बायो-सेवर्ट का नियम

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लगने वाले स्थिरविद्युत बल के बारे में एक नियम है जिसे कूलम्ब नामक फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने १७८० के दशक में प्रतिपादित किया था। यह नियम विद्युतचुम्बकत्व के सिद्धान्त के विकास के लिये आधार का काम किया। यह नियम अदिश रूप में या सदिश रूप में व्यक्त किया जा सकता है। अदिश रूप में यह नियम निम्नलिखित रूप में है-

दो बिन्दु आवेशों के बीच लगने वाला स्थिरविद्युत बल का मान उन दोनों आवेशों के गुणनफल के समानुपाती होता है तथा उन आवेशों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

        F α Qq   

तथा

        F α 1/r2 

अब

        F= kQq/r2 
              (जहां k एक नियतांक है)

परिचय[संपादित करें]

Biot Savart.svg

इस नियम का उपयोग स्थिर विद्युत धारा (परिवर्तनशील धारा नहीं) द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की गणना करने के काम आता है।

इसको निम्न रूप में भी लिख सकते हैं-

जहाँ

B चुम्बकीय क्षेत्र का मान
I विद्युत धारा का परिमाण
dl एक वेक्टर है, जिसकी परिमाण तार के अंतर तत्व की लंबाई है, और जिसकी दिशा पारंपरिक धारा की दिशा है,
μ0 चुंबकीय स्थिरांक हैmagnetic constant,
is the displacement unit vector in the direction pointing from the wire element towards the point at which the field is being computed, and
is the full displacement vector from the wire element to the point at which the field is being computed.

मोटे अक्षरों में लिखे गये संकेत सदिश राशियाँ निरूपित करते हैं।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]