शिवसंहिता

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शिवसंहिता योग से सम्बन्धित संस्कृत ग्रन्थ है। इसके रचनाकार के नाम के बारे में पता नहीं है। इस ग्रन्थ में शिव जी पार्वती को सम्बोधित करते हुए योग की व्याख्या कर रहे हैं। योग से सम्बन्धित वर्तमान समय में उपलब्ध तीन मुख्य ग्रन्थों में से यह एक है।दो अन्य ग्रन्थ हैं - हठयोग प्रदीपिका तथा घेरण्ड संहिता

शिवसंहिता में ५ अध्याय हैं। प्रथम अध्याय अद्वैत वेदान्त को सार रूप में प्रस्तुत करता है। इस पर दक्षिणभारतीय श्रीविद्या सम्प्ररदाय का प्रभाव दिखता है। शेष अध्याय योग से सम्बन्धित हैं, गुरु का महत्व प्रदिपादित किया गया है, आसन, मुद्रा, तथा योग तथा तंत्र से प्राप्त होने वाली विभिन्न सिद्धियों की चर्चा है।

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