वार्ता:अकबर

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काफ़ी मेहनत से बनाया गया लेख है फिर भी कुछ सुझाव हैं जिनके आधार पर इसको बेहतर बनाया जा सकता है। -

  • विराम के स्थान पर वर्टिकल पाइप का प्रयोग किया गया है। इसको ठीक कर दें।
  • नाम को उर्दू या अंग्रेज़ी में लिखने की आवश्यकता नहीं है क्यों कि यह भारतीय व्यक्ति है अतः हिन्दी नाम पर्याप्त है।
  • वर्तनी व्याकरण ठीक करें और विराम चिह्नों के पहले वाला खाली स्थान हटा दें।
  • जहाँ तथ्य चाहिए लिखा है वहाँ उपयुक्त संदर्भ लगाएँ।--पूर्णिमा वर्मन ०९:४७, २७ जनवरी २००९
एक राय है। लेख पडते समय मन और विचार अकबर कालीन हो जाते है और मजा आने लगता है किन्तु फिल्मो से समबन्धित पोस्टर देख कर अचानक मन उचट जाता । क्या हम अलग से बाहरी लिंक में उसका जिक्र नही कर सकते ?? बाकी तो फुल समर्थन है ही -राजीवमास ०५:१६, ११ जून २००९ (UTC)
अकबर के अंग्रेज़ी लेख में यह शीर्षक उपस्थित है, इस कारण से ही शायद गुंजन जी ने इसे जोडआ है। साथ ही यह भी, कि सूचना तो अकबर लेख से संबंधित है ही। पोस्टर का जहां तक सवाल है, तो उसे हटाया जा सकता है, वैसे वो भी उन्हीं की (अकबरकालीन) फिल्म के दर्शन कराता है। --आशीष भटनागरसंदेश ०९:५८, ११ जून २००९ (UTC)

निर्वाचन प्रत्याशि की स्थानांतरित वार्ता अंश[संपादित करें]

अकबर[संपादित करें]

जुलाई माह के लिए प्रस्तावित
--आशीष भटनागरसंदेश १२:४५, ८ जून २००९ (UTC)

उपरोक्त लेख को काफी सुधारा गया है। संदर्भ भी लगाए गए हैं। साँचे सुधारे गए हैं। अन्य कई वर्तनी और वाक्य सुधार भी किए गए हैं। यह लेख प्रस्तावित है। कृपया राय दें।

समर्थन, थोड़े सन्दर्भ और जोड़ने होंगे --सुमित सिन्हावार्ता १६:५८, ९ जून २००९ (UTC)
 Yes check.svg  २१ संदर्भ हो गए हैं, साथ ही एक अनुभाग भी बढ़ाया गया है, हिन्दू धर्म पर प्रभाव। इससे लेख की जानकारी मात्रा और कुल लंबाई में भी बढ़ोत्तरी हुई है।--आशीष भटनागरसंदेश १९:३०, ९ जून २००९ (UTC)
 Yes check.svg  समर्थन!! कृपया इस अंग्रेजी विकी के पृष्ठ को देखे , अगर इसे जोड़ दिया जाये तो लेख की गुणवंता और बढ जायेगी। --गुंजन वर्मासंदेश ०४:१०, १० जून २००९ (UTC)
 Yes check.svg  मेरी तरफ़ से समर्थन । --अमित प्रभाकर १७:३७, १० जून २००९ (UTC)
एक राय है। लेख पडते समय मन और विचार अकबर कालीन हो जाते है और मजा आने लगता है किन्तु फिल्मो से समबन्धित पोस्टर देख कर अचानक मन उचट जाता । क्या हम अलग से बाहरी लिंक में उसका जिक्र नही कर सकते ?? बाकी तो फुल समर्थन है ही -राजीवमास ०५:१६, ११ जून २००९ (UTC) (संकलित:वार्ता:अकबर से)
अकबर के अंग्रेज़ी लेख में यह शीर्षक उपस्थित है, इस कारण से ही शायद गुंजन जी ने इसे जोड़ा है। साथ ही यह भी, कि सूचना तो अकबर लेख से संबंधित है ही। पोस्टर का जहां तक सवाल है, तो उसे हटाया जा सकता है, वैसे वो भी उन्हीं की (अकबरकालीन) फिल्म के दर्शन कराता है। --आशीष भटनागरसंदेश ०९:५८, ११ जून २००९ (UTC)
 X mark.svg विरोध आपने एक ऐसे विषय को प्रमुख लेख बनाने के लिए चुना है जो विवादित है। कृपया लेख के मानदंडों को देखें संख्या 4-5 को ध्यान से पढ़ें। अकबर ऐतिहासिक दृष्टि से विवादास्पद व्यक्ति हैं। उनकी धर्म निरपेक्षता या महानता के पक्ष में जितनी किताबें मिलेंगी उससे अधिक विपक्ष में। इस प्रकार के लेखों को निर्वाचित उम्मीदवार के लिए नहीं चुना जाना चाहिए। समर्थन देते समय भी प्रमुख लेख की आवश्यकताओं का ध्यान रखना चाहिए। अकबर की पटरानी जोधाबाई थी इसको तो आशुतोष गोवारीकर तक सिद्ध नहीं कर पाए हार कर उनको कहना पड़ा कि कहानी काल्पनिक है और इसके तथ्य इतिहास से नहीं लिए गए हैं। लेकिन यहाँ पता नहीं किस आधार पर जोधाबाई का चित्र लगाकर इस लेख को आज का आलेख में प्रदर्शित कर दिया है। जाहिर है यह लेख बिना अध्ययन और पर्याप्त जानकारी के लिखा गया है। यह प्रमुख लेख के नियम संख्या 3 का भी उलंघन करता है। इस तरह हिंदी विकिपीडिया की प्रमाणिकता को तो धक्का लगता ही है, यह भी प्रकट करता है कि निर्वाचित या प्रमुख लेख के प्रति जिस गंभीरता या अध्ययन की आवश्यकता है वह लेखक में नहीं है। "वह निश्चय ही एक महान सम्राट था।" इस प्रकार के वाक्य साँचों में डालकर मुखपृष्ठ पर लाना लेखक की निरपेक्षता और प्रबंधकीय योग्यता पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं। इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। यह विकि के नियमों और गरिमा के विरुद्ध है। बेहतर हो कि प्रमुख लेख के लिए लेखक उन विषयों का चयन करें जिनका स्वयं उन्होंने अध्ययन किया हो और जिनके विषय में वे ठीक से जानते हों। आखिर हर किसी ने किसी न किसी विषय का अध्ययन तो किया ही है उस विषय पर और मेहनत कर के हिंदी में अच्छे लेख क्यों नहीं बनाते हैं? कुछ इधर से कॉपी कर के चिपकाया, कुछ उधर से, कुछ जैसा तैसा अनुवाद किया और बन गया लेख। ऐसा तो प्रमुख लेख के लिए नहीं होना चाहिए। काम करने का उत्साह ठीक है पर उसके लिए ठीक योग्यता भी विकसित करनी चाहिए।--पूर्णिमा वर्मन ०४:५८, १३ जून २००९ (UTC)
 X mark.svg विरोध लेखों में विशेषकर ऐसे लेखों में जो विवादास्पद हें, से बचना चाहिए। निर्वाचित लेख या आज का आलेख बनाने के लिए ऐसे लेखों का दिया जाना ठीक नहीं है। जैसे- ताजमहल, अकबर, आर्यों का भारत में आगमन आदि विषय अभी तक भारत में विवादित हैं, जब तक यह विवादित रहें तब तक इन पर कुछ लिखना एक नए विवाद को जन्म देना है। लेखक एक संवेदनशील व्यक्ति होता है और प्रत्येक लेखक के लिए यह अनिवार्य है कि वह लेखकीय उद्देश्य का परिपालन करे।
--डा० जगदीश व्योम ०५:१६, १३ जून २००९ (UTC)
अकबर निश्चय ही भारतीय इतिहास में एक महान सम्राट था, इस विषय में कोई विवाद नहीं है। हां अधिकांश महान व्यक्तियों के बारे में विवाद उठते रहते हैं, जैसे श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने संजय गाँधी को मरवाया, गाँधी जी, पं.नेहरू, यहां तक की भगवान राम और श्रीकृष्ण, तथा उन दोनों की जन्म भूमियाँ। इस प्रकार से तो हम किसी भी महान व्यक्ति पर लेख ही नहीं निर्वाचित कर पाएंगे। इन विषयों पर लेख लिखने का अर्थ है, कि उनके विषय को विस्तृत कर बताना। उस ही प्रकार उनसे जुड़े विवाद, यदि कोई ज्ञान में हैं भी तो, उन्हें भी उल्लेख किया जा सकता है। इस कारण से ही अंग्रेज़ी में गाँधी जी का लेख निर्वाचित है। यह तो सर्वथा गलत है, कि महान व्यक्तियों को विवादित बता कर उन पर लिखे लेख निर्वाचित ना किए जाएं। या मात्र लेखक की आलोचना ही उद्देश्य है, तो क्या कहने? विषय कोई भी विवादित नहीं होता, विवाद उस विषय से जुड़े होते हैं। तो हमें विषय की जानकारी के साथ ही ज्ञात विवादों पर भी संभव प्रकाश डालना चाहिए। अन्य कोई विवाद जो पता चले, वो समय समय पर जोड़े जा सकते हैं, जैसे कि बाद में उपलब्ध सूचनाएं निर्वाचित लेख में जोड़ी जा सकती हैं।
ताजमहल, अकबर, आर्यों का भारत में आगमन आदि विषय अभी तक भारत में विवादित हैं, जब तक यह विवादित रहें तब तक इन पर कुछ लिखना एक नए विवाद को जन्म देना है। → यह विचार भी हमें प्रमुख विषयों पर लेख लिखने से रोकता है। हम यदि कुछ बात बिना संदर्भ के लिखें, तब तो शयद गलत हो, किंतु संदर्भ सहित विवाद को भी लिखा है, जो कि उस विषय से जुड़ा हो, तो इसमें गलत ही क्या है। ताजमहल इत्यादि विषय भारत की शान हैं। उस से जुड़ा कोई विवाद इस बात से बड़ा नहीं हो सकता है, कि ताजमहल विश्व में भारत को ऊंचा स्थान दिलाता है। तब क्या तुच्छ विवादों के चलते हम उस बात को भूल जाएं। जिस अकबर का नाम विश्व इतिहास में लिया जाता हो, वो क्या इन छोटे मोटे विवादों से ढंक जाएगा? हां, जोधाबाई का चित्र हटाया जा सकता है। और जहां तक निष्पक्षता की बात है, लेख में हिन्दू धर्म के प्रति लगाव के साथ ही हिन्दू मंदिर को मस्जिद में बदलवाना, जज़िया हटाने के साथ ही वापस लगवाना, भी लिखे हैं। जहां तक जुलाई माह के निर्वाचन का प्रश्न है, उसमें जैसे सर्वसम्मति।--आशीष भटनागरसंदेश ०६:३५, १३ जून २००९ (UTC)
अकबर लेख को अंग्रेजी विकि पर एक विवादित लेख कहॉ गया है। यह बात मुझे लेख लिखने से पहले से ही पता था। इसलिये मैने उन विषयो को नही छुआ जो विवादित थे जैसे की Relation with Hindus,Rajput Wives of Akbar,Hindu Temples Saved,Hindu Temples Destroyed,Jihad Against Hindu Kings आदि। जोधा बाई का नाम भी इसलिये नही जोड़ा क्योकि उस समय फ़िल्म जोधा अकबर के उपर विवाद चल रहा था। मेर उद्देश्य केवल अकबर के बारे मे वह जानकारी जुटाना था जो स्कूल की किसी भी इतिहास की पूस्तक मे उपलब्ध हो एवम जिसके उपर कोई विवाद नही हो। मैने इसे आज के आलेख के लिये प्रस्तावित किया था पर जैसा की विकि की प्रकृति है इस लेख को कुछ प्रबंधको का सानिध्य मिला और लेख की रूप रेखा बदल गयी। इन प्रयासो से आज यह लेख हिन्दी विकि पर उपलब्ध अच्छे लेखो मे से एक है। सभी लोगो ने इस पर अथक परिश्रम किया है। अगर विवादित होने के कारण इसे निर्वाचित लेख नही बनाया जा सकता तो कम से कम इसे हिन्दी विकि के प्रमुख या फ़िर अच्छे लेख ऎसी किसी श्रेणी मे रखना चाहिये ताकि नये योगदानकर्ता इसे देख सके, यह उन लोगो के लिये अच्छा उदाहरण रहेगा। हॉ विवादित लेख का साँचा अवश्य लगा दिया जाये। --गुंजन वर्मासंदेश ०७:३४, १३ जून २००९ (UTC)

 X mark.svg  अकबर के विषय में जिस प्रकार के विवाद हैं वैसे कोई विवाद इंदिरागांधी या महात्मा गांधी के विषय में नहीं हैं। मैं भी इस बात का समर्थन करती हूँ कि कुछ विषयों को प्रमुख लेख से अलग रखना चाहिए और विकिपीडिया में विवादास्पद विषयों पर आज का आलेख या प्रमुख लेख नहीं लिखना चाहिए। प्रमुख लेख लिखने के लिए विषयों की कमी नहीं है, विज्ञान, भूगोल, साहित्य, संस्कृति आदि अन्य अनेक विषयों पर लेख लिखे जा सकते हैं। --Munita Prasadवार्ता ०८:३७, १६ जून २००९ (UTC)

 X mark.svg  निश्चय ही अकबर अन्य की तुलना में अधिक सहिष्णु था। वह हिन्दुस्तान को लूटकर भाग जाना नहीं चाहता था बल्कि यहीं रहकर लम्बे समय तक राज्य करना चाहता था। लेकिन उसे बार बार महान कहना भारतीय इतिहास की कमजोरी है। तमाम ऐसे लोग आज हैं जो यह कहते हैं कि यदि अकबर महान था तो पूरे जीवन अकबर से जूझने वाले राणाप्रताप क्या थे ? और इस प्रश्न का कोई उत्तर हमारे पास नहीं है। देश और काल के अनुसार व्यक्ति महान और गद्दार होता है..... इन अति संवेदनशील और भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक है। यदि इस लेख को देना ही हॅ तो महान जॅसे शब्द निकाल दें। --आलोचक १०:१४, १६ जून २००९ (UTC)

अकबर को महान बहुत सोच समझ कर ही कहा गया होगा। भारत में इतनी मजबूरी नहीं आई है अभी तक। एक बात तो यह है, कि हम लेख को निर्वाचित करते हैं, ना कि व्यक्तित्व को। यनि अकबर लेख क्या निर्वाचन स्तर का है? इस पर विचार करें, ना कि अकबर स्वयं निर्वाचन स्तर का है या नहीं? दूसरा उसने जितने बडे भूभाग पर राज्य किया, क्या कोई अन्य है, जिसने इतने बडए भारतीय भूभाग पर एकछत्र राज्य किया, और इतने लंबे समय तक? यदि है तो एकमार अशोक, तभी दोनों को महान का विशेषण दिया गया है। इसलिए महान कोई मजबूरी नहीं थी। महाराणा प्रताप एक क्षेत्रीय व्यक्तित्व थे, जिन्हें राष्ट्रीय नेता नहीं माना जा सकता है, हां राजस्थान के लिए वे महान राणा प्रताप थे। किंतु भारत के लिए अधिकतम महाराणा प्रताप थे। हां शीवाजी अवश्य ए क्षेत्रीय नेता के ऊपर उठे थे। किंतु उन्होंने सभी ने अपने राज्यों की रक्शःआ हेतु संघर्ष किए थे। भारत के हिते हेतु गाँधी जी ने कार्य किया था, ज कि गुजरात से ऊपर उठे थे।
इन कारणों से अकबर को महान कहना अनुचित तो नहीं होगा। साथ ही निर्वाचन के लिए भी उपयुक्त लगेगा। कृपया असमर्थन पक्षधर लोग एक बार फिर सोचें।--आशीष भटनागरसंदेश १०:४३, १८ जून २००९ (UTC)
व्यक्ति अपने कर्मो से महान बनता है न कि किसी के कहने से। जिन लोगो को अकबर को महान कहने मे गुरेज है वे लोग यह नही समझना चाह्ते कि इतिहास न केवल अतीत का अध्ययन है बल्कि यह भविष्य की तैयारी के लिये भी महत्वपूर्ण है। और महान क्या केवल हिन्दू राजा ही हो सकते है? महाराणा प्रताप बेशक महान थे पर इसका अर्थ यह नही कि कोई और महान नही हो सकता। पूरे देश पर कब्जा़ करने के लिये जो चाले चन्द्रगुप्त मौर्य ने चली वही अकबर ने भी अपनायी। जनता के दिलो पर राज्य करने के लिये जो तरीके अशोक ने अपनाये वही अकबर ने भी अपनाये। यदि गद्दार देश काल के हिसाब से होता तब भी गद्दार वे राजा रजवाडे थे जो कभी क्षुद्र स्वार्थो से ऊपर नही उठ पाये, वे गद्दार थे जिन्होने अन्ग्रेजो से गुप्त सन्धियाँ की थीं। वे गद्दार थे जिन्होने अपना राज धर्म नही निभाया था। अकबर ने तो अपना राजधर्म बखूबी निभाया। राणाप्रताप ने भी। जिस शासक के प्रयास से हिन्दुस्तानी संगीत के महान गायक को आश्रय मिला, जिसके काल में अमर कथा रामचरित मानस की रचना हुयी, जिसके काल में भारत का सकल घरेलू उत्पाद का विश्व में हिस्सा २४% पहुँच गया हो उसे अगर हम अपने इतिहास से निकाल देंगे तो फिर क्या बचेगा? "Anupam (वार्ता) ०८:४२, २६ जून २०११ (UTC)"

आज का आलेख[संपादित करें]

अकबर लेख में- "अकबर भारतीय संस्कृति के एक लोक प्रिय शासक थे। जन साधारण में उनकी छवि एक कुशल एवं दयालू शासक की है। इसिलए भारतीय साहित्य एवं सिनेमा ने अकबर से प्रेरित कई पात्र रचे गए।"

यह वाक्य ठीक प्रतीत नहीं हो रहा है, इसे इस प्रकार किया जा सकता है- अकबर का व्यक्तित्व बहुचर्चित रहा है। (भारतीय संस्कृति का लोकप्रिय शासक अकबर कभी नहीं रहा) इसलिए भारतीय साहित्य एवं सिनेमा में अकबर से प्रेरित कई पात्र रचे गए।-- डॉ॰ जगदीश व्योम ०१:४८, १३ अक्टूबर २००९ (UTC)

अकबर बेशक एक लोकप्रिय शासक था और आज भी है। जो शासक हिन्दुस्तान की जनता की वचिक परम्परा के वचिक सहित्य में शामिल हो जाये (अकबर बीरबल की कहानियाँ पढ कर ही बडे हुये होंगे ना डॉ साहब) बहुचर्चित ही नहीं लोकप्रिय भी था अकबर। - ¬¬¬अनुपम दीक्षित

Akbar beshak ek lokpriye shasak tha aur humesha rahega. par kai kamiya thi uske shashan karne main. yaha jo jankari di gayi hai wo mili juli hai. humkao kisi bhi aise vyakti k liye jiska itihas main aham role tha k liye 2 lek likne chahiye. ek lek main uski uplabdhiyan aur dusre main uski kamiyan taki readers ko asani se samgh aa sake. akabr k bare main jyada achi batain hi sun ne aur padne main aati hai agar hum aurangzeb ki batain karen toh uske bare main buraiyan hi sun ne ko milti hai, agar jyada samay tak shashan karna hi mahanta hai toh akabar aur auargzeb ne lagbhag barabar hi shashan kiya hai toh is nazariye se aurazeb bhi mahan hua. aaj hum kitni bhi bahas kar len parantu us samay k itiskaro ne apne narazire se rajao ki tariff ya buraiyan ki thi, jisk k karan humra itihas clear nai ho pa raha aur har ek vishaye hi bahas ka mudda bana hua hai.

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