बिन्दकी

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बिन्दकी
क़स्बा
देशFlag of India.svg भारत
राज्यउत्तर प्रदेश
ज़िलाफतेहपुर
जनसंख्या (2001)
 • कुल34,197
भाषायें
 • आधिकारिकहिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड212635

बिन्दकी नगर मुगल मार्ग में फतेहपुर जिला मुख्यालय से २६ किमी॰ दूर स्थित है एवं तहसील मुख्यालय है। यह एक नगरपालिका स्तर का नगर है। बिन्दकी की जनसँख्या लगभग ३०,००० है। बिन्दकी प्रमुख तौर पर पीतल के बर्तनोँ तथा खेती की मशीनरी के निर्माण के लिये प्रसिद्ध है। यहीं पर राष्ट्र कवि पंडित सोहन लाल दवेदी जी का जन्म हुआ था। इसी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत डीघ आती है यहीं पर वीर रस के कवि डुलारे सिंह’वीर’ जी का जन्म स्थल है।आप पेशे से अध्यापक थे , आपके पढ़ाए हुवे अनेकों शिष्यों ने देश में ऊँचे ओहदो पर अपनी सेवायें प्रदान कर चुके हैं। आप के ही शिष्य थे श्री आर डी सोनकर जी जिन्होंने आप के समाधि स्थल में आकर गुरु और शिष्य के महात्म्य को क्षेत्र वासियों को समझाया था। इसी ग्राम सभा का मजरा है ईशापुर यहीं पर प्रख्यात कवि , लेखक, पत्रकार श्री सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’जी का जन्म(३०-०४-१९७८) को एक सम्पन्न पटेल परिवार में हुआ। आपके पिता स्मृति शेष डॉक्टर सत्यप्रकाश सिंह जी व स्मृति शेष माता जी श्रीमती बृजरानी पटेल जी प्रख्यात समाज सेवी थे। जिनका प्रयास सदैव राष्ट्र व समाज के उत्थान को था। इस पिछड़े क्षेत्र में आपने एक उत्कृष्ट विद्यालय ( बृजरानी पटेल विद्यापीठ)की नींव रखी जो समरसता मय जीवन बिताने व राष्ट्र को सशक्त बनाने का निरंतर संदेश देते हुए छात्रों के चहमुखी विकास को कर पाने की राह में निरंतर अग्रसर है।

 तहसील बिंदकी मुख्यालय से ईशापुर की दूरी सड़क मार्ग से १३ किलोमीटर की है।

यहाँ पहुँचने के कई मार्ग हैं किंतु ललौली मार्ग बाँदा रोड में भवानीपुर के पास से डीघ सम्पर्क मार्ग से गुलाबपुर , घेरवा , डीघ होते हुए आसानी से पहुँचा जा सकता है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य व पशु- पक्षी शांति व आनंद प्रदान कर पाने में सक्षम है। इसी तहसील के ग्राम बईला का पुरवा मजरे गोधरौली के ग्रामीणों का स्वतंत्रता आन्दोलन में बड़ा योगदान रहा। अंग्रेजी हुकूमत से करीब 17 पटेल मुखियों ने मुखालफत की 1942 में अंगेज भारत छोड़ो आन्दोलन के समय इस गांव के लोग भी आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। एक रात जब ब्रिटिश पुलिस आंदोलनकारियों को पकड़ने गयी तो राम प्रसाद पटेल ने अपने भाईयों के साथ मिलकर एक सिपाही को पकड़ लिया और फिर जमकर पिटाई कर दी। अपने साथी सिपाही को पिटते देख अन्य सिपाही अपनी जान बचाकर भाग खड़े हुए। अगली देर रात को जब सभी लोग सो रहे थे तो एक सैंकड़ा ब्रिटिश सैनिकों ने गांव को घेर लिया और हर घर की तलाशी लेकर करीब 17 परिवार के मुखियों को गिरफ्तार कर थाने में बंद कर यातनायें दी। क्रांतिकारी राम प्रसाद पटेल के तीन पुत्र श्यामलाल पटेल, शिवलाल पटेल और शिव प्रसाद पटेल हुए शिवलाल पटेल के चार पुत्र अशोक कुमार पटेल जो पुलिस अधीक्षक बन कर परिवार व गांव का नाम रोशन किया,दूसरे पुत्र सोहनलाल पटेल ने 24 वर्ष भारतीय सेना की सेवा कर देश की सीमाओं की रक्षा में अपना अमूल्य योगदान दिया तीसरे पुत्र देवेन्द्र पटेल ने पत्रकारिता में परस्नातक कर अपनी कलम से समाज को न्याय और हक दिलाने का भागीरथ कर रहे है।वही चौथे पुत्र सुरेन्द्र पटेल अन्नदाता बन कर कृषि प्रधान देश में समाज की सेवा कर रहे हें। एक पुत्री अनीता पटेल जिनका उन्नाव जिले महरामऊ गांव में ससुराल है।