सामग्री पर जाएँ

भारतीय न्याय संहिता

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
भारतीय न्याय संहिता-2023
भारतीय संसद
यह विधेयक अपराधों से सम्बन्धित प्रावधानों को सुदृढ करेगा और उनमें संशोधन कएगा।
प्रादेशिक सीमा  भारत
द्वारा अधिनियमित भारतीय संसद
अधिनियमित करने की तिथि 11 अगस्त 2023
अनुमति-तिथि अभी पारित नहीं हुआ है
शुरूआत-तिथि पारित होना शेष है
द्वारा प्रशासित भारत सरकार
विधायी इतिहास
विधेयक (प्रस्तावित कानून) भारतीय न्याय संहिता विधेयक-2023
बिल प्रकाशन की तारीख 11 अगस्त 2023
द्वारा पेश गृह मंत्री
कानून निरस्त
भारतीय दण्ड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता,भारतीय साक्ष्य अधिनियम
सारांश
इस विधेयक के द्वारा भारतीय दण्ड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम को को निरस्त कर दिया जायेगा और इनके स्थान पर भारतीय न्याय संहिता-2023 आ जायेगा।
स्थिति : प्रचलित

भारतीय न्याय संहिता भारत में १ जुलाई २०24 से लागू एक नई न्याय संहिता है। यह एक व्यापक संहिता है जो भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर लायी गयी है।[1][2]

11 अगस्त 2023 को भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 पेश किया। यह विधेयक को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में एक महत्वपूर्ण और स्मरणीय सुधार माना जा रहा है। [3] [4] [5]

भारतीय न्याय संहिता विधेयक, 2023 के लागू होने से भारतीय न्याय प्रणाली में निम्नलिखित प्रमुख परिवर्तन हुए हैं-

  • इसके द्वारा राजद्रोह कानून को निरस्त हो गया।
  • इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के लिए विशेष प्रावधान हैं। संवेदनशील संभालन और त्वरित चिकित्सा परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
  • इससे अपराध पीड़ितों को न्याय मिलना आसान हो जायेगा।
  • यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सशक्त करेगा।
  • भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को पूर्ण रूप से हटाकर न केवल समलैंगिकता, बल्कि पुरुषों और महिलाओं के बीच सहमित या गैर-सहमति से हुए एनल और ओरल मैथुन, एवं अप्राकृतिक संभोग को भी वैध घोषित कर देगा।[6]
  • नए कानून में हिंदी शब्दों का समावेश, परिभाषाएँ आसानी से समझ सकते हैं।[7]
  • हिट एंड रन: भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 में हिट-एंड-रन मामलों में धारा 106(2) को रोक दिया गया है, जबकि आपराधिक कानून के अन्य प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।
  • रिमांड: नए कानूनों के तहत रिमांड का समय पहले की तरह 15 दिनों का ही रखा गया है।
  • भाषा: तीनों कानून संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी भाषाओं में उपलब्ध होंगे और केस भी उन्हीं भाषाओं में चलेंगे।
  • फॉरेंसिक जांच: नए कानूनों में 7 साल या उससे अधिक की सज़ा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है। इससे न्याय जल्दी मिलेगा और दोष-सिद्धि दर को 90% तक ले जाने में सहायक होगा।
  • प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR): किसी भी मामले में FIR दर्ज होने से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय मिल सकेगा।
  • ई-एफआईआर का प्रावधान: नागरिकों की सुविधा के लिए जीरो एफआईआर यानी ई-एफआईआर की शुरुआत भी की गयी है। इसके तहत अपराध कहीं भी हुआ हो लेकिन उसे अपने थाना क्षेत्र के बाहर भी रजिस्टर कराया जा सकता है। बाद में केस को 15 दिनों के अंदर संबंधित थाने को भेजना होगा। नए नियमों के अनुसार, पुलिस थाने में एक ऐसा पुलिस अधिकारी नामित किया जायेगा जो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के परिवार को केस के बारें में सूचना देगा।
  • त्वरित न्यायिक प्रक्रियाएँ: अदालती फैसले देने के लिए सख्त समय सीमाएँ। 45 दिनों के भीतर और आरोप लगाने के लिए 60 दिनों के भीतर समयबद्ध न्याय प्रदान किया जाएगा।[8]
  • तकनीकी प्रगति: ऑनलाइन पुलिस शिकायतें और इलेक्ट्रॉनिक समन सेवा। कागजी कार्य को कम करने और संचार को मजबूत करने का प्रयास।
  • प्रशिक्षण: नए कानूनों पर लगभग 22.5 लाख पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए 12000 मास्टर ट्रेनर्स के लक्ष्य से कहीं अधिक 23 हजार से ज्यादा मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षित।

भारतीय न्याय संहिता में २० अध्याय और ३५८ खण्ड (सेक्शन) हैं। इसकी संरचना भारतीय दण्ड संहिता के जैसी ही है। भारतीय न्याय संहिता की रूपरेखा इस प्रकार की है:[9][10]

भारतीय न्याय संहिता, 2023
अध्याय धाराएँ अपराधों का वर्गीकरण
अध्याय 1 धारा 1 से 3 प्रारंभिक
अध्याय 2 धारा 4 से 13 दण्डों के विषय में
अध्याय 3 धारा 14 से 44 सामान्य अपवाद

आत्म सुरक्षा के अधिकार के बारे में (खण्ड 34 से 44)

अध्याय 4 धारा 45 से 62 Of Abetment, Criminal Conspiracy and Attempt
अध्याय 5 धारा 63 से 97 Of Offences against Women and Children
  • Of Sexual Offences (63 to 72)
  • Of Criminal Force and Assault against Women (73 to 78)
  • Of Offences relating to Marriage (79 to 85)
  • Of the Causing of Miscarriage, etc. (86 to 97)
अध्याय 6 धारा 98 से 144 Of Offences Affecting the Human Body
  • Of Offences Affecting Life (98 to 111)
  • Of Hurt (112 to 125)
  • Of Criminal Force and Assault (126 to 134)
  • Of Kidnapping, Abduction, Slavery and Forced Labour (135 to 144)
अध्याय 7 धारा 145 से 156 Of Offences Against the State
अध्याय 8 धारा 157 से 166 Of Offences Relating to the Army, Navy and Air Force
अध्याय 9 धारा 167 से 175 Of Offences Relating to Elections
अध्याय 10 धारा 176 से 186 Of Offences Relating to Coins, Bank Notes, Currency Notes and Government Stamps
अध्याय 11 धारा 187 से 195 Of Offences Against the Public Tranquility
अध्याय 12 धारा 196 से 203 Of Offences by Or Relating to Public Servants
अध्याय 13 धारा 204 से 224 Of Contempt of Lawful Authority of Public Servants
अध्याय 14 धारा 225 से 267 Of False Evidence and Offences against Public Justice.
अध्याय 15 धारा 268 से 295 Of Offences affecting the Public Health, Safety, Convince, Decency and Morals
अध्याय 16 धारा 296 से 300 Of Offences Relating to Religion
अध्याय 17 धारा 301 से 332 Of Offences against Property
  • Of Theft (301 से 305)
  • Of Extortion (306)
  • Of Robbery and Dacoity (307 से 311)
  • Of Criminal Misappropriation of Property (312 and 313)
  • Of Criminal Breach of Trust (314)
  • Of the Receiving of Stolen Property (315)
  • Of Cheating (316 and 317)
  • Of Fundamental Deeds and Disposition of Property (318 से 321)
  • Of Mischief (322 से 326)
  • Of Criminal Trespass (326 से 332)
अध्याय 18 धारा 333 से 348 Of Offences Relating to Documents and to Property Marks
  • Of Documents (333 से 343)
  • Of Property Marks (344 से 348)
अध्याय 19 धारा 349 से 356 Of Criminal Intimidation, Insult, Annoyance, Defamation, Etc
  • Intimidation, Insult and Annoyance (349 से 353)
  • Of Defamation (354)
  • Of breach of contract to attend on and supply wants of the helpless person (355)
  • Repeal and Savings (356)

इन्हें भी देखें

[संपादित करें]

सन्दर्भ

[संपादित करें]
  1. भूल जाइए IPC, आज से भारतीय न्याय संहिता समेत तीन नए कानून लागू
  2. नयी आपराधिक संहिता में कौन सी धारा अब क्या?
  3. "Centre's 3 bills to revamp criminal laws: 'Aim to provide justice, not punish'". India Today.
  4. Ghosh, Sanchari (11 August 2023). "'Will repeal offence of sedition,' Amit Shah introduces 3 bills in Parliament". mint.
  5. "The 3 Bills That Will Soon Replace British-Era Criminal Laws. Their Aim Explained". NDTV.com.
  6. पोद्दार, उमंग (17 Aug 2023). "भारतीय न्याय संहिता पुरुषों, ट्रांसजेंडरों के ख़िलाफ़ रेप और मैरिटल रेप के मामलों को कैसे प्रभावित करेगी". BBC NEWS (Hindi भाषा में).{{cite news}}: CS1 maint: unrecognized language (link)
  7. नए कानून में हिंदी शब्दों का समावेश, आसानी से समझ सकते हैं परिभाषा
  8. अब 45 दिनों के भीतर फैसला!
  9. The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 Archived 11 अगस्त 2023 at the वेबैक मशीन, PSR India, 10 August 2023
  10. "The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023". 9 March 2024 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 9 March 2024.
  1. "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन नए अपराधिक विधेयक 2023 को दी स्वीकृति". Surag Bureau.

    8. President gives assent to Bharatiya Nyaya Sanhita, Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita and Bharatiya Sakshya Bill 2023 Law Monitor