म्लेच्छ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

म्लेच्छ प्राचीन भारत में दूसरे देशों से आये हुए लोगों को कहते थे जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र से इतर थे। शुक्रनीतिसार में शुक्राचार्य का कथन है-

त्यक्तस्वधर्माचरणा निर्घृणा: परपीडका: ।
चण्डाश्चहिंसका नित्यं म्लेच्छास्ते ह्यविवेकिन: ॥ ४४ ॥
(अर्थ : जो अपने धर्म का आचरण करना छोड़ दिया हो, निर्घृण हैं, दूसरों को कष्त पहुँचाते हैं, क्रोध करते हैं, नित्य हिंसा करते हैं, अविवेकी हैं - वे म्लेच्छ हैं।)

सन्दर्भ[संपादित करें]