माहिया

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माहिया पंजाबी का अत्यन्त लोक प्रचलित शृंगार रस तथा करुण रस से ओतप्रोत लोकगीत है।[1] माहिया में शृंगार के विरह-पक्ष की बहुत मार्मिक अनुभूति होती है। माहिया मात्रिक छन्द है। इसमें पूरा गीत तीन पंक्तियों में होता है। पहली पंक्ति में १२ मात्राएँ, दूसरी पंक्ति में १० और पुनः तीसरी पंक्ति में १२ मात्राएँ होती हैं।


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी साहित्य कोश, भाग-१. वाराणसी: ज्ञानमण्डल लिमिटेड. १९८५. पृ॰ ५००.