योगेन्द्र नारायण

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योगेन्द्र नारायण (जन्म: 26 जून 1942, इलाहाबाद) 1965 बैच के एक भारतीय आई॰ए॰एस॰ अधिकारी हैं जो अपनी ईमानदार छवि और वक़्त की पाबन्दी के लिये जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में मुख्य सचिव, केन्द्र सरकार में रक्षा सचिव और राज्य सभा में महासचिव रह चुके योगेन्द्र नारायण इस समय रिलाइंस पावर इण्डस्ट्रीज़ की ऑडिट कमेटी के सदस्य हैं। उन्होंने अंग्रेजी में कई पुस्तकें भी लिखी हैं।

राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ लम्बे प्रशासनिक अनुभव के मद्देनज़र योगेन्द्र नारायण विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक मुद्दों पर अपनी बेवाक राय व्यक्त करते रहते हैं।

42 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहने के उपरान्त अवकाश प्राप्त कर वे आजकल अपने परिवार के साथ नोएडा में रह रहे हैं।

संक्षिप्त परिचय[संपादित करें]

26 जून 1942 को इलाहाबाद में जन्मे योगेन्द्र नारायण ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से फिजिक्स कैमिस्टी मैथमैटिक्स में बी॰एससी॰ व राजनीति विज्ञान में फर्स्ट क्लास फर्स्ट एम॰ए॰[1] करने के उपरान्त भारतीय प्रशासनिक सेवा को अपने कैरियर का माध्यम चुना। उन्होंने पूरी ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे प्रमुख राज्य में विभिन्न पदों पर काम किया। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रेटर नोएडा जैसे महत्वपूर्ण शहर को बसाने का दायित्व सौंपा। इसके बाद वे प्रदेश के मुख्य सचिव बनाये गये।[2]

भारत सरकार के भूतल परिवहन मन्त्रालय में सचिव के रूप में अपनी उल्लेखनीय सेवायें देने के उपरान्त उन्हें नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इण्डिया के संस्थापक अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया।[2] यू॰पी॰ कैडर से 1965 बैच के आई॰ए॰एस॰ अधिकारी योगेन्द्र नारायण को अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी सरकार में पहले रक्षा सचिव और उसके बाद राज्यसभा का महासचिव बनाया।[3]

सरकारी सेवा में रहते हुए भी योगेन्द्र नारायण ने अध्ययन का क्रम जारी रखा और डेवलपमेण्ट इकोनॉमिक्स में डिप्लोमा के साथ-साथ एम॰फिल॰ और पीएच॰डी॰ की उपाधियाँ भी अर्जित कीं।[2]

देश की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निर्माण प्रतिष्ठान रिलाइंस पॉवर इण्डस्ट्रीज़ ने 31 मार्च 2010 को उन्हें अपनी कम्पनी की ऑडिट कमेटी का सदस्य नियुक्त किया। यह दायित्व भी उन्होंने इस शर्त पर स्वीकार किया कि वे कम्पनी का एक भी शेयर नहीं खरीदेंगे।[2]

चाहे वह दल-बदल निषेध कानून का मुद्दा[4] हो या प्रशिक्षु आई॰ए॰एस॰ दुर्गा शक्ति नागपाल के निलम्बन का मामला[5] अथवा लोकसभा कर्मचारियों के वेतन का मसला,[6] योगेन्द्र नारायण ने अपनी बेवाक राय व्यक्त करने में कभी कोई संकोच नहीं किया।

प्रकाशित पुस्तकें[संपादित करें]

योगेन्द्र नारायण की स्वयं की लिखी और उनके द्वारा सम्पादित निम्न पुस्तकें है:[1]

  • एबीसी ऑफ पब्लिक रिलेशन्स फॉर सिविल सर्वेण्ट्स (अंग्रेजी में)
  • सागा ऑफ सिविल सर्विसेज़ (अंग्रेजी में)
  • क्लाउड्स एण्ड अदर पोयम्स (अंग्रेजी में)
  • राज्य सभा एट वर्क (सम्पादित/अंग्रेजी में)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. डॉ॰योगेन्द्र नारायण, प्रेसीडेण्ट, आईजीएसआई Archived 2013-10-15 at the Wayback Machine, अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014
  2. Reliance Power Dr. Yogendra Narain Archived 2013-06-24 at the Wayback Machine, अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014
  3. Yogendra Narain new Defence Secy Archived 2012-10-25 at the Wayback Machine - द ट्रिब्यून (अंग्रेजी) 10 अक्टूबर 2000, चण्डीगढ, अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014
  4. दल-बदल निषेध कानून अर्थहीन : योगेन्द्र नारायण Archived 2014-02-22 at the Wayback Machine - उदय इण्डिया (भारतीयता का शंखनाद), अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014
  5. क्या ऐसे बढ़ेगा ब्यूरोक्रेसी का मॉरल? Archived 2014-02-24 at the Wayback Machine - 6 अगस्त 2013, नवभारत टाइम्स, नरेन्द्र नाथ, नई दिल्ली, अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014
  6. Member of Parliaments salary issue views of Dr Yogendra Narayan - यू ट्यूब पर डॉ॰योगेन्द्र नारायण के विचार, अभिगमन तिथि: 13 फरबरी 2014

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]