्षिणी भाग भूम्ध्य रेखा के इतना अधिक पास है कि वह साल-भर बहुत अधिक गरम रहता है। इसका उत्तरी भाग उत्तरी धृववृत्त को भी पार कर जाता है और इसलिए बहुत अधिक ठंडा रहता है। इस प्रकार इस विशाल महाद्वीप में किसी न किसी जगह हर समय हर प्रकार की जलवायु बनी रहती है - कहीं बहुत ठंडक तो कहीं बहुत गर्मी, कहीं वर्षा तो कहीं सूखा। इसी प्रकार इस विशाल महाद्वीप में हर प्रकार के प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं - ऊंची बर्फीली चोटियों वाले पहाड़ और हरे-भरे समतल मैदान, रेगिस्तान और दलदल, हिमनद और विशाल झरने, धुआं उगलनेवाले ज्वालामुखी और घने जंगल, छोटी-बड़ी झीलें और विशाल नदियां। साथ ही यहां संसार के बड़े-बड़े बाँध, जलाशय और पुल हैं; आसमान चूमने वाली संसार की ऊंची से ऊंची इमारतें और बड़े-बड़े कारखाने हैं। बड़े-बड़े बन्दरगाह और विशाल आधुनिक नगर हैं। उत्तरी अमरीका नौ देशों में बंटा हुआ है। इनमें सबसे बड़ा देश कनाडा है। इसके बाद संयुक्त राज्य अमरीका है। तीसरा बड़ा देश मेक्सिको है। अन्य छः देश काफी छोटे हैं।

इतिहास[संपादित करें]

जब प्रथम यूरोपीय खोजकर्ता यहाँ पहुँचे थे तो उस समय यह क्षेत्र एशिया से देशज लोगों द्वारा किए गए अप्रवासन से बसासित था जो बेरिंग की खाड़ी से होते हुए यहाँ पहुँचे थे। यूरोपीय उपनिवेशवाद का क्रम इस महाद्वीप में इस प्रकार था: स्पेनी, फ़्रान्सीसी और अंग्रेज़ जिन्होनें पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी तट तक इस महाद्वीप पर शासन किया। कुल मिलाकर यूरोपीय उपनिवेशवाद यहाँ के मूल लोगों के लिए हानिकर रहा। इस उपनिवेशवाद के कारण मूल लोगों का पार्श्वीकरण और निर्मूलन हुआ और जो लोग बच गए वे सबसे कम उपजाऊ, ऊसर और बंजर स्थानों पर रहने के लिए विवश हो गए। यूरोपीय उपनिवेशवाद अपने साथ बहुत सी बीमारियाँ भी लेकर आया जो स्थानीय लोगों के लिए नई थी और इस कारण भी बहुत से मूल लोगों का विनाश हुआ क्योंकि इन नई बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता मूल निवासियों में नहीं थी। क्रिस्टोफ़र कोलम्बस ने पन्द्रहवीं सदी में अमरीका कि खोज की। [1]

Christopher Columbus on Santa Maria in 1492.

उतरी अमरीका के निवासी[संपादित करें]

उत्तरी अमरीका में तरह-तरह के लोग बसते है। उत्तर के बर्फीले इलाकों में एस्कीमो लोग रहते हैं। कुछ भीतरी भागों में अब भी आदिवासी रेड इंडियन रहते हैं, जिनका रहन-सहन दूसरों से बिलकुल अलग है। कुछ लोग घास के मीलों लम्बे मैदानों में रहते हैं और घोड़े पालते हैं। कुछ लोग बड़े-बड़े फ़ार्मों में मशीनों से खेती करते हैं। कुछ लोग खानों में काम करते हैं। अन्य बहुत-से लोग बड़े-बड़े शहरों में रहते हैं और कारखानों या दफ्तरों में काम करते हैं या व्यापार करते हैं।

दक्षिणी अमरीका[संपादित करें]

Map of South America

दक्षिणी अमरीका महाद्वीप उत्तरी अमरीका से छोटा है, किन्तु यूरोप से लगभग दुगुना है। भूमध्य रेखा दक्षिणी अमरीका के बीच से गुज़रती है। इस महाद्वीप का अधिकांश भाग उष्ण कटिबंधीय है। एक बड़े भू-भाग की जलवायु गरम है और वहां भारी वर्षा होती है। भुमध्य रेखा के पास के कुछ स्थल इतने ऊंचे हैं कि वहां गर्मी कम पड़ती है। कुछ भाग इतना सूखा है कि कभी-कभी कई सालों तक वहां एक बूंद भी नहीं बरसती। ऐंडीज़ पर्वत इस महाद्वीप में उत्तर से दक्षिण तक फैला हुआ है। यह पर्वत इतना ऊंचा है कि पश्चिमी तट के लोगों को पूर्वी तट के निचले स्थनों से प्रायः दूर ही रहना पड़ता है। दक्षिणी अमरीका छोटे -बड़े अनेक देशों में बंटा हुआ है। इनमें सभी तरह के देश हैं। सबसे बड़ा देश ब्राज़िल सबसे छोटा देश फ्रेंच गायना से लगभग सौ गुना बड़ा है उसकी जनसंख्या फ्रेंच गायनासे लगभग २००० गुनी है। इन देशों में स्पेनी और पुर्तगाली भाषाऔं क प्रयोग होता है। ये दोनों ही भाषाऔं लातिन भाषा से निकली हैं। इसीलिए इन्हें लातिन-अमरीका देश कहा जाता है। बाद में इन देशों ने स्पेन और पुर्तगाल से युद्ध किया और स्वतन्त्र हो गए। दक्षिणी अमरीका में अनेक विचित्र जीव-जन्तुअ, पक्षी और पेड़-पौधे पाए जाते हैं। यहां अनेक धातुऔं की खाने भी हैं। यहां की प्रचंड जलशक्ति क अभी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। [2]

इतिहास[संपादित करें]

दक्षिण अमेरिका का इतिहास और संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से हैं। पेरू की केंद्रीय पहाड़ियों में लाखों वर्षों पूर्व मानव जीवन की शुरुआत हुई। यहाँ की सर्वप्रमुख सभ्यता इंका की सभ्यता थी जिसका अधिकारक्षेत्र पेरू, ईक्वाडोर, बोलीविया तथा अर्जेंटीना और चिली के उत्तरी भागों में फैला हुआ था। पेरू की राजधानी लीमा के समीपवर्ती क्षेत्रों में इंका सभ्यता की हजारों ममियाँ प्राप्त हुई हैं।[7] पंद्रहवी शताब्दी के अंत में यह चरमोत्कर्ष पर थी। इंका सभ्यता में शासक को इंका कहा जाता था एवं उसका सदैव आदर किया जाता था। यह सभ्यता अपनी उत्तम यातायात, संचार एवं डाक व्यवस्था के लिए जानी जाती है। माचू पिच्चू प्रमुख नगर था जिसके सुंदर पुरातात्विक अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। यूरोपीय समुद्र अभियानों में दक्षिणी अमेरिका की स्थिति की खोज सोलहवीं सदी के प्रारम्भ में हुई। इसके तट की विस्तृत खोज भी अमेरिगो वेस्पूची ने कुछ समय पश्चात् की, किन्तु अधिकांश आन्तरिक अगम्य भागों में दक्षिणी यूरोपवासियों का विस्तार अठारहवीं सदी में ही हुआ। यहाँ पर राज्यों एवं उनकी सीमाओं का निर्माण तथा सुचारु व्यवस्थाएँ उन्नीसवीं सदी की हैं। दक्षिण अमेरिका में अधिकांश देशवासी प्रारम्भ से ही स्पेन व पुर्तगाल से आकर बसे। फिर भी यहाँ बसने वालों को अपने पितृ देश की गुलामी सोलहवीं से उन्नीसवीं सदी तक कमोवेश भुगतनी पड़ी। यूरोपीय प्रभाव के कारण इसे लैटिन अमेरिका या लातीनी अमेरिका भी कहा गया। वर्तमान में दक्षिणी अमेरिका में मुख्य भूमि पर १३ देश एवं फाकलैण्ड द्वीप समूह है। इसके अतिरिक्त मध्य अमेरिका में ८ देश हैं एवं लेटिन अमेरिका में इन सबके साथ-साथ मेक्सिको एवं क्यूबा भी सम्मिलित है।

Machu-Picchu

१४९४ में उस समय की दो महान समुद्री शक्तियों, पुर्तगाल और स्पेन ने तोर्देसिलास की संधि पर हस्ताक्षर कर इस बात पर सहमति जताई कि, यूरोप से बाहर ढूंढी जाने वाली सारी जमीन पर उन दोनों देशों का विशेष द्वयाधिकार होगा। संधि के पालन के लिए उत्तर-दक्षिण मध्याह्न ३७० लीग, केप वर्दे द्वीप समूह के पश्चिम से एक काल्पनिक रेखा का निर्धारण किया गया जो मोटे तौर पर ४६° ३७' पश्चिम थी। संधि के अनुसार यह निश्चित किया गया कि इस रेखा के पश्चिम में पायी जाने वाली समस्त भूमि स्पेन के हिस्से मे जायेगी और पूर्व की सभी जमीन पुर्तगाल की होगी। उस समय देशांतर रेखाओं का सटीक और निश्चित मापन असंभव था, इस कारण इस संधि का अक्षरक्ष: पालन नहीं हो सका जिसके परिणामस्वरूप मध्याह्न के पश्चिम मे होने के बावजूद ब्राजील में पुर्तगाली विस्तार हो गया। १५३० के दशक के शुरुआत में, दक्षिण अमेरिका के लोगों और प्राकृतिक संसाधनों का विदेशी विजेताओं द्वारा बार बार शोषण किया गया, पहले स्पेन और बाद में पुर्तगाल द्वारा। निर्दयतापूर्वक इन पर विदेशी भाषा और धर्म लादे गए और बंधक मजदूर बनाए गए। इन दोनों प्रतिस्पर्धी औपनिवेशिक देशों ने इस महाद्वीप के संसाधनों को उनका अपना होने का दावा किया और इस महाद्वीप को उपनिवेशों में बाँट दिया। लंबे चले स्वतंत्रता संग्राम के बाद १८०४ और १८२६ के बीच दक्षिण अमेरिका के सभी स्पैनिश उपनिवेश, स्वतंत्र हो गये। पुर्तगाली उपनिवेश ब्राजील में, डोम पेड्रो प्रथम (पुर्तगाल का डोम पेड्रो चतुर्थ भी कहते हैं), जो पुर्तगाली नरेश डोम जोआयो षष्टम का पुत्र था, ने १८२२ में ब्राजील की स्वतंत्रता की घोषणा की और ब्राजील का पहला सम्राट बना। पुर्तगाल के राज परिवार ने इसे शांति से स्वीकार कर लिया। गुयाना इसके बहुत बाद १९६६ में संयुक्त राजशाही के नियंत्रण और सूरीनाम १९७५ में डच नियंत्रण से मुक्त हुआ जबकि फ्रेंच गयाना आज भी फ्रांस का एक हिस्सा बना हुआ है। कोलम्बिया इस समय तक आंतरिक संघर्ष से जूझ रहा है, जो १९६४ में मार्क्सवादी छापामारों के गठन के साथ शुरू हुआ था और अब कई वामपंथी विचारधारा रखने वाले अवैध सशस्त्र समूह और नशीली दवाओं का व्यापार करने वाले माफियाओं की निजी सेनायें इसमें शामिल हो गये हैं।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

लैटिन अमेरिका की जनसंख्या का एक बड़ा भाग मेक्सिको,अर्जेंटीनाब्राज़ील में रहता है। इन तीनों देशों की जनसंख्या कुल मिलाकर ३० करोड़ से अधिक है। इस महाद्वीप की आज भी अधिकतर जनसंख्या तटीय क्षेत्रों में पायी जाती है, जहाँ तट एवं तटीय सागर में विकसित यातायात अत्यन्त सुगम है और विदेशों से सम्पर्क आसानी से रखा जा सकता है। ऐसे क्षेत्र ब्राज़ील के साओ पाउलो और सेंटोस तक तथा पठारी व पूर्वी मेक्सिको, उत्तरी अर्जेंटीना और वेनेज़ुएला के तटीय भाग में हैं। मध्यवर्ती अक्षांशों में अर्जेंटीना और उरुग्वे से लाप्लाटा नदी के मैदान में कृषि और सुविधाओं के कारण जनसंख्या अधिक सघन मिलती है।[12] उत्तरी-पूर्वी ब्राज़ील में उष्णार्द्र खेती के अन्तर्गत कहवा और कपास पैदा किए जाने से जनसंख्या अधिक सघन मिलती है। यहाँ पर सभी प्रकार की उष्ण, अर्धोष्ण व शीतोष्ण फसलें पैदा की जाती हैं। यहाँ पर जन-घनत्व २५ से १०० व्यक्ति के मध्य है। ६५ प्रतिशत आबादी तटीय नगरों में बसी है। इन क्षेत्रों के विपरीत, अमेजन के जंगली और दलदली भाग, एण्डीज की ऊँचाइयों, पैटागोनिया, चिली और पेरु के मरुस्थलीय तथा मध्य अमेरिका की मलेरिया कारक जलवायु, ग्रेनचाको के गर्म, दलदली और बाढ़ग्रस्त क्षेत्र तथा ब्राज़ील के गर्म घास के मैदान में जनसंख्या बहुत ही विरल मिलती है। यहाँ का घनत्व ५ व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से भी कम है।

Mexico (orthographic projection)

बोलिविया और पेरू जैसे दक्षिण अमेरिका देशों की कुल जनसंख्या का अधिकांश यहां के मूल निवासियों के वंशज जैसे क्वेशुआ और आयमारा से बना है। इसके अलावा अधिकतर अन्य पूर्व स्पेनी उपनिवेशों में भी इनका प्रतिशत, जनसंख्या के हिसाब से महत्वपूर्ण हैं। वेनेज़ुएला और कोलोंबिया की जनसंख्या का लगभग 25% श्वेत और यूरोपीय वंश के व्यक्तियों का है। जबकि यूरोपीय मूल के लोग अर्जेंटीना, उरुग्वे और चिली में बहुसंख्यक हैं। दक्षिण अमेरिका में बड़ी संख्या में अफ्रीकाई मूल के लोग भी निवास करते हैं। अफ्रीकाई मूल के लोग मुख्यतः गुयाना, ब्राज़ील, कोलोंबिया, वेनेज़ुएला, सूरीनाम, फ्रेंच गयाना और ईक्वाडोर में रहते हैं। मेस्टिज़ो (श्वेत और मूलनिवासियों की मिश्रित संतानें) पैराग्वे, वेनेज़ुएला, कोलंबिया और ईक्वाडोर का सबसे बड़ा जातीय समूह है। भारतीय मूल के लोगों के वंशज गुयाना और सूरीनाम के सबसे बड़े जातीय समूहों में से हैं। ब्राज़ील और उसके बाद पेरू में दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा जापानी और चीनी समुदाय है। ब्राज़ील दक्षिण अमेरिका का सबसे ज्यादा विविधतापूर्ण देश है, जिसमें श्वेतों, अश्वेतों और मुलाटुओं की एक बड़ी आबादी के साथ साथ मध्य पूर्वी और एशियाई समुदाय का भी एक बड़ा हिस्सा मौजूद है। अमेजन बेसिन एवं लैटिन अमेरिका के अन्य प्रदेशों के भोजन एकत्र करने वालों और पशुचारी समुदायों की जीवन-शैली, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म, आस्थाएं एवं सांस्कृतिक मूल्य अधिकांशतः जलवायु एवं प्राकृतिक वनस्पति द्वारा नियन्त्रित होती हैं।


सन्दर्भ[संपादित करें]