बनू हाशिम

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६०० ईसवी में अरबी क़बीलों का विस्तार जिसमें क़ुरैश भी देखे जा सकते हैं (बनू हाशिम क़ुरैश की उपशाखा है)

बनू हाशिम (अरबी: بنو هاشم‎, अंग्रेज़ी: Banu Hashim) एक अरबी क़बीला है जो बड़े क़ुरैश क़बीले की एक उपशाखा है। इसका नाम पैग़म्बर मुहम्मद के पर-दादा हाशिम (هاشم‎, Hashim) पर रखा गया है और इसके सदस्य अपने-आप को उनका वंशज मानते हैं। अरबी भाषा में 'बनू' का मतलब 'बेटे' होता है और 'बनू हाशिम' का मतलब 'हाशिम के बेटे' है।[1] बनू हाशिम क़बीले के सदस्य अकसर 'हाशमी', 'हुसैनी' और 'हसनी' जैसे नाम रखते हैं। पारम्परिक क़हतानी-अदनानी अरब श्रेणीकरण के नज़रिए से बनू हाशिम अदनानी क़बीला है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The eternal message of Muhammad, Abdel Rahman Azzam, Devin-Adair Co., 1964, ... Muhammad's immediate family on his father's side were the Banu-Hashim or Hashimites, so named for Muhammad's great-grandfather Hashim. (Banu means sons of, and is the plural of ibn) ...