यमदूत

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मृृत्यु के बाद स्थूल शरीर यही रह जाता है। आत्मा यमलोक या अन्य लोकों में चली जाती है।[1] यमलोक ले जाने के लिए यमदूत होते हैं, जिनकी संख्या चार बताई है।[2]

प्राचीन साहित्य[संपादित करें]

गरुड़ पुराण,विष्णु पुराण,कठोपनिषद व अन्य ग्रंथों में यमलोक,यमराज, व यमदूतों का वर्णन आता है। यमलोक को यमपुरी भी कहते हैं। इसमें यमराज मुख्य होता है।उसी के आदेश से यमदूत आत्मा को लेकर जाते हैं। कुछ के अनुसार मरते समय शरीर जड़ सा हो जाता है। सभी इन्द्रियाँ काम करना बंद कर देती है।[3] मरते समय अगर गंगाजल,तुलसी का पौधा, श्रीमद्भागवत गीता व रामायण पास में हो तो यमदूत उसे नरक नही ले जाते।[4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

यमराज

संदर्भ[संपादित करें]

  1. गरुड़ पुराण, गीता प्रेस गोरखपुर
  2. https://www.navhindu.com/marne-ke-baad-yamdoot-kaise-le-jaate-hain/
  3. https://www.bhaskar.com/news/jm-jkr-dgra-garud-puran-how-are-yamdoot-capturing-the-soul-after-death-5322298-pho.html
  4. https://m.patrika.com/bhopal-news/tips-for-long-and-better-life-in-india-1-3570505/