"ईश्वर" के अवतरणों में अंतर

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{{Distinguish|देवता}}
{{एक स्रोत}}
'''परमेश्वर''' वह सर्वोच्च परालौकिक शक्ति है जिसे इस [[ब्रह्माण्ड|संसार]] का सृष्टा और शासक माना जाता है। हिन्दी में परमेश्वर को [[भगवान]], [[परमात्मा]] या [[परमेश्वर]] भी कहते हैं। अधिकतर धर्मों में परमेश्वर की परिकल्पना [[ब्रह्माण्ड]] की संरचना से जुड़ी हुई है।
[[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] की ईश् [[धातु]] का अर्थ है- नियंत्रित करना और इस पर वरच् प्रत्यय लगाकर यह शब्द बना है। इस प्रकार मूल रूप में यह शब्द नियंता के रूप में प्रयुक्त हुआ है। इसी धातु से समानार्थी शब्द ईश व ईशिता बने हैं।<ref>{{ Citation
| last1=आप्टे
| first1=वामन शिवराम
== धर्म और दर्शन में परमेश्वर की अवधारणाएँ ==
; ईश्वर में विश्वास सम्बन्धी सिद्धान्त-
* '''[[आस्तिकता|ईश्वरवाद]]''' (थीइज़म)
:* [[बहुदेववाद]]
:* [[एकेश्वरवाद]]
::* [[आस्तिकता|ईश्वरवाद]] (थीइज़म)
::* [[देववाद|तटस्थेश्वरवाद]] (deism)
::* [[सर्वेश्वरवाद]]
::* [[निमित्तोपादानेश्वरवाद]]
* '''गैर-ईश्वरवाद''' (नॉन-थीज्म)
:* [[नास्तिकता|अनीश्वरवाद]] (अथीज्म)
:* [[अज्ञेयवाद]] (agnosticism)
:* [[संशयवाद|संदेहवाद]] (sceptism)
 
=== ईसाई धर्म ===
{{मुख्य|ईसाई धर्म}}
परमेश्वर एक में तीन है और साथ ही साथ तीन में एक है -- परमपिता, ईश्वरपुत्र [[यीशु|ईसा मसीह]] और [[पवित्र आत्मा]]।
 
=== इस्लाम धर्म ===
{{मुख्य|इस्लाम}}
[[File:Allah3.svg|thumb|right|200px|[[अरबी भाषा]] में लिखा '''अल्लाह''' शब्द]]
वो ईश्वर को [[अल्लाह]] कहते हैं। [[इस्लाम|इस्लाम धर्म]] की धार्मिक पुस्तक [[क़ुरआन|कुरान]] है और प्रत्येक मुसलमान ईश्वर शक्ति में विश्ववास रखता है।
 
इस्लाम का मूल मंत्र "लॉ इलाह इल्ल , अल्लाह , मुहम्मद उर रसूल अल्लाह" है,अर्थात अल्लाह के सिवा कोई माबूद नही है और मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उनके आखरी रसूल (पैगम्बर)हैं।
वैष्णव लोग [[विष्णु]] को ही ईश्वर मानते है, तो शैव [[शिव]] को।
 
योग सूत्र में [[पतञ्जलि|पतंजलि]] लिखते है - "क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्टः पुरुषविशेष ईश्वरः"। (क्लेष, कर्म, विपाक और आशय से अछूता (अप्रभावित) वह विशेष पुरुष है।) [[हिन्दू धर्म|हिन्दु धर्म]] में यह ईश्वर की एक मान्य परिभाषा है।
 
ईश्वर प्राणी द्वारा मानी जाने वाली एक कल्पना है इसमे कुछ लोग विश्वास करते है तो कुछ नही।
 
=== न्याय दर्शन ===
नैयायिक [[उदयनाचार्य]] ने अपनी [[न्यायकुसुमाञ्जलि|न्यायकुसुमांजलि]] में ईश्वर-सिद्धि हेतु निम्न युक्तियाँ दी हैं-
 
: ''कार्यायोजनधृत्यादेः पदात् प्रत्ययतः श्रुतेः।
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