सूक्ष्म शरीर

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सुक्ष्म शरीर (subtle body) का अर्थ जन्तुओं के शरीर के विभिन्न मनो-आध्यात्मिक अवयवों की शृंखला से है। अस्तित्व के प्रत्येक स्तर के संगत एक सूक्ष्म शरीर होता है। भगवत्गीता के अनुसार सूक्ष्म शरीर के तीन भाग होते हैं- मन, बुद्धि और अहंकार। सूक्ष्म शरीर, स्थूल शरीर का नियंत्रण करता है।

जब हम सो जाते हैं तो हमारा सूक्ष्म शरीर सक्रिय हो जाता है। यह शरीर ही स्वप्न देखता है और यही शरीर जागृत अवस्था में कल्पना करने की शमता रखता है। इसी से हमारे मन और बुद्धि जुड़ी हुई है; जिसका केंद्र है हमारे स्थूल मस्तिष्क के बीच स्थित पीनियल ग्रंथि। नाभि में उर्जा का मुख्‍य केंद्र होता है जबकि मस्तिष्क में चेतना का। [1]

भौतिक शरीर को तो हम सब देखते हैं। हमने यह भी सुना है कि एक सूक्ष्म शरीर भी होता है। लेकिन क्या हम उसे देख सकते हैं? अगर हां, तो कैसे? [2]

आत्‍मा का तत्‍व एक है। उस आत्‍मा के तत्‍व के संबंध में आकर दो तरह के शरीर सक्रिय होते है। एक सूक्ष्‍म शरीर, और एक स्‍थूल शरीर। स्‍थूल शरीर से हम परिचित है, सूक्ष्‍म से योगी परिचित होता है। और योग के भी जो ऊपर उठ जाते हैं, वे उससे परिचित होते है जो आत्‍मा है। सामान्‍य आंखें देख पाती है इस शरीर को। योग-दृष्‍टि, ध्‍यान देख पाता है सूक्ष्‍म शरीर को। लेकिन ध्‍यानातीत, योग के आगे, सूक्ष्‍म के भी पार, उसके भी आगे जो शेष रह जाता है, उसका तो समाधि में अनुभव होता है। ध्‍यान से भी जब व्‍यक्‍ति ऊपर उठ जाता है तो समाधि फलित होती है। और उस समाधि में जो अनुभव होता है, वह परमात्‍मा का अनुभव है। [3]

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संदर्भ[संपादित करें]