राजा बीरबल

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राजा बीरबल
बीरबल
बीरबल
जन्ममहेश दास दूबे
1528
सीधी, मध्यप्रदेश, भारत
निधन1586, उम्र 58
स्वात घाटी, आज पाकिस्तान
जीवनसंगीउर्वशी देवी
संतानसौदामणि दूबे (पुत्री)
धर्महिन्दू धर्म, दीन ए इलाही
पेशाअकबर के साम्राज्य में दरबारी और सलाहकार

बीरबल (1528-1586) : असली नाम:महेश दास भट्ट था, मुगल बादशाह अकबर के प्रशासन में मुगल दरबार का प्रमुख वज़ीर (वज़ीर-ए-आजम) था और अकबर के परिषद के नौ सलाहकारों में से एक सबसे विश्वस्त सदस्य था जो अकबर के नवरत्नों थे यह संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ नौ रत्न है। उनका जन्म भट्टराव परिवार में हुआ था वह बचपन से ही तीव्र बुद्धि के थे। प्रारम्भ में ये पान का सौदा बेचते थे। जिसे सामान्यतः "पनवाड़ी" (पान बेचने वाला) कहा जाता है। बचपन में उनका नाम महेश दास था। उनकी बुद्धिमानी के हजारों किस्से हैं जो बच्चों को सुनाए जाते हैं। माना जाता है कि 1586 मे अफगानिस्तान के युद्ध के अभियान में एक बड़ी सैन्य मंडली के नेतृत्व के दौरान बीरबल की मृत्यु हो गयी।

बचपन[संपादित करें]

इनके बचपन का नाम महेश दास था। बचपन से ही वो बहुत ही चतुर एवं बुद्धिमान थे। बीरबल ब्राह्मण थे। उनके जन्म के विषय मे मतभिन्नता है। कुछ विद्वान उन्हें आगरा के निवासी, कोई कानपुर के घाटमपुर तहसील के, कोई दिल्ली के निवासी और कोई मध्य प्रदेश के सीधी जिले का निवासी बताते हैं। पर ज्यादातर विद्वान मध्य प्रदेश के सीधी जिले के घोघरा गाँव को ही बीरबल का जन्मस्थान स्वीकार करते हैं |jdogfuhtugrj yeyhdyfrug rucdugrnrudc yffgv tydtgxvc5rrh 65rfvyyfffusivxxbekbxekbxekbxeihxekhxeohxeihxdoxhdohx... ...(1) ....(2) ...(3) ....(4) Gdiexbeixbeidbeohdeodysbrcbirbribiedbkebdl3xoejorhxrohexiieiexe

अकबर से मिलन[संपादित करें]

अकबर से मिलन संबंधी अनेक कथाएं प्रचलित है। सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार बादशाह अकबर ने अपने एक पान का बीड़ा लगाने वाले नौकर को एक "पाओभर" (आज का लगभग 250 ग्राम) चूना लेकर आने को कहा। नौकर किले के बाहर दुकान करने वाले पनवाड़ी से पाओभर चूना लेने गया। इतना सारा चूना ले जाते देख पनवाड़ी को कुछ शक होता है। इसलिए बीरबल नौकर से पूरा घटनाक्रम जानता है, और कहता है कि बादशाह यह चूना तुझको ही खिलवायेगा। तेरे पान में लगे ज्यादा चूने से बादशाह की जीभ कट गई है, इसलिए यह सब चूना तुझे ही खाना पड़ेगा। इसलिए इतना ही घी भी ले जा, जब बादशाह चूना खाने को कहे तो चूना खाने के बाद घी पी लेना। नौकर दरबार मे चूना लेकर जाता है, और बादशाह नौकर को वह सारा पाओभर (250ग्राम) चूना खाने का आदेश देता है। नौकर वह सारा चूना खा लेता है, लेकिन उस पनवाड़ी बीरबल की सलाह के अनुसार घी भी पी लेता है। अगले दिन जब बादशाह का वह नौकर पुनः जब राज दरबार पहुचता है, तो अकबर उसे जीवित देख आश्चर्य से उसके जीवित बचने का कारण जानता है। नौकर सारी बात बादशाह को बताता है, कि कैसे किले के बाहर के पनवाड़ी की समझ-बूझ से वह बच सका। बादशाह उस पनवाड़ी की बुद्धिमत्ता से प्रभावित हो उसे दरबार मे बुलवाते है। इस प्रकार बादशाह अकबर और बीरबल का पहली बार आमना सामना होता है। और अकबर ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति को अपने दरबार मे स्थान देते हैं।

अकबर के दरबार में[संपादित करें]

अकबर के दरबार में अकबर ने इन्हें "वीर वर" का खिताब दिया, चलते चलते वह बीरबल होगया।

राजा बीरबल को कई बार बादशाह अकबर दरबार में ऐसे सवाल पूछ लिया करते थे जिनका जवाब देना बहुत कठिन हो जाता था परंतु राजा बीरबल अपनी बुद्धिमानी से प्रसिद्ध थे इस कारण वह सभी प्रश्नों का उत्तर आसानी से दे देते थे। अकबर के दरबार में बीरबल का ज्यादातर कार्य सैन्य और प्रशासनिक थे तथा वह सम्राट का एक बहुत ही करीबी दोस्त भी था, सम्राट अक्सर बुद्धि और ज्ञान के लिए बीरबल की सराहना करते थे। ये कई अन्य कहानियो, लोककथाओं और कथाओ की एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा बन गए हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]