राजा बीरबल

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भारत गहलोत् के द्वारा राजा बीरबल (1528-1586) (असली नाम:महेश दास या महेश दास भट्ट) मुगल बादशाह अकबर के प्रशासन में मुगल दरबार का प्रमुख विज़ीर (वज़ीर-ए-आजम) था और अकबर के परिषद के नौ सलाहकारो में से एक सबसे विश्वस्त सदस्य था जो अकबर के नवरत्नो थे यह संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ नौ रत्नों है। अकबर के अलावा यह दुसरा व्यक्ति था, जिसने दीन- ए -इलाही धर्म माना था।

अकबर के दरबार में बीरबल का ज्यादातर कार्य सैन्य और प्रशासनिक थे तथा वह सम्राट का एक बहुत ही करीबी दोस्त भी था, सम्राट अक्सर बुद्धि और ज्ञान के लिए बीरबल की सराहना करते थे। ये कई अन्य कहानियो, लोककथाओं और कथाओ की एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा बन गए हैं।

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