विचारपरक लेखन

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अखबारों में समाचार और फीचर के अलावा विचारपरक सामग्री का भी प्रकाशन होता है। कई अखबार अपने वैचारिक रुझान से पहचाने जाते हैं। अखबारों में सम्पादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले सम्पादकीय अग्रलेख ,लेख और टिप्पणीयाँ इसी विचारपरक लेखन की श्रेणी में आती हैं।

स्तभ्म लेखन[संपादित करें]

स्तम्भ लेखन विचारपरक लेखन का प्रमुख रूप है। कुछ महत्त्वपूर्ण लेखक अपने खास वैचारिक रुझान वाले होते हैं , ऐसे लेखकों की लोकप्रियता को देखकर अखबार उन्हें नियमित स्तम्भ लिखने का जिम्मा देता है। स्तम्भ का विषय चुनने और उसमें विचार व्यक्त करने की उसे पूरी स्वतंत्रता रहती है।

लेख[संपादित करें]

सभी अखबार सम्पादकीय पृष्ठ पर समसामयिक मुद्दों पर वरिष्ठ पत्रकारों और उन विषयों के विशेषज्ञों के लेख प्रकाशित करते हैं। इन लेखों में किसी विषय या मुद्दे की चर्चा की जाती है और इसमें लेखक के विचारों को प्रमुखता दी जाती है। इसमें लेखक के विचार तथ्यों पर आधारित होते हैं।

सम्पादक के नाम पत्र[संपादित करें]

सम्पादकीय पृष्ठ पर और पत्रिकाओं के प्रारम्भ या परिशिष्ट में सम्पादक के नाम पाठकों के पत्र भी प्रकाशित होते हैं। सभी अखबारों में यह स्थायी स्तम्भ होता है। इसमें पाठक विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करते हैं , समस्याओं को भी उठाते हैं और जनमत को भी प्रतिबिम्बित करते हैं।

साक्षात्कार[संपादित करें]

समाचार माध्यमों में साक्षात्कार के द्वारा ही समाचार ,फीचर ,विशेष रिपोर्ट और अन्य कई तरह के पत्रकारीय लेखन के लिए कच्ची सामग्री एकत्र होती है। पत्रकारीय साक्षात्कार और सामान्य बातचीत में यह अन्तर होता है कि साक्षात्कार में व्यक्ति से तथ्य , उसकी राय और भावनाएँ जानने के लिए सवाल पूछे जाते हैं जबकि सामान्य बातचीत उद्देश्यहीन संवाद है।

सन्दर्भ[संपादित करें]