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महाबृहदांत्र

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महाबृहदांत्र
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
आईसीडी-१० K59.3
आईसीडी- 564.7
रोग डाटाबेस 32198
ई-मेडिसिन med/1417 
एमईएसएच D008531

महाबृहदांत्र (मेगाकोलोंन) - बृहदान्त्र (बड़ी आँत का एक हिस्से) का असामान्य फैलाव है।[1] अक्सर, फैलाव के साथ आंत्र के क्रमिक वृत्तों में सिकुड़नेवाले (क्रम-संकोचिक) लेहेरों का पक्षाघात भी होता है। अधिक चरम मामलों में, मल बृहदान्त्र के अंदर, कठोर पुंज की तरह जम जाता है, जिस को 'फेकलओमा' कहा जाता है (शाब्दिक रूप से, मल का ट्यूमर या गाँठ). इस को हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है।

मानव बृहदान्त्र को असामान्य रूप से बढ़े हुए माना जाता है, अगर उसका व्यास १२ से.मी. से अधिक रहे अंधात्र में, (जब इस का सामान्य रूप से ९ से.मी. से कम होता है[2]); अगर उसका व्यास ६.५ से.मी. से अधिक रहे रेक्टोसिग्मॉइड[3] क्षेत्र में और अधिक से अधिक ८ से .मी.[3] आरोही बृहदांत्र के लिए। आमतौर, अनुप्रस्थ बृहदांत्र के व्यास ६ से.मी. से कम होता है।[2]

महाबृहदांत्र चिरकारी या तीव्र हो सकता है। यह रोग हेतु-विज्ञान कारण के अनुसार से भी वर्गीकृत किया जा सकता है।[4]

संकेत व लक्षण

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बाहरी संकेत और लक्षण यह है - कब्ज की बहुत लंबी अवधि, पेट की सूजन, उदरीय कोमलता और उस पर खोखला गूंज, पेट दर्द, परिस्‍पर्शन पर मल के कड़क पुंज; और विषाक्त मेगाकॉलोन में बुखार,, निम्न रक्त पोटेशियम, तीव्र हृदय स्‍पंदन और सदमा . चिरकारी महाबृहदांत्र में स्टरकोरल अल्सर कभी कभी देखा जाता है; जिस से 3% में आंत्रिक दीवार का वेधन हो सकता है - जिस से पूतिता और मौत के जोखिम हो सकता है।

  • जन्मजात या अगंगलिओनिक महाबृहदांत्र
  • दवाएं के वजह से
  • उपार्जित महाबृहदांत्र, जिनमें से कई संभव रोगोत्‍पत्‍ति कारक विज्ञान हो सकते हैं:
    • अज्ञातहेतुक महाबृहदांत्र
    • विषाक्त महाबृहदांत्र
    • गौण संक्रमणसे महाबृहदांत्र
    • अन्य स्नायु-विज्ञान, प्रणालीगत और चयापचय रोगों के कारण

अगंगलिओनिक महाबृहदांत्र

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इस को हिर्स्चस्प्रुंग बीमारी भी कहा जाता है। यह बृहदान्त्र का एक जन्मजात विकार है, जिस में बृहदान्त्र के दीवारों के औएरबच पलेक्सस के म्योएंतेरिक तंत्रिका कोशिका (जिस को हम कंडरापुटी कोशिका भी कहते हैं) अनुपस्थित हैं। यह एक दुर्लभ (१:५,०००) विकार है। यह पुरुषों में - महिलाओं से - ४ गुना ज्यादा पाया जाता है। हिर्स्चस्प्रुंग रोग, गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर के दौरान, भ्रूण में विकसित होता है। सही आनुवंशिक कारण अनसुलझी बनी हुई है; हालांकि, पारिवारिक मामलों में (जिसमें परिवारों में कई रोगियों प्रभावित होते है), यह ओटोसोमल प्रभावी (दोमिनंट) संचरण के रूप में देखा जाता है, जिस में एक आर.ई.टी. नमक जीन - जो गुणसूत्र, १० में होता है - अपना प्रधानता दिखाई देता है। हालांकि, सात अन्य जीन भी इस में शामिल होने का सम्भावना है। यदि अनुपचारित, रोगी (एन्तेरोकोलितीस) आंत्रशोथ से विकसित हो सकते हैं।

महाबृहदांत्र, रिसपैरइदोन - एक सायकोटिक-विरोधी दवा - के परिणाम से हो सकता हैं।[5]

=== विषाक्त महाबृहदांत्र

===

विषाक्त महाबृहदांत्र मुख्य रूप से सव्रण बृहदांत्रशोथ (/0) और स्यूडोमेंबरेनस बृहदांत्रशोथ, में देखा जाता है; यह दो बृहदान्त्र के जीर्ण सूजन है।

इसके तंत्र अभी तक पूरे तरह से नहीं समझा ग्गाया है। इस का एक कारण नाइट्रिक ऑक्साइड के अत्यधिक उत्पादन हो सकता है; कम से कम, सव्रण बृहदांत्रशोथ में. व्याप्ति दोनों लिंगों के लिए एक ही समान है।

चागस रोग

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महाबृहदांत्र, चागस रोग के साथ जुड़ा हो सकता है।[6]

मध्य और दक्षिण अमेरिका में महाबृहदांत्र के आम घटनाओं, चागस रोग से 20% प्रभावित रोगियों में देखा जाता है। चागस ट्रायपैनोसोमा क्रुज़ि से होता है। यह कशाभी प्रोटोजोआ, (एककोशी जीव) है जो हत्यारा बग नाम का एक 'हेमातोफगोउस' कीट के मल द्वारा प्रेषित होता है। चागस जन्म से हासिल हो सकता हैं - रक्त आधान या अंग प्रत्यारोप से और कभी संपर्क प्रभावित भोजन के माध्यम से (उदाहरण के लिए, गरापा. चागस रोग में महाबृहदांत्र और महाविस्फारित ग्रासनली कैसे विकसित होते हैं, इस पैर कई सिद्धांत हैं। ऑस्ट्रियन-ब्राजीलयन चिकित्सक और रोगविज्ञानी फ्रिट्ज कोबीएरले पहले व्यक्ति थे, जो एक सुसंगत परिकल्पना पेश किया ता - चागस रोगियों की आंतों की दीवारों में आउएर्बच प्लेक्सुस के विनाश के दस्तावेज पर आधारित. इसे तंत्रिकाजनक परिकल्पना परिकल्पना बोला जाता है। इस स्तिथि में, बृहदान्त्र के औतोनोमिक तंत्रिका प्रणाली के विनाश से दीवार के सामान्य चिकनी कोमल पेशियों का उच्चारण खो जाता है और फैलाव हो जाता है।

उसके शोध साबित कर दिया कि, स्वायत्त तंत्रिका प्रणाली में औएरबच प्लेक्सुस में, बड़े पैमाने पर न्यूरॉन्स की संख्या परिमाणित से, कि: १) वे दृढ़ता से पाचन पथ भर में कम हो गई थी, २) जब ८०% से अधिक न्यूरॉन्स की कटौती की जाती है, तब महाबृहदांत्र देखा जाता है ३) न्यूरॉन्स के पैरिस्टैल्सिस पर नियंत्रण की विघटन और 4) अज्ञातहेतुक महाबृहदांत्र और चागस महाबृहदांत्र रोग हेतु-विज्ञान में एक ही है, अर्थात् औएरबच मयोएन्तेरिक प्लेक्सुस का व्यपजनित होना.

तथापि, क्रुज़ी टी. यह विनाश क्यों करता है, इस का कोई स्पष्ट कारण नहीं है: विशेष न्यूरोटॉक्सिन और अव्यवस्थित प्रतिरक्षा प्रणाली. की उपस्थिति होने का सबूत पाया गया है।

रोग की पहचान

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निदान मुख्य रूप से सादे और प्रतिकूल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड इमेजिंग द्वारा किया जाता है। बृहदान्त्र जड़ता और कार्यात्मक निकास रुकावट के भेद करने के लिए बृहदान्त्र मार्कर पारगमन के अध्ययन उपयोगी होते हैं। इस परीक्षण में, रोगी जल-घुलनशील, एक रेडियो अपारदर्शी प्रतिकूल माध्यम निगल लेता है और १, ३ और ५ दिन बाद, एक्स-रे फिल्म लिए जाते हैं। बृहदान्त्र जड़त्व के मरीजों में मर्कर बड़ी आंतों भर में फैला हुआ दिखाए दिया जाता है, जबकि कार्यात्मक निकास रुकावट के मरीजों में कुछ स्थानों में मार्करों की धीमी राशि के साथ संचयीकरण दिखाए देते हैं।. यांत्रिक रुकावट कारणों है कि नहीं वो देखने के लिए बृहदांत्रदर्शन (कोलोनोस्कोपी) इस्तेमाल किया जा सकता है। एनोरेक्टल मनोमंत्री जन्मजात और अर्जित रूपों के विभेदन करने में मदद सकता है। गुदा बायोप्सी हिर्स्चस्प्रुंग रोग की एक अंतिम निदान करने के लिए सिफारिश की है।

संभव उपचार में शामिल हैं:

  • स्थिर मामलों में, रेचक और 'बुल्किंग एजेंटों' के उपयोग किया जा सकता है - और साथ में आहार और मल वाले आदतों में रूपांतरण भी प्रभावी है।
  • कार्टिकोस्टेराइड और अन्य शोथरोधी औषध विषाक्त मेगाकॉलोन में इस्तिमाल किया जाते हैं।
  • अंतर्घट्टित मल का निकालना. मलाशय-संबंधी और नासा-आमाशयी नलिका के साथ दाबरहित करना।
  • जब महाबृहदांत्र बिगड़ जाती है और रूढ़िवादी उपायों विफल रह जाते हैं, तब सर्जरी आवश्यक हो सकता है।

वहाँ रहे हैं कई बृहदांत्र उच्छेदन एक शल्य दृष्टिकोण के रूप में, जैसे महाबृहदांत्र के इलाज के लिए[7] (बृहदान्त्र पूरे हटाने का) खंडों के साथ मलाशय ileorectal(इलोरेक्टल) और आन्त्रावरोध सम्मिलन (आवेष्टन के शेष), या कुल बृहदान्त्र proctocolectomy के हटाने, (अवग्रह और मलाशय) शेषांत्र छिद्रीकरण के बाद सम्मिलन या ileoanal (इलेओनल) द्वारा पीछा किया।

इन्हें भी देखें

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  • दोलिचोकोलों

सन्दर्भ

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  1. megacolon at Dorland's Medical Dictionary
  2. 1 2 Horton KM, Corl FM, Fishman EK (2000). "CT evaluation of the colon: inflammatory disease". Radiographics. 20 (2): 399–418. पीएमआईडी 10715339. 26 जुलाई 2013 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 28 नवंबर 2010.{{cite journal}}: CS1 maint: multiple names: authors list (link)
  3. 1 2 उद्धरण त्रुटि: <ref> का गलत प्रयोग; emedicine नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।
  4. Porter NH (1961). "Megacolon: a physiological study". Proc. R. Soc. Med. 54: 1043–7. पीएमआईडी 14488085.
  5. Lim DK, Mahendran R (2002). "Risperidone and megacolon" (PDF). Singapore Med J. 43 (10): 530–2. पीएमआईडी 12587709. मूल से (PDF) से 16 फ़रवरी 2012 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 28 नवंबर 2010.
  6. Koeberle F (1963). "Enteromegaly and cardiomegaly in Chagas disease". Gut. 4: 399–405. डीओआई:10.1136/gut.4.4.399. पीएमसी 1413478. पीएमआईडी 14084752. मूल से से 15 दिसंबर 2019 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 28 नवंबर 2010.
  7. Stabile G, Kamm MA, Hawley PR, Lennard-Jones JE (1991). "Colectomy for idiopathic megarectum and megacolon". Gut. 32 (12): 1538–40. डीओआई:10.1136/gut.32.12.1538. पीएमसी 1379258. पीएमआईडी 1773963.{{cite journal}}: CS1 maint: multiple names: authors list (link)

बाहरी कड़ियाँ

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