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तेनाली रामा

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तेनाली रामा
आँध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के तेनाली नगर में तेनाली रामकृष्ण की मूर्ति
जन्मगरलपति रामाकृष्णा
१६वीं शताब्दी
गरालपाडू, गुंटूर आंध्र प्रदेश, भारत
निधन१६वीं शताब्दी
तेनाली, आंध्र प्रदेश
पेशाराजा कृष्णदेव राय के मुख्य विदूषक, कवि

तेनाली रामाकृष्णा (तेलुगु: తెనాలి రామకృష్ణ) (Tenali Raman / Tenali Ramakrishna) दक्षिण भारत के प्रसिद्ध कवि, विद्वान और हास्य–बुद्धिजीवी थे। वे विजयनगर साम्राज्य के महान सम्राट कृष्णदेव राय के दरबार के अष्टदिग्गजों (आठ प्रमुख विद्वानों) में से एक थे।

संक्षिप्त परिचय

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  • पूरा नाम: तेनाली रामकृष्ण
  • जन्म: लगभग 1480 ई.
  • जन्म स्थान: तेनाली (आंध्र प्रदेश)
  • भाषाएँ: तेलुगु, संस्कृत, तमिल
  • काल: विजयनगर साम्राज्य
  • राजा: कृष्णदेव राय

विशेषताएँ

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  • असाधारण बुद्धि, हास्य और तर्कशक्ति
  • कठिन से कठिन समस्या को चुटीले उत्तर से हल करने की कला
  • सामान्य जनता और राजा—दोनों में अत्यंत लोकप्रिय

साहित्यिक योगदान

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  • प्रसिद्ध काव्य: “पांडुरंग महात्म्यम्”
  • तेलुगु साहित्य को नई ऊँचाइयाँ दीं
  • धार्मिक, दार्शनिक और सामाजिक विषयों पर लेखन

लोककथाओं में तेनाली

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आज तेनाली रामकृष्ण को मुख्यतः उनकी बुद्धिमत्ता से भरी कहानियों के लिए जाना जाता है, जैसे:

  • मंत्री को चतुराई से सबक सिखाना
  • लालची लोगों को हास्य से बेनकाब करना
  • राजा की परीक्षा में हमेशा खरे उतरना

तेनाली रामकृष्ण भारतीय लोकपरंपरा में बुद्धि, विनोद और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं—कुछ-कुछ उत्तर भारत के बीरबल की तरह।

प्रारंभिक जीवन

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तेनाली रामालिंगाचार्युलु का जन्म १६वीं सदी के प्रारंभ में थुमुलुरु नामक गाँव में एक तेलुगु भट्ट ब्राह्मण परिवार में हुआ था । हालांकि लोकप्रिय धारणानुसार उनका जन्म तेनाली में हुआ था। उनका जन्म नाम गरालपति रामाकृष्णा शर्मा था। उनके पिता गरालपति रामैया तेनाली नगर के रामलिंगेस्वर स्वामी मंदिर में पुरोहित थे। रामैया का निधन रामकृष्ण के बाल्यकाल में ही हो गया था, जिसके पश्चात उनकी माता लक्षम्मा तेनाली नगर लौट कर अपने भाई के साथ रहने लगीं। रामाकृष्णा अपने मामा के नगर में ही बड़े हुये और रामाकृष्णा के नाम से जाने जाने लगे। तेनालीरामा ने बाल्यकाल में कोई औपरचारिक शिक्षा नहीं पाई, परंतु ज्ञान की क्षुधा के कारण वे बाद में प्रकांड विद्वान बनें। एक सुपरिचित लोक कथा के अनुसार शैव होने के नाते तेनालीरामा को वैष्णव विद्वान अपना शिष्य बनाने से इंकार करते रहे। एक बार जब वे मारे मारे फिर रहे थे तब एक मुनि ने उन्हें माँ काली की साधना करने का सुझाव दिया। तेनालीरामा की भक्ति से प्रसन्न हो काली ने उन्हें दर्शन दिये और रामा को दो कटोरे दिए पहले कटोरे में दही था जो धन के लिए था व दूसरे में दूध था जो बुद्भीमता के लिये था। देवी ने रामा को कहा के कोई एक कटोरा लेले तो रामा ने दोनो ही ले लिये जिससे रामा महा-धनवान व महा-बुद्धिमान बना गया।

तेनाली रामाकृष्णा ने हिन्दू धर्म पर रचनायें की हैं। कहा जाता है कि वे मूल रूप से शैव थे और रामलिंग के नाम से जाने जाते थे पर बाद में उन्होंने वैष्णव धर्म अपना कर अपना नाम रामकृष्ण रख लिया।

लोकप्रिय कथाओं में

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इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. "Tenali रामा (TV Series) (1990) - Hindi Serial". fridaycinemas.com. मूल से से 20 जुलाई 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 27 जुलाई 2017.
  2. The Hindu Online | Adventures of Tenali रामा Archived 2011-07-31 at the वेबैक मशीन Article dated June 20, 2003 by Savitha Gautam, accessed on October 20, 2008