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मच्छर

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मच्छर

मच्छर या मशक एक क्षतिकारक कीट है। यह संसार के प्रायः सभी भागो में पाया जाता है। यह विभिन्न प्रकार के रोंगो के जीवाणुओं को वहन करता है। मच्छर गड्ढ़े, तालाबों, नहरों तथा स्थिर जल के जलाशयों के निकट अंधेरी और नम जगहों पर रहता है। मच्छर एकलिंगी जन्तु हैं यानी नर और मादा मच्छर का शरीर भिन्न होते हैं। सिर्फ मादा मच्छर ही मनुष्य या अन्य जन्तुओं के रक्त चूषती है, जबकि नर मच्छर पेड़-पौधों का रस चूसते हैं।

मच्छर के जीवन चक्र में अण्डा, डिम्भक, प्यूपा और वयस्क चरण होते हैं। अण्डे जल के तल पर रखे जाते हैं; वे गतिशील डिम्भक में निकलते हैं जो जलीय शैवाल और जैविक सामग्री पर भोजन करते हैं। ये डिम्भक कई अलवणीय जलीय पशुओं के लिए महत्वपूर्ण खाद्य स्रोत हैं, जैसे कि व्याध पतंगों के अर्भकों, कई मछलियाँ, और कुछ पक्षी जैसे बत्तख।[1] अधिकांश प्रजातियों की वयस्क मादाओं में नली जैसे मुख के भाग होते हैं (जिन्हें शुण्ड कहा जाता है) जो एक अन्य पशुओं की त्वचा को छेद सकते हैं और रक्ताहार कर सकते हैं, जिसमें अण्डे का उत्पादन करने के लिए आवश्यक प्रोटीन और लौह होता है। मच्छरों की हज़ारों प्रजातियाँ विभिन्न यजमान ⁠— कशेरुकी प्राणी, जिनमें स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप, उभयचर, और कुछ मछलियाँ शामिल हैं; कुछ अकशेरुकीय के साथ, मुख्य रूप से अन्य सन्धिपाद

काटने के दौरान मच्छर की लार यजमान को स्थानान्तरित कर दी जाती है, और एक खुजलीदार दाने का कारण बन सकता है। इसके अलावा, कई प्रजातियाँ काटते समय रोगजनकों को निगल सकती हैं और उन्हें भविष्य के यजमानों तक पहुँच सकती हैं। इस प्रकार, मच्छर मलेरिया और फाइलेरिया जैसे परजीवी रोगों और पीतज्वर, चिकनगुनिया, पश्चिम नील विषाणु, डेंगू ज्वर और ज़िका विषाणु जैसे अर्बोवायरल रोगों के महत्वपूर्ण वाहक हैं। बीमारियाँ फैलाने के द्वारा, मच्छर किसी भी अन्य जानवर की तुलना में अधिक लोगों की मृत्यु का कारण बनते हैं।

मच्छरों के काटने से प्रेरित होकर पेनलेस इंजेक्शन की शोध

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ऑहियो स्टेट यूनिवर्सिटी एवं इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रोपड़ के शोधकर्ताओं देव गुरेरा, भारत भूषण एवं नवीन कुमार की सांझी खोज के अनुसार, मच्छर का भेदन दर्दरहित होता है क्यूंकि वह सर्वप्रथम त्वचा पर एक तरह से सुन्न करने वाले तरल का छिड़काव करता है ताकि नुकीले डंक से त्वचा को भेद सके जिसका उपयोग कई मिनट तक हमें बिना एहसास कराये हमारा खून चूसने में करता है। शोध में प्रमुख चार युक्तियों की पहचान की गई कि कैसे एक मच्छर शरीर को बिना दर्द के भेदता है - सुन्न करने वाले तरल सीरम का छिड़काव, एक नुकीली सुई; भेदी के दौरान कंपन एवं त्वचा पर मुलायम और कठिन भागों का संयोजन। इन्ही निष्कर्षों के आधार पर, अध्ययन पत्र में एक ऐसी सूक्ष्म सुई की तैयारियों पर विश्लेषण किया गया है जिसके अंदर दो सुइयों शामिल हैं। जहां एक का उपयोग सुन्न करने वाले तरल को छोड़ने को छोड़ने के लिए जबकि दूसरे का उपयोग महत्वपूर्ण तरल पदार्थ को इंजेक्ट करने या रक्त को दर्द रहित तरीके से निकालने के लिए किया जाएगा। सुई मच्छर भेदन के समान कंपन भी करेगी। [2] [3]

  1. "What Eats Mosquitoes?". Sciencing (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2023-03-09.
  2. Lesson from Mosquitoes’ Painless piercing Science Direct, Volume 84, August 2018, Pages 178-187 Archived 2018-07-13 at the वेबैक मशीन
  3. Doctoral Student Dev Gurera has found a way for painless vaccination Health&Fitness, June 2, 2018 Archived 2018-07-17 at the वेबैक मशीन