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शूर्पणखा

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शूर्पणखा
राम ने शूर्पणखा को अस्वीकार कर दिया
संबंधनराक्षसी
निवास लंका
ग्रंथरामायण और इसके संस्करण
वंशावली
माता-पिता
सहोदररावण (भाई)
विभीषण (भाई)
कुंभकर्ण (भाई)
जीवनसाथीविद्युत्जिवा

शूर्पणखा (=शूर्प नखा ; तद्भव : सुपनखा या सूपनखा) रामायण की एक दुष्ट पात्र है। वह रावण की बहन थी। बहुत कामुक स्वभाव की थी । सूपे जैसी नाखूनों की स्वामिनी होने के कारण उसका नाम शूर्पणखा पड़ा। परन्तु सूप नखा नाम नाक की बनावट से संबंधित भी हो सकता है क्योंकि उसका नाक सूपड़ा (सूपड़ा=सूप गेहूं फटकने का एक बर्तन होता ) के समान हो गया था। इसका तमिल में नाम 'सूर्पनगै' है, इण्डोनेशियाई भाषा में 'सर्पकनक' है, ख्मेर भाषा में 'शूर्पनखर' है, मलय भाषा में 'सुरपन्दकी' है और थाई भाषा में 'सम्मानखा' है। शूर्पणखा- सर से नखूँ तक सुन्दर। [1]

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, शूर्पणखा ने श्री राम और लक्ष्मण दोनो के साथ विवाह करनेको बोली फिर राम और लक्ष्मण दोनो ने उससे विवाह करने की उसकी याचना को अस्वीकार कर दिया तब वह क्रोधित होकर सीता पर आक्रमण करने के लिये झपटी। इस पर लक्ष्मण ने उसके नाक-कान काट दिये। अपमानित होकर विलाप करती हुई वह अपने भाई रावण के पास गयी और रावण ने इस अपमान का बदला लेने की प्रतिज्ञा की। रावण, सीता को चुरा ले गया। राम-रावण युद्ध हुआ। अन्ततः राम ने रावण का वध किया।

विद्युतजिह्वा से विवाह

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जब शूर्पणखा बड़ी हुई, तो उसने चुपके से कालकेय दानव कुल के दानव राजकुमार, विद्युतजिह्वा [2] से विवाह कर लिया।

रावण शूर्पणखा के दानव से विवाह करने पर क्रोधित हो गया। दानव, राक्षसों के कट्टर शत्रु थे। क्रोधित रावण ने उन दोनों को मार डालने का फैसला किया। इस प्रकार, उसने विद्युतजिह्वा की सेना के खिलाफ युद्ध किया और उसे युद्ध में मार डाला। रावण शूर्पणखा को भी मारने ही वाला था, लेकिन रावण की पत्नी मंदोदरी ने उसे बचा लिया। रावण के भाइयों, कुंभकर्ण और विभीषण ने भी उससे शूर्पणखा के जीवन को बख्शने की अपील की।[3]

मंदोदरी ने शूर्पणखा से कहा कि वह घूमे और एक नए पति की तलाश करे। तब शूर्पणखा रावण के आदेश पर, अपना समय लंका और दक्षिण भारत के जंगलों के बीच बिताने लगी, कभी-कभी अपने वनवासी असुर रिश्तेदारों, खर और दूषण के साथ रहती थी।

चित्रवीथी

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सन्दर्भ

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  1. Johnson, W.J. (2009). A Dictionary of Hinduism (1st ed.). Oxford: Oxford University Press. डीओआई:10.1093/acref/9780198610250.001.0001. ISBN 9780191726705.
  2. Vālmīki (1893). The Ramayana: Translated Into English Prose from the Original Sanskrit (अंग्रेज़ी भाषा में). दास.
  3. चक्रवर्ती, बिष्णुपाद (2006). The Penguin Companion to the Ramayana (अंग्रेज़ी भाषा में). पेंगुइन बुक्स. ISBN 978-0-14-310046-1.