विश्वनाथन आनंद

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विश्वनाथन आनंद
VishyAnand09.jpg
पुरा नाम विश्वनाथन आनंद[1]
देश भारत
जन्म (1969-12-11) 11 दिसम्बर 1969 (आयु 46 वर्ष)
मयीलाडूतुरै,[2] तमिलनाडु, भारत
शीर्षक ग्रांडमास्टर (1988)
विश्व प्रतियोगिता 2000–02 (FIDE)
2007–13
फिडे रेटिंग 2796 (दिसम्बर 2015)
(No. 3-4 in the December 2015 FIDE World Rankings).
शीर्ष रेटिंग 2817 (मार्च 2011)

विश्वनाथन आनंद भारत शतरंज खिलाड़ी, अंतरराष्ट्रीय ग्रैंडमास्टर एवं पूर्व विश्व चैंपियन हैं।

विश्वनाथन आनंद क जन्म ११ दिसम्बर १९६९ में हुआ था। विश्वनाथन आनंद् एक भारतीय शतरंज खिलाड़ी और वह एक भूत्पुर्व शतर्र्ंज विजेता हैं। आनंद ने पाँन्च बार विश्व शतरंज प्रतियोगिता जीते हैं और वह निर्विवाद विजेता रहे हैं। विश्वनाथन आनंद २००३ में फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में विश्व शतरंज बने और वह अपने समय के ड्रीड खिलाड़ी माने जाते हैं।

सन १९८८ में विश्वनाथन आनंद भारत के ग्रांडमास्टर बने। उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सबसे पहले सम्मानित किया गया जो कि भारत का सबसे माननीय खेल पुरस्कार है (सन १९९१-९२)। विश्वनाथन आनंद को सन २००७ में भारत का द्वितीय सबसे श्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण दिया गया, जिससे वे भारतीय इतिहास के सबसे पहले खिलाड़ी बने जिसे यह पुरस्कार मिला। आनंद ने शतरंज ऑस्कर ६ बार जीता है (सन १९९७, १९९८, २००३, २००७, २००८)।

उन्होने फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप सन २००० से २००२ तक अपने नाम कर लिया था। वह सन २००७ में निर्विवाद विश्व विजेता बने और सन २००८ में उन्होंने अपना खिताब व्लाडामीर क्राम्निक से बचाया, तब उन्होने उसके बाद सफलता से अपने विश्व विजेता प्रतियोगिता का खिताब हासिल किया जो कि वेसेलीन तपोलाव के खिलाफ था और उन्होने विश्व शतर्र्ंज प्रतियोगिता फिरसे २०१२ मे जीता जो बोरिस गेल्फ के खिलाफ था। विश्व शतर्र्ंज प्रतियोगिता २०१३ में वेह मागनुस कार्सलेन के खिलाफ पराजय हुए।

विश्वनाथन आनंद इतिहास के उन ६ खिलाडियों में से एक हैं जिन्होने फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप दर्ज़ा सूची में २८०० के अंक को तोड़ा हैं और अप्रैल २००७ में जब वेह ३७ वर्ष के हुए तो पेहलि दफा वेह विश्व के नंबर १ खिलाड़ी बने। उन्होने ६ में से ५ दफा वेह विश्व दर्जे में सब्से उच्च स्थान पर थे (सन २००७ से २००८ तक) जिस्से वेह कुल १५ महिनो तक नंबर बन सके। पेहली दफा जुलाई १९९६ से लेकर अक्टूबर २००८ में वेह सब्से उपर के तीन स्थान से गीर गये। आनंद ने अपना विश्व क नंबर १ होने क दर्जा नवंबर २०१० में फिर से वापस हासील कर लिया पर उसे उन्हे वापस कार्सलेन को वापस सौपना पड़ा।

विश्व शतरंज चैंपियनशिप[संपादित करें]

फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप

काफी सारे सफलताये छुट्ने के बाद आखिर आनंद २००० में फिडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप जितने में कम्याब हुये। अलेक्सई शिरोव को हराने के बाद (३ १/२- ० १/२) इस टूर्नामेंट को जितने वाले आनंद भारत के पहले विजेता बने। आनंद दोबारा २००२ में इस खीताब को कायम रखने में नाकाम्याब रहे जब वेह वेस्सली इवन्चुक से हार गये। आनंद इस प्रकार विश्व शतरंज चैंपियनशिप २००८,२०१०,२०१२,२०१३ तक लगतार विजय प्राप्त करते गये।

फीर आया फिडे विश्व तीव्र शतरंज चैंपियनशिप। अक्टूबर २००३ में शतरंज के नियामक मंडल (फिडे) द्वारा आयोजीत किया गया 'रपीड टाइम कोन्ट्रोल टूर्नामेंट' कैप डी 'अगडे में और उसे नाम दिया गया विश्व तीव्र शतरंज चैंपियनशिप। इस प्रतियोगिता में हर खिलाड़ी को २५ मिनट का समय दिया जाता हैं और अतिरिक्त १० सेकेडं अपनी हर चाल चलने से पहले। आनंद दस मशहूर खिलाड़ी को हराकर दुसरी स्थान तक पहुचें, जहा उन्होनें क्रामनिक को हराकर इस खीताब में अपना नाम द्रज करवा लीया।

सम्मान और पुरस्कार[संपादित करें]

विश्वनाथन आनंद को भारत सरकार ने खेल क्षेत्र में अर्जुन अवॉर्ड (१९८५), पद्म श्री (१९८७), पद्म भूषण (२०००)[3], पद्म विभूषण (२००७), राजीव गांधी खेल रत्न (१९९१-१९९२) से सम्मानित किया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. I'm Anand. My father is Vishwanathan. At some point people assumed that this must be my first name and Anand must be my last name. It's common in the West. Vishwanathan was unpronounceable for them. Became Vishy. But my father is Vishwanathan Krishnamurthy. I am Anand Vishwanathan. Of course, my wife is Aruna Anand. So among the mysteries we have to explain to many people is, though we are married, why we don’t share the same family name.[1]
  2. "Sport : Anand inspires mind champions". The Hindu (Chennai, India). 22 December 2007. http://www.hindu.com/2007/12/22/stories/2007122256681900.htm. अभिगमन तिथि: 31 May 2010. 
  3. "Padma Vibhushan, Padma Bhushan, Padma Shri awardees [पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री पुरस्कार विजेता]" (अंग्रेज़ी में). द हिन्दू. २७ जनवरी २०००. http://www.hindu.com/2000/01/27/stories/02270005.htm. अभिगमन तिथि: ८ दिसम्बर २०१३.