विकिरण दाब

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एक परावर्तक (दर्पण) पर गिरने वाले प्रकाश के फ़ोटोन गिरने से उसपर बल पड़ता है

विकिरण दाब (radiation pressure) किसी सतह पर विद्युतचुंबकीय विकिरण पड़ने से पैदा होने वाले दाब को कहते हैं। यह दाब भिन्न प्रकार की वस्तुओं पर विकिरण के अवशोषण, परावर्तन या इनके मिले-जुले प्रभाव के कारण उत्पन्न होता है। क्योंकि प्रकाश भी एक प्रकार का विद्युतचुंबकीय विकिरण है, इसलिए किसी वस्तु पर प्रकाश के गिरने से भी उस वस्तु पर दबाव पड़ता है।[1] दैनिक जीवन में यह दाब कम बलवान होने के कारण प्रतीत नहीं होता लेकिन लम्बें अंतराल पर इसका प्रभाव काफ़ी हो सकता है। अनुमान लगाया गया है कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा मंगल ग्रह भेजे गये वाइकिंग-१ और वाइकिंग-२ अंतरिक्ष यानों पर सौर किरणों द्वारा बनने वाले विकिरण दाब का हिसाब लगाकर यान की उड़ान को अनुकूल न किया जाता तो यह यान मंगल ग्रह पहुँचने की बजाय उस से १५,००० किलोमीटर की दूरी पर आगे अंतरिक्ष में निकल जाते।[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Nichols, E.F & Hull, G.F. (1903) The Pressure due to Radiation, The Astrophysical Journal,Vol.17 No.5, p.315-351
  2. Eugene Hecht, "Optics", 4th edition