म्लेच्छ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

{Sanskrit Dictionary | date=मई 2020}} म्लेच्छ जिसका आचरण अच्छा न हो अर्थात अनार्य, शुक्रनीतिसार में शुक्राचार्य का कथन है-

त्यक्तस्वधर्माचरणा निर्घृणा: परपीडका: ।
चण्डाश्चहिंसका नित्यं म्लेच्छास्ते ह्यविवेकिन: ॥ ४४ ॥
(अर्थ : जो अपने धर्म का आचरण करना छोड़ दिया हो, निर्घृण हैं, दूसरों को कष्त पहुँचाते हैं, क्रोध करते हैं, नित्य हिंसा करते हैं, अविवेकी हैं - वे म्लेच्छ हैं।)

सन्दर्भ[संपादित करें]